मिस यू “बाबू”

मिस यू “बाबू”

सभ नज़रि अबैत छथि, मुदा एक अहीं नहि “बाबू”,
आईयो लगैत अछि कि अहाँ आयब आ पूछब –
“ठीक छी ने बेटा ?”
मुदा आब ई शब्द कान तक पहुँचिते नहि अछि,
जिंदगी में बहुत उलझन अछि,मुदा अहाँ लsग में नहि छी,
क्यो नहि छथि जे आबि कs कहैथ – “बेटा घबड़ायब नहि”,
मोन करैत अछि कि पहिने के जेकाँ घंटो अहाँ सँ बात करितहुं,
मुदा आब ई हम्मर किस्मत में नहि अछि,जनैत छी हम !
आब अहाँ हमरा सभ लेल, यादे में जीवित छी “बाबू”,
तैयो हम्मर हृदयक कोन-कोन,
अहाँ लेल सिसकैत रहैत अछि “बाबू”,
क्यो नहि छथि अश्रु पोछैवाला,
स्वयं कनैत छी,स्वयं चुप होमs पड़ैत अछि,
अहाँ संग बिताओल पल-पल अखनो तक याद अछि,
लगैत अछि काल्हिये के बात छै !