लेख विचार
प्रेषित: आभा झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- नव वर्ष केर उमंग
नबका पीढ़ीक उत्साह: चकाचौंध आ आधुनिकता
नबका पीढ़ी लेल नववर्ष एकटा बहुत पैघ उत्सव जेकाँ अछि। हिनका लेल उमंगक मतलब थिक बाहरी प्रदर्शन, पार्टी, आ सोशल मीडिया।
सोशल मीडिया आ दिखावा – नबका पीढ़ी लेल ‘इंस्टाग्राम रील्स’ आ ‘फेसबुक पोस्ट’ उमंगक पैघ हिस्सा छैक। रातिक १२ बजते ‘हैप्पी न्यू ईयर’ लिखब आ फोटो अपलोड करब हिनक प्राथमिकता रहैत छैन्ह।
बाहरी आनंद – क्लब, डिस्को, आ रेस्टोरेंट में जा क’ संगी-साथी संग पार्टी करब नबका पीढ़ीक उमंगक परिचायक अछि। हिनका लेल ई दिन एकटा “नया आरंभ” स’ बेसी “नया रोमांच” थिक।
संकल्प – नबका पीढ़ी संकल्प त’ बहुत लैत अछि—जिम जेनाइ, डाइट करब, या कतहु घुमै लेल जेनाइ—मुदा अक्सर ई उमंग किछु दिन में कम भ’ जाइत अछि।
पुरना पीढ़ीक उमंग – सादगी आ संस्कार
पुरना पीढ़ी लेल नववर्षक उमंग भीतर स’ होइत अछि। ओ ई दिन क’ कोनो शोर-शराबा स’ बेसी कृतज्ञताक’ भाव स’ देखैत छथि।
आध्यात्मिक शुरुआत – पुरना पीढ़ीक उमंग मंदिर जेनाइ, पूजा-पाठ करब, आ पैघ-बुजुर्गक आशीर्वाद लेबा में देखल जाइत अछि। हिनका लेल उमंगक अर्थ अछि जे पिछला साल नीक सँ बीतल आ अगला साल मंगलमय होइ।
पारिवारिक मिलन – पुरना पीढ़ीक लेल उमंगक मतलब छै कि घरक सब सदस्य एक संग बैस क’ जलखइ (नाश्ता) करी आ गप-सप करी। हिनका लेल घरक आंगन मे मनाओल गेल नववर्ष कोनो भी होटलक पार्टी स’ बेसी आनंददायक होइत छै।
अनुभवक गहराई – पुरना पीढ़ी समयक महत्व बुझैत छथि, ताहि लेल हिनक उमंग में एकटा गंभीरता होइत अछि। ओ नया साल में पुरना गलती क’ सुधारय क’ कोशिश करैत छथि।
तुलनात्मक दृष्टि: ककर पलड़ा भारी?
जँ हम “बेसी उमंग” क’ बात करी, त’ देखय मे नबका पीढ़ी बेसी उत्साहित लगैत छथि कियैक त’ हिनक शोर बेसी छैन्ह। मुदा जँ “ठहराव आ सुख” क’ बात करी, त’ पुरना पीढ़ीक उमंग बेसी गहिंर अछि।
नबका पीढ़ीक उमंग क्षणिक आ बाहरी छैक, जखन कि पुरना पीढ़ीक उमंग स्थायी आ मानसिक शांति स’ जुड़ल छैक। आइ-काल्हि एकटा नया बदलाव ईहो देखल जा रहल अछि जे नबका पीढ़ी सेहो आब धीरे-धीरे अपन जड़ि दिस मुड़ि रहल अछि, मुदा ओकर तरीका आधुनिक छैक।
नववर्षक उमंग पीढ़ी स’ बेसी सोच पर निर्भर करैत अछि। नबका पीढ़ीक चपलता आ पुरना पीढ़ीक गंभीरता जखन मिलैत अछि, तखने सही अर्थ में नववर्षक स्वागत होइत अछि। उमंग त’ बस एकटा माध्यम अछि जीवन क’ खुशी स’ जीयय क’ लेल, चाहे ओ डीजे क’ धुन पर होइ या तुलसी क’ गाछ मे पइन द’ क’ होइ।
हिनक दुनू स्वरूप अपन-अपन ठाम सही अछि। मुख्य बात ई अछि जे हम पिछला साल स’ सीखि क’ आगाँ बढ़ी आ अपन मैथिल संस्कार क’ संगे राखि क’ दुनियाक दौड़ मे शामिल होइ। जय मिथिला, जय मैथिली।
