लेख विचार
प्रेषित: आभा झा अद्विका
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय : अंतर्जातीय विवाह: कारण आ भविष्यक परिणाम
मिथिलाक पावन संस्कृति आ पारंपरिक सामाजिक ढांचामे विवाहकेँ मात्र दू व्यक्तिक मिलन नहि, बल्कि दू परिवार आ दू कुलक पवित्र बंधन मानल जाइत अछि। मुदा समयक परिवर्तनशील चक्रमे ‘अंतर्जातीय विवाह’ (विभिन्न जातिक बीच विवाह) एकटा एहन विषय बनि कऽ उभरल अछि जाहि पर व्यापक विमर्शक आवश्यकता अछि। आधुनिकताक दौड़मे समाजक पुरान मान्यता सभ टूटि रहल अछि आ वैयक्तिक स्वतंत्रताक महत्व बढ़ि रहल अछि।
अंतर्जातीय विवाहक मुख्य कारण –
अंतर्जातीय विवाहक बढ़ैत प्रवृत्तिक पाछाँ कतेको सामाजिक आ मनोवैज्ञानिक कारण अछि:
शिक्षा आ जागरूकता: उच्च शिक्षाक प्रसार सँ युवा वर्गक सोचमे व्यापक परिवर्तन अयल अछि। आब लोक जातिक संकीर्ण घेरा सँ बाहर निकलि कऽ गुण आ योग्यताकेँ प्राथमिकता दऽ रहल छथि।
नगरीकरण आ कार्यस्थल: आधुनिक समयमे युवक-युवती एकहि संगे कॉलेज वा ऑफिसमे काज करैत छथि। एक संगे समय बितेला सँ वैचारिक साम्यता बढ़ैत अछि, जाहि सँ जाति-पातिक भेदभाव गौण भऽ जाइत अछि।
कानूनी संरक्षण: भारतीय संविधान आ कानून ‘विशेष विवाह अधिनियम’ क माध्यम सँ अंतर्जातीय विवाहकेँ पूर्ण मान्यता आ सुरक्षा प्रदान करैत अछि।
सिनेमा आ संचार माध्यम: फिल्म, सोशल मीडिया आ इंटरनेट आधुनिक पीढ़ीकेँ ई संदेश दऽ रहल अछि जे प्रेम आ जीवनसाथीक चुनावमे जाति बाधक नहि हेबाक चाही।
भविष्य मे एकर परिणाम –
भविष्यक दृष्टिकोण सँ अंतर्जातीय विवाहक कतेको सकारात्मक आ चुनौतीपूर्ण परिणाम देखल जा सकैत अछि:
१. सामाजिक समरसता आ एकता:
भविष्यमे जँ अंतर्जातीय विवाहक संख्या बढ़ैत अछि, तँ जातिवादक जड़ि कमजोर होयत। लोकक बीच ‘हम’ आ ‘ओ’ क भावना समाप्त भऽ कऽ एक अखंड समाजक निर्माण होयत। ई राष्ट्रीय एकताक लेल एकटा महत्वपूर्ण सोपान सिद्ध होयत।
२. आनुवंशिक लाभ:
वैज्ञानिक दृष्टिकोण सँ देखल जाय तँ, दूरक संबंध वा अलग समूहमे विवाह कयला सँ संततिमे आनुवंशिक रोगक संभावना कम होइत अछि आ आने वाली पीढ़ी बेसी स्वस्थ आ प्रतिभाशाली होइत अछि।
३. सांस्कृतिक समन्वय:
जखन दू अलग परिवेशक लोक एक संगे रहत, तँ खान-पान, भाषा, आ परंपराक आदान-प्रदान होयत। भविष्यक समाज बेसी उदार आ सहिष्णु बनत।
४. पारिवारिक संघर्षक चुनौती:
एकर एकटा नकारात्मक पक्ष ई भऽ सकैत अछि जे पारंपरिक परिवारक बीच वैचारिक मतभेद बढ़ि सकैत अछि। मुदा, जेना-जेना समय बीतत, समाज एहि बदलावकेँ स्वीकार करत।
अंतर्जातीय विवाह समाजक रूढ़िवादिता पर एकटा प्रहार अछि। यद्यपि मिथिलाक पारंपरिक परिवेशमे एखनो एकरा पूर्ण रूपेण स्वीकार करबामे कतेको बाधा अछि, मुदा ई भविष्यक वास्तविकता अछि। एकर उद्देश्य जातिकेँ खत्म करब नहि, बल्कि मनुष्यकेँ मनुष्यक रूपमे देखब हेबाक चाही। जँ विवाहक आधार प्रेम, सम्मान आ वैचारिक मेल होय, तँ जातिक दीवार स्वतः गिरि जाइत अछि।
“समाजक विकास ओहि दिन सार्थक मानल जायत, जखन कोनो व्यक्तिक पहचान ओकर जाति सँ नहि बल्कि ओकर कर्म आ संस्कार सँ होयत।”
जय मिथिला, जय मैथिली।
