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“भाई बहिनकेँ पावनि भरदुतिया”

160 भ्यूज

— पीताम्बरी देवी     

भाई बहिन के पावनि भरदुतिया
भर दुतिया ई पावनि कातीक मास के शुक्ल पक्ष के दुतिया तीथ के मनौल जाईत अछि ।एहि दिन बहिन भोरे भोर उठि के बाट निपैत छथि जे भाई बासि बाट बाटे नै औता।आंगन निप के बिच आंगन में एरपन दय के पीरहि में सिंन्दूर पिठार लगा के एरपन पर राखि आगु में दोसर एरपन दय के ओहि पर पीतल के अढ़िया बा नै रहय ते कोनो गहिर बर्तन राखि दी आर ओहि मे पान ,सुपारी, कुम्हरक फुल , लंग, ईलाइचि ,हरीर ,चान्दी के सीक्का नैरह ते येह सिक्का , धात्री , राखि दी ।आर उजरा चानन, सिंन्दूर, पिठार, मौध ,गाय के घी ,एक लोटा जल कात में ओरिया के राखि लिय ।भाई के पीरहि पर बैसा के सिंन्दूर पिठार मौध गाय के घी चानन सबटा तीन बेर हाथ पैर में लगा के सब सामग्रीअढ़िया बला भाई के हाथ में द के जल ल के हाथ पैर धो देल जाई छनि।भाई के चानन ओ सिंन्दूर के ठोप क दियौन ।फेर भाई के ओकरी मखान नारीयन मधुर आदि सामग्री ल के जलखै दियौन ।फेर भाई के जे नीक निकुत भोजन बनौने होई से भोजन कराउ।भाई बहिन के जे जुरनि से सनेस दै छथिन जेना गहना ,साड़ी ,रूपैया जे जोकरक भाई रहै छथिन।अपन अपन बिभव पर छै भाई बहिन के पावनी ।एहि दिन भाई के पूजा केला से भाई के औरदा बढ़ै छनि आर सब बहिन के नैहर आवाद रहय तेकर कामना रहै छै ।ई पावनी बहुत प्राचीन समय से आबि रहले ।कहल जाईत अति जे सुर्य पुत्र यम आर सुर्य पुत्री यमुना के समय से आबि रहले यमुना नोतलनि यम के हम नौतै छी भाई के जेना यम के औरदा छेन तहिना हमरो भाई के औरदा रहय।इ मंन्त्र पढ़ि के जल ढ़ारी।यम आर यमुना में बहुत प्रेम छलनि दूनू भाई बहिन हरदम संगे रहैत छलथि ।जखनि यमुना सासुर चल गेलखिन ते यम के बहिन लेल मोन कचोटनि तखनि एक दिन बहिन से भेट करय गेला । यमुना भाई के देख के बहुत प्रसन्न भेलि ।ओ बिधि पूर्वक भाई के पूजा केलनि ओ कार्ति मास के दुतिया तीथ छल भाई बहिन के कहलनि जे हम अहा पर बहुत प्रसन्न छि वर मागु ‌यमुना भाई से कहलनि जे सब दिन भौजी के आर आई भाई बहिन के दिन रहय आई के दिन ककरो भाई के अहा प्राण हरण नै करबै सब बहिन के सोहाग भाग्य भरल रहै ।यम एबमस्तु अहि के बिदा भ गेला।
पीताम्वरी देवी

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