रामायण केर अति रमणीक स्वरूप केर वर्णनः रामचरितमानस सँ सीख २०

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – २०

मैथिली जिन्दाबाद पर आइ रामचरितमानस सँ सीख केर २०म भाग प्रकाशित करैत मन-मस्तिष्क रोमांच सँ भरल अछि। गूढ दर्शन केर बात अत्यन्त सहज भाव आ भाषा मे महाकवि तुलसीदास द्वारा बुझायल गेलाक बादो माथ अस्थिर होयबाक कारण घुरमुरा जाएत छैक। तैँ स्वाध्याय केर कोनो आलेख केँ बेर-बेर पठन-मनन कएला सँ प्रीति बढबाक संग-संग निजी जीवन मे बहुतो प्रकारक लाभ भेटबाक तथ्य कहल गेल छैक। तुलसीदासजी बहुत नीक जेकाँ रामायणक स्वरूप केँ एकटा सुन्दर पोखरि (सरोवर) सँ तूलना कएलनि अछि। एहि पोखरीक निर्माण कोन जल सँ हेतैक, महार कोना बनतैक, बगिया कोना सजतैक, फूल-फल कि लगतैक…. अति रमणीक ढंग सँ व्याख्या कएल गेल अछि।

रामचरिमानस सँ सीख – २०

१. सुन्दर सात्त्विक बुद्धि भूमि थिक, हृदय ताहि मे गहिंर स्थल थिक, वेद-पुराण समुद्र थिक आर साधु-संत मेघ छथि। ई मेघ श्रीरामजीक सुयशरूपी सुन्दर, मनोहर और मंगलकारी जल केर वर्षा करैत अछि। सगुण लीलाक जे विस्तार सऽ वर्णन करैत अछि, वैह राम सुयशरूपी जलकेर निर्मलता थिक। जे मल (गंदगी) केँ नाश करैत अछि आर जाहि प्रेमाभक्तिक वर्णन नहि कएल जा सकैछ, ओ एहि जल केर मधुरता और सुन्दर शीतलता थिक। वैह (राम सुयशरूपी) जल सत्कर्मरूपी धानक लेल हितकर अछि आर श्रीरामजीक भक्तक त जीवनहि थिक। वैह पवित्र जल बुद्धिरूपी पृथ्वी पर खसल आर समेटिकय कानरूपी मार्ग सँ चलल, आर मानस (हृदय) रूपी श्रेष्ठ स्थान मे भरिकय ओत्तहि स्थिर भऽ गेल। यैह जल आब पुरान बनिकय सुन्दर, रुचिकर, शीतल आर सुखदायी भऽ गेल।

२. रामायण मे चारि गोट अत्यन्त सुन्दर आर उत्तम संवाद (वार्ता) भेटैत अछि, काकभुशुण्डि आ गरुड़जी, शिव आ पार्वती, याज्ञवल्क्य आ भरद्वाज एवम् तुलसीदास आ संत केर बीच जे वार्ता अछि यैह सुन्दर सरोवर केर चारू घाट थिक।

३. रामायण केर सात गोट काण्ड – बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड एवं उत्तरकाण्ड – एहि मानस सरोवर केर सुन्दर सात गोट सीढी थिक, जेकरा ज्ञानरूपी नेत्र सँ देखिते देरी मोन प्रसन्न भऽ जाएत अछि।

४. श्रीरघुनाथजीक निर्गुण आर निर्बाध महिमाक जे वर्ण अछि ओ अथाह गहिंर अछि। श्री रामजी आर श्रीसीताजी केर यश अमृतक समान जल थिक।

५. रामायण मे जे उपमा सब देल गेल अछि वैह तरङ्गक मनोहर विलास थिक। सुन्दर चौपाई सब एहि मे घनगर पसरस कमलिनी थिक आर कविताक युक्ति सब सुन्दर मणि (मोती) उत्पन्न करयवाली सुहाओन खुरचैन (सीपि) सब थिक। जे सुन्दर छन्द, सोरठा आर दोहा सब अछि ओ बहुरंगा कमलक समूह समान सुशोभित अछि। अनुपम अर्थ, ऊँच भाव आर सुन्दर भाषा एकर पुष्प-रज, पुष्प-रस एवम् सुगन्ध थिक। सत्कर्मक पुञ्ज – भँवराक पंक्ति, ज्ञान, वैराग्य व विचार – हंस, कविताक ध्वनि – वक्रोक्ति, गुण और जाति – मछरी, अर्थ-धर्म-काम-मोक्ष (चारू उपलब्धि) एवम् काव्य केर नौ रसक संग जप, तप, योग आ वैराग्यक प्रसंग – ई सबटा सुन्दर जलचर जीव थिक।

६. तहिना रामायणरूपी सरोवर मे पुण्यात्मा, साधु तथा श्रीराम केर नामक गुणक गान – ई सबटा जलपक्षी थिक। संतक सभा – सरोवर केर चारू कात आमक बगीचा आर श्रद्धा बसन्त ऋतुक समान कहल गेल अछि। नाना प्रकार सँ भक्तिक निरूपण, क्षमा, दया तथा दम लता सभक मण्डप समान अछि। मनक निग्रह, यम (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य आ अपरिग्रह), नियम (शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय आ ईश्वर प्रणिधान) टा एकर फूल थिक। ज्ञान फल थिक। आर, श्रीहरिक चरण मे प्रेम होयब एहि फलक रस थिक। ई समस्त बात वेद मे कहल गेल अछि।

हरिः हरः!!