“शिव शक्तिक आराधक मिथिला”

41

— कीर्ति नारायण झा   

शिव शक्तिक आराधक मिथिला – भगवान शिव स्वयं कहने छैथि कि शिव शक्ति के विना आधा छैथि तहिना शक्ति शिव के विना। भगवान शिव केर अर्धनारीश्वर रूप एहि बात केर प्रत्यक्ष प्रमाण अछि जे श्रृष्टि केर निर्माण शिव आ शक्ति के बिना संभव नहि छल। जाहि ठाम शिव ताहि ठाम शक्ति अवश्य उपस्थित रहैत छैथि। सृष्टि में असंतुलन के समय सेहो शिव आ शक्ति अत्यन्त प्रभावी होइत छैथि। शिव स्वयं संहारक छैथि आ जखन अति भऽ जाइत अछि तखन शक्ति स्वयं कालिका के रूप धरि रक्तबीज आ दुर्गा बनि महिषासुरमर्दिनि बनैत छैथि। मिथिला देवी उपासक के लेल प्रसिद्ध अछि तेँ देवी पूजा समस्त मिथिला में अत्यंत धूमधाम केर संग मनाओल जाइत अछि। देवी उपासक होयवाक सभ सँ पैघ लक्षण कपार पर ठोप सँ लगाओल जाइत अछि। देवी उपासक गोल ठोप आ देव उपासक ठढका ठोप करैत छैथि। जनक नन्दिनी जानकी केर जन्म स्थल होयवाक कारणे सेहो मिथिला में देवी पूजा केर विशेष महत्व छैक। मिथिला मे शक्ति केर पूजा सभक आंगन में होइत छैक। उच्चैठ भगवती, श्यामा माय, नवादा भगवती, काली मंदिर राजनगर, चामुण्डा स्थान, छिन्नमस्तिका धाम उजान इत्यादि अनेको शक्तिपीठ अछि मिथिला में जाहि ठाम शक्ति स्वयं आबि कऽ बास करैत छैथि। मधुबनी जिलाक डोकहर स्थान मे राज राजेश्वरी अर्थात शिव आ शक्ति केर प्रेम स्थल मानल जाइत अछि। जहाँ धरि शिव केर प्रश्न उठैत छैन्ह तऽ हिनक मन्दिर के एकटा बहुत पैघ सूचि मिथिला में देखल जा सकैत अछि – कपिलेश्वर नाथ , विदेश्वरनाथ, भुवनेश्वर नाथ, कुशेश्वर नाथ, सिंहेश्वरनाथ, जागेश्वरनाथ इत्यादि।सर्वविदित अछि जे महाकवि विद्यापति केर भक्ति सँ प्रसन्न भऽ शिव स्वयं उगना के रूप में चाकर बनि कऽ विद्यापति केर सेवा कयने छलाह जकर कथा भवानीपुर के उग्रनाथ महादेव मंदिर में देखल जा सकैत अछि। हमर सभक मिथिला एहेन पवित्र स्थान अछि जाहि ठाम शिव आओर शक्ति केर उपासना समान रूप सँ होइत अछि। शिव के पार्थिव शिवलिंग केर पूजा मिथिलाक घरघर में पुरूष द्वारा कयल जाइत अछि तहिना मिथिलाक प्रत्येक आँगन में गोसाओन के घर में नित्य पूजा स्त्रीगण द्वारा कयल जाइत अछि। शिव शक्ति केर एहि प्रकारक समभाव सँ पूजा मिथिलाक अतिरिक्त बहुत कम स्थान पर होइत अछि। जय शिव आ जय शक्ति।