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अन्तर्जातीय बिआह सँ संकर वर्ण केर संतान उत्पन्न होइत अछि

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लेख विचार
प्रेषित: नीलम झा निवेधा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय : – अंतर्जातीय विवाहक कारण आ भविष्यक परिणाम

अदौंकाल सँ अप्पन मिथिलामे परम्परानुसार हिंदू जाति समुदायमे अप्पन स्वजाती संगमे विवाह करबाक नियम रहैछ, एहि विवाहमे सामंजस्य सेहो बरकरार रहैछ। कारण विवाह मात्र दू व्यक्तिक मिलन नञि बल्कि दू परिवारक मान- सम्मान, संस्कृति-संस्कार,बोल-चाल, आहार -व्यवहारक सुखद संगम रहैछ।

मुदा आब लड़का-लड़की दुनू बराबर शिक्षित रहैछ। दुनू घर सँ बाहर असगरे पढ़बालेल जाइछ।उमेर सेहो खूम रहैछ।एहि परिस्थिति मे शिक्षा संग जागरूकता होइतेटा छैक।ओ सभ अप्पन जिनगीके फैसला स्वंय लेबए चाहैछ,एहन स्थिति मे वो स्व जातिय दायरा खत्म भ’ जाइछ, त’ एहि हालातमे परिवर्तन भेनाइ कोनहुँ बड्ड पैघ गप्प नञि रहैछ।

एहिमे सोशल मीडिया के सेहो बड्ड पैघ हाथ रहैछ। सभहक हाथमे स्मार्ट फोन आ ई फेसबुक, इंस्टाग्राम, वाट्सएप, ट्यूटर, मैसेंजर इत्यादि सेहो बहुत सहायक होइछ एहिमे।

पहिने जखन ई बात घर तक पहुँचैत छल त’ घरमे बवाल होइत छल परंच एखन अभिभावक सेहो कनेक ढ़ीला पैर गेल छथिन नब परिवेशक परिस्थितिक कारण सँ । देखादेखी समाजमे ई आब बहुत आम बात  भ’ गेलैक अछि।

प्रभाव-

एकर दुष्प्रभाव त’ बहुत देखल जाइत अछि, उच्च वर्गक धिया पूताक त’ सर्वनाश भ’ जाइत छै। परिवारमे सुख शांति नष्ट भ’ जाइछ। हरदम तनावग्रस्त जिनगी लोक जिवैछ। अन्तर्जातीय विवाह सँ जे संतान उत्पन्न होइछ से वर्णसंकर कहबैछ। ओ उदण्ड प्रवृत्ति के आ कुल नाशक सेहो हेबाक संभावना बेसी रहैत अछि। तैं अप्पन संस्कृति संस्कारक संरक्षण हमर सभहक विशेष जिम्मेदारी सेहो बनैत अछि।

 

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