रवीन्द्र भारती खजौली मधुबनी
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विनती करैय छी मिथिलावासी ,
मैथिली जुनि बिसरू मैथिल भाषी ।
गाम बिसरलौ, नाम बिसरलौ,
चौकी आ दलान बिसरलौ,
कन्सारक भुजल ओ भुजा,
जुडिशीतलक थाल बिसरलौ।
विनती करैय छी मिथिलावासी ,
मैथिली जुनि बिसरू मैथिल भाषी।
पाग बिसरलौ, पान बिसरलौ,
पोखरि, माछ, मखान बिसरलौ,
सामा चकेबा, साँझ, पराति,
विद्यापतिक ओ गान बिसरलौ।
विनती करैय छी मिथिलावासी ,
मैथिली जुनि बिसरू मैथिल भाषी ।
करकर करैत ओ तिलकोर,
मिठका तिलबा गुडक बोर,
गामक भोज अरू सरोकार,
कतहु कि भेटत सगरो संसार।
विनती करैय छी मिथिलावासी ,
मैथिली जुनि बिसरू मैथिल भाषी।
कतहु कमाबु कतहु खटाबु,
ओतहि मिथिलाक नाम बढाबु,
विद्यापति, माँ जानकीक गाथा,
गाबु आ सभके गाबि सुनाबु।
विनती करैय छी मिथिलावासी ,
मैथिली जुनि बिसरू मैथिल भाषी।
मिठगर बोली अपन मैथिली,
सब कियौ बाजु आउर बजाबु,
अपन मिथिला केर लाज बचाबु।
विनती करैय छी मिथिलावासी ,
मैथिली जुनि बिसरू मैथिल भाषी।
जय मिथिला। जय मैथिली

4 Comments
ई कोनो और रचनाकार केर रचना छी
http://www.mithiladainik.in/2017/01/maithili-poem-by-ghanshyam-jha.html?m=0
sorry galat information milala chhal chhama
कोनो बात नहि, यदि ई रचना घनश्याम झा केर थिकन्हि त भूल-सुधार कएल जा सकैत छैक। रवीन्द्र जी – नीक काज मे कोनो त्रुटि भेल तैयो कोनो बात नहि। आगू स ध्यान राखब जे किनको कोनो रचना लगाबय सँ पहिने पुष्टि कय लेल करब जे ई हुनकहि रचना थिकन्हि अथवा कापी-पेस्ट। हरिः हरः!!
awasay sir