लेख
प्रेषित:- मंजूषा झा
विषय:-भारतीय नारी : दशा आ दिशा
भूमिका :
भारतीय समाज एक प्राचीन सभ्यता आ संस्कृति स सँ भरल समाज अछि। एतय नारी के भूमिका केवल घर तक सीमित नहि रहल अछि, बल्कि ओ समाज, साहित्य, राजनीति, आ आध्यात्मिक क्षेत्र मे सेहो विशेष योगदान देने छथि। मुदा समयक संग-संग भारतीय नारीक दशा आ दिशा मे परिवर्तन आयल अछि। कतहु प्रगति अछि त’ कतहु आइयो पाछाँ धकेलल जा रहल छथि। एह लेख मे हम भारतीय नारीक वर्तमान दशा आ भविष्यक दिशा पर विस्तार सँ चर्चा करब।
भारतीय नारीक ऐतिहासिक भूमिका :
प्राचीन भारत मे नारी के बहुत उच्च स्थान प्राप्त छल। वेद, उपनिषद, आ पुराण सभ मे नारी के विदुषी, धर्मज्ञ आ समाजक आधार मानल गेल अछि। गार्गी, मैत्रेयी, अपाला, आ अन्य स्त्री विद्वानक उदाहरण भेटैत अछि जे ब्रह्मज्ञान तक प्राप्त केलथि। रामायण-महाभारत जेकाँ ग्रंथ मे सीता, द्रौपदी, कुंती आदिक व्यक्तित्व आ साहस अद्वितीय अछि।
मध्यकाल मे जब भारत विदेशी आक्रमणक शिकार भेल, त’ नारीक दशा मे गिरावट आयल। पर्दा प्रथा, बाल विवाह, सती प्रथा जेकाँ कुप्रथा के जन्म भेल। समाजिक बंधन नारी के स्वाधीनता सँ वंचित केलक।
स्वाधीनता संग्राम आ नारी :
ब्रिटिश काल मे स्वाधीनता आंदोलन नारी के नव जोश देलक। रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू, अन्ना भाउ साठे, कस्तूरबा गांधी, अरुणा आसफ अली आदिक नाम गौरवपूर्ण अछि। एहि काल मे स्त्री शिक्षा, विधवा विवाह, आ स्त्री अधिकारक मांग जोर पकड़लक। राजा राममोहन राय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर जेकाँ पुरुष सुधारक लोक नारी उत्थान मे योगदान देलथि।
स्वतंत्र भारत आ नारीक स्थिति :
स्वतंत्रता प्राप्ति क’ बाद भारतक संविधान नारी केँ पुरुषक समान अधिकार देलक — समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा, रोजगार, संपत्ति, आ राजनीति मे भागीदारी। मुदा व्यवहार मे स्थिति एतबा सरस नहि रहल।
सकारात्मक पक्ष :
शिक्षा मे भारी प्रगति भेल अछि। ग्रामीण क्षेत्र धरि बेटीक स्कूल पहुँच सुनिश्चित भेल।
महिला आरक्षण नीति (पंचायती राज व्यवस्था मे ३३% आरक्षण) सँ’ नेतृत्व मे महिला सब अबैत छथि।
नौकरी, व्यवसाय, खेल, सिनेमा, आ विज्ञान मे भारतीय महिला अपन पहचान बना रहल छथि।
मिशन चंद्रयान-३, ISRO, DRDO, IAS, IPS, बैंकिंग, IT, चिकित्सा, इंजीनियरिंग आदिक क्षेत्र मे हजारो उदाहरण अछि जे नारी शक्ति के दर्शबैत अछि।
नकारात्मक पक्ष :
आइयो बहुत ठाम बेटी जनम लेला पर खुशी नहि होइत अछि।
दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा, यौन शोषण, छेड़छाड़, कन्या भ्रूण हत्या आदि समस्या सभ विद्यमान अछि।
कामकाजी महिला पर डबल जिम्मेदारी पड़ैत अछि — ऑफिस आ घर दुनू चलाबै के।
ग्रामीण क्षेत्र मे शिक्षा आ स्वास्थ्य सुविधा सीमित अछि।
निर्णय लेबाक स्वतंत्रता अखनो बहुत नारी के प्राप्त नहि अछि।
समाज मे मानसिकता के चुनौती :
भारतीय समाज मे आबहु तक नारी केँ ‘घर चलाबै वाली’, ‘संस्कार देबै वाली’ आ ‘पुरुषक परछाँही’ मानल जाइत अछि। बेटा के पढ़ेबा आ बेटा के कमेबा पर बेसी जोर देल जाइत अछि। विवाह सँ’ पूर्व आ विवाहक बाद दुनू समय मे नारी के सीमित अधिकार देल जाइत अछि।
“लड़की जाति” के कारण ओकर सपनाक पाँखि कटा देल जाऽ छै — “एतबा पढ़ल सऽ की होइतैक?”, “ब्याह त’ जल्दी करैए के छै ना।”
ई मानसिकता भारतीय नारी के दशा सुधारबा मे पैघ बाधा बनि रहल अछि।
नारी सशक्तिकरण के दिशा :
१. शिक्षा:
शिक्षा नारीक आत्मनिर्भरता के प्रथम सीढ़ी अछि। प्राथमिक सँ उच्च शिक्षा धरि बेटीक पहुँच सुनिश्चित करब अत्यंत आवश्यक अछि। डिजिटल शिक्षा सेहो एक नव अवसर अछि।
२. आर्थिक स्वतंत्रता:
नारी के स्वरोजगार, स्वयं सहायता समूह, लघु उद्योग, स्टार्टअप्स, बैंकिंग सुविधा, आ क्रेडिट सिस्टम सँ जोड़बाक जरूरत अछि।
३. स्वास्थ्य सुरक्षा:
महिला आ किशोरी लड़की लेल पोषण, माहवारी स्वच्छता, प्रसव सुरक्षा, आ मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देबाक आवश्यकता अछि।
४. कानूनी अधिकार जागरूकता:
घरेलू हिंसा विरोधी कानून, कार्यस्थल पर यौन शोषण रोकथाम कानून, संपत्ति अधिकार, विवाह/तलाक अधिकार — एकरा सब पर महिला केँ जानकारी आ कानूनी सहायता उपलब्ध करायल जाए।
५. डिजिटल सशक्तिकरण:
डिजिटल इंडिया मिशन मे महिला केँ स्मार्टफोन, इंटरनेट, डिजिटल भुगतान, आ ऑनलाइन शिक्षा स’ जोड़बाक नीति जरुरी अछि।
नारी आ नव भारत :
नव भारतक निर्माण मे नारीक भूमिका के नजरअंदाज नहि कएल जा सकै छै। एक शिक्षित आ सशक्त महिला अपन परिवार, समाज आ देश केँ उन्नति दिश लऽ जाइत छथि। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “सुकन्या समृद्धि योजना”, “उज्ज्वला योजना”, “मुद्रा योजना” — एहि सब सरकारी प्रयास सँ महिला केँ नव दिशा भेट रहल अछि।
उपसंहार :
भारतीय नारी दशा सँ दिशा दिस बढ़ैत नजर अबैत छथि। बाधा अछि, मुदा समाधान सेहो अछि। जरूरत अछि — समाजक सोच मे बदलाव, शिक्षा आ अवसरक समानता, आ महिलाक आत्मबल के मजबूत बनेबाक।
आजुक नारी अबला नहि, सबला छथि। ओ केवल घरे नहि, पूरे राष्ट्र के गढ़ैत छथि। सशक्त नारी, सशक्त भारत के नींव छथि। एहि लेल जरूरी अछि जे हम सब मिलिकय नारी के सम्मान, सुरक्षा आ स्वाधीनता सुनिश्चित करी।
स्त्री सभ जँ जगैथि, तऽ समाज जागत।
स्त्री जँ आगू बढैथि, तऽ देश प्रगति करत।।
