Search

सिनुर संबंध केर विश्वासक ताग आर सामाजिक पहिचान छी

93 भ्यूज

लेख विचार
प्रेषित: दिलीप झा ललित
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय : सिनुर केर महत्व

“मांग केर बीचक लाल रेखा”

मिथिला मे सिंदूरक सांस्कृतिक दर्शन

मिथिला संस्कार, साधना आऽ सांस्कृतिक गरिमा के ओ पावन भूमि अछि जतय जीवनक प्रतियेक क्रिया मे एक गूढ़ अर्थ समाहित रहैत अछि। एहि धरती पर नारी के श्रृंगार केवल सौंदर्यक प्रदर्शन नहि, बल्कि जीवन-दर्शन के अभिव्यक्ति अछि। एहि श्रृंगार मे “सिंदूर” के स्थान अत्यंत विशिष्ट अछि।
सिंदूर, जे बाह्य दृष्टि सँ एक लाल चूर्ण मात्र प्रतीत होइत अछि, मिथिला के संदर्भ मे नारी के वैवाहिक पहचान, समर्पण आऽ प्रेम के सशक्त प्रतीक बनि जाइत अछि। ई परंपरा केवल एक सामाजिक नियम नहि, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी संचित विश्वास, आस्था आऽ भावनात्मक जुड़ाव के जीवित धरोहर अछि।
जखन एक मैथिल नारी अपन माँग मे सिंदूर धारण करैत छथि, त’ ओ केवल एक रीति के निर्वाह नहि करैत छथि, बल्कि अपन जीवन के एक गहन संकल्प सहचर्य, निष्ठा आऽ सहअस्तित्व के उद्घोषणा करैत छथि।
मिथिला मे सिंदूर केवल श्रृंगारक वस्तु नहि, बल्कि एक सामाजिक आऽ सांस्कृतिक संकेत अछि। ई नारी के वैवाहिक स्थिति के स्पष्ट रूप सँ दर्शबैत अछि। विवाहक समय “सिंदूरदान” के क्षण विशेष पवित्र मानल जाइत अछि, जतय वर कन्या के माँग मे सिंदूर भरि क’ अपन जीवन-संबंध के स्थायित्व के प्रतिज्ञा करैत छथि।
भारतीय परंपरा मे सिंदूर के बड्ड गहिर आध्यात्मिक महत्व अछि। माता पार्वती आऽ भगवान शिव के कथा मे सिंदूर “अखंड सौभाग्य” के प्रतीक मानल गेल अछि। मान्यता अछि जे माता पार्वती अपन पति के दीर्घायु आऽ कल्याण हेतु सिंदूर धारण करैत छलीह। एहि प्रकार सिंदूर ने केवल सामाजिक बंधन, बल्कि आत्मिक समर्पण आऽ दिव्य प्रेम के सेहो प्रतीक अछि।
मिथिलांचल के लोकगीत विशेषतः विवाह आऽ विदाई गीत सिंदूर के महिमा सँ ओतप्रोत अछि। कन्यादान आऽ विदाई के समय सिंदूर एक नव जीवन के संकेत बनि क’ उभरैत अछि। लोकभावना मे सिंदूर प्रेम, विश्वास आऽ अटूट बंधन के प्रतीक बनि जाइत अछि “भरल सिंदूर साजन हाथ, अब जीवन भर साथ…”।
मिथिला समाज मे सिंदूर नारी के “सौभाग्य” के चिह्न अछि। ई केवल व्यक्तिगत पहचान नहि, बल्कि सामाजिक व्यवस्था के एक अंग अछि। सिंदूर धारण करैत नारी गृहस्थ जीवन के केंद्र मानल जाइत छथि, जे परिवार, परंपरा आऽ संस्कार के सूत्र में बाँधि क’ रखैत छथि।
सिंदूर एक मौन भावना अछि। ई नारी के मन मे प्रेम, त्याग, निष्ठा आऽ सहनशीलता के सतत स्मरण करबैत अछि। सब दिन माँग मे सिंदूर लगौनाय बुझु एक नव संकल्प लेनाय अछि संबंध के निभाबय, संजोय आऽ सहेजय के।
आधुनिक युग मे सिंदूर के अर्थ मे किछु परिवर्तन अवश्य आयल अछि। किछु महिला सभ एहि के सांस्कृतिक पहचान के रूप मे देखैत छथि, त’ किछु व्यक्तिगत स्वतंत्रता के आधार पर अपन निर्णय लेैत छथि। तथापि, मिथिला मे सिंदूर आइयो अपन परंपरागत गरिमा आऽ भावनात्मक महत्व के संग जीवित अछि।
अंततः, मिथिला के परिप्रेक्ष्य मे सिंदूर केवल एक लाल रेखा नहि, बल्कि जीवन के गहन दर्शन के प्रतीक अछि। ई प्रेम के रंग अछि, समर्पण के संकेत अछि, आऽ वैवाहिक जीवन के पवित्रता के उद्घोषणा अछि।
सिंदूर मे एक नारी के सम्पूर्ण संसार समाहित रहैत अछि ओकर आशा, ओकर विश्वास, ओकर त्याग आऽ ओकर प्रेम। समय बदलैत रहत, परंपरा नव रूप लेत, मुदा सिंदूर के एहि आत्मिक आऽ सांस्कृतिक महिमा सदा अमर रहत। कियैक तँ ई केवल एक आभूषण नहि ई त’ मिथिला के नारी जीवन के मौन, किन्तु अत्यंत प्रभावशाली कविता अछि।

Related Articles