मधेशक केवल पाँच मुद्दा – अधिवक्ता अधिकारवादी अभियानी रामलाल सुतिहार

विचार

– रामलाल सुतिहार

पाँच मुद्दा

मूलतः मधेस आन्दोलनक पाँच मुद्दा छैक। सब सँ पहिलुक नागरिकता थिकैक। नागरिकता अधिकार छी, सुविधा नहि। एकर कोनो किसिम नहि होएत छैक। कि नागरिक होएत छैक, कि अनागरिक होएत छैक। ई आधुनिक राजनीति केर सिद्धान्त छी। यैह त मधेस आन्दोलनक सबसँ मजबूत मुद्दा थिक।

दोसर छी – भाषाक मुद्दा। दोसराक भाषामे कतबो जानकार भेलाक बादो प्रतिस्पर्धा नहि कय सकैछ। तैँ मातृभाषा पर बेसी जोर देबाक चाही। मातृभाषा सँगे-संग मधेसक सम्पर्क भाषा नेपाली नहि, हिन्दी थिक। मधेस भरिक सम्पर्क भाषा हिन्दी छी। मधेस आर पहाड़क सम्पर्क भाषा सेहो हिन्दी छी। तैँ त पहाड़िया नेता मधेस एलाक बाद हिन्दीयहि मे भाषण करैत अछि।

तेसर मुद्दा – जनसंख्याक आधार मे प्रतिनिधि केर अछि। ई विश्वव्यापी मान्यता छी। देशभक्तिक परिभाषा कि छी? एकर माने भूमि आर जनता केँ माया (प्रेम) करब छी। काठमांडूक शासक केँ माया करनाय देशभक्ति नहि छी। ‘जननी जन्मभूमिश्च’ कहबाक अर्थ स्वयं जन्म लेल भूमि सँ जुड़ल अछि। तैँ यदि प्रजातन्त्र मानैत छी त जनसंख्याक आधार मे प्रतिनिधित्व देबय पड़त।

चारिम मुद्दा थिक समावेशिकता। आन्तरिक हो वा बाह्य, उपनिवेशक चलते राज्यक चरित्र समावेशी नहि छैक। ८० प्रतिशत सँ बेसी राज्यक अंगमे एक्कहि टा जाति, भाषाभाषीक वर्चस्व अछि। २०६३ पछातिक समावेशी पर्यन्त एकरा समेटय नहि सकल अछि। एखन आरक्षण देल गेल अछि। ई बस एक गोट उपाय थिक। सीमान्तकृत समुदाय केँ प्रवर्धन, संवर्धन सेहो करय पड़त। समावेशिकता सेहो जनसंख्याक आधार मे करय पड़त।

पाँचम मुद्दा थिक संघीयता। मधेस केन्द्रकेर आन्तरिक उपनिवेश छी, उपनिवेश नहि। तैँ पृथकता जरुरी नहि छैक। यदि पृथकता केँ रोकबाक हो त संघीयता चाहबे करी। संघीयता मधेसक एकताकेँ नहो तोड़य तेहेन होबय पड़त। एखन मधेस केँ ६ भाग मे बाँटल गेल अछि, एहि सँ पृथकताक भावना बढत। शुरुमे ‘एक मधेस एक प्रदेश’केर माँग छल। तेकर बाद ‘एक मधेस दुई प्रदेश’ भेल। ताहि सँ बेसी मधेस केँ टुकड़ा काटलाक बाद संघीयताक अर्थ नहि रहत। मधेस केँ प्रान्त बनेबा काल विखण्डन हेतैक से चिन्ता करब राष्ट्रीय एकता मे विश्वास नहि होयब थिक। शंके करबाक अछि त ६/७ टा प्रान्त बनेलो सँ देश टूटि सकैत छैक। मधेसी होएते ओ देश तोड़यवला नहि बनैछ। सिक्किम मे विलयको घोषणा कएनिहार खस-आर्य, पहाड़िये छल।