वर्तमान समय में ‘दहेज’ एकटा मिथिलाक लाईलाज रोग अछि तकर दावा सौ में सँ एक सौ दस टका लोक करैत छथि, तखन दहेजक समर्थक के…?, इ प्रश्न फाँर बान्हि सोझा ठार भए जाएत अछि।
व्हाट्सऐप, सोशल मंच में एखुनका समय में सबसँ आसानी सँ उपयोग कए सकै बला संजाल (इंटरनेट मिडिया) केर साधन अछि। अहि व्हाट्सऐप पर एकटा समूह बनल अछि जेकर नाम ‘जय मिथिला जय मैथिली’ छैक। ओना तs अहि समूह पर सार्थक गप या विचार समय-समय पर होईत रहैत छैक मुदा आय जे मुद्दा छल ओ छल ‘दहेज’। विभिन्न सदस्य अपन-अपन सुझाव आ विचार देलनि। किछु सदस्य दहेज केर समर्थन में छलाह तs किछु प्रचंड विरोधी। किछु सदस्य जे दहेजक भुक्तभोगी छलैथ ओ ‘दहेज’ नामहि सँ भावुक भए गेलाह। जखन हुनक मनोदशा पूछल गेल तs दहेज लोभी पर ऐना प्रहार केलनि जेना साँप पर नेवला। किछु सदस्य प्रेम विवाह, अंतर्जातीय विवाह केर सुझाव देलनि जाहि सँ दहेज खत्म कएल जा सकैत अछि तs किछु सदस्य अहि केर खुल्ला विरोध केलनि जे इ मिथिलाक संस्कार केर लहू में नहि आबैत अछि अर्थात अपन असहमति जतौलनि। किछु सदस्य केर कहब छलैन जे, जे कियो आदर्श विवाह करैत छथि या हुनक विवाह दहेज मुक्त होईत अछि तs ओ परिवार विवाहोपरांत ओहि कन्या संग दुर्व्यवहार करैत छथि, प्रताड़ित करैत छथि।
हाँ, किछु सदस्य एहनो छलाह जे अहूँ में हँ आ हमरो में हँ, हाय रे धकपोचिया।। अहि तरहक सदस्य केर कहब छल जे केवल व्हाट्सऐप आ फेसबुक पर कुदला सँ दहेज खत्म नहि होई छैक अहि लेल धरातल पर कार्य होबाक चाहि आ ‘दहेज मुक्त मिथिला’ सँ उलटे सवाल केलनि जे एखन धैर कतेक विवाह दहेज मुक्त करेलौं.. अर्थात प्रमाणित करु।
उपरोक्त जानकारी सोझा राखब केर तात्पर्य इ अछि जे अहाँ सब कोन तरहक सोच राखैत छी….?
अनिल मिश्रः आदर्श विवाह के नाम पर सब खर्च कन्यागत पर उचित नहिं । एक त कम स कम खर्च दोसर जे खर्चा करी से दूनू पक्ष आपस में बॉइट ली । जहि स उत्तम विवाह के आदर्श उपस्थित हुआ । अंतर्जातीय विवाह समस्या के निदान नहिं । हँ नवयुवक सब के संकल्प करबा क चाही जे दहेज़ नहिं।
प्रवीण वर्माः नीक पोस्ट।समयाचीन…उपदेश दै वलाक कमी नहि होयत मुदा आचरण केर गारंटी के लेत..एहि लेल लड़का आ लड़की दुनु के जागृत होमय परतै..आ इ तखने संभव होयत जखन वर आ कन्या दुनु अपन पाँव पर खड़ा होयताह..आ एहि लेल शिक्षा पर विशेष ध्यान देबाक चाही।
राम विनोद शर्माः प्रकाशजी, गाँधीगिरी और व्हाट्सअप, फेसबुक पर हल्ला केला स कुछ नइ हैत, दहेज प्रथा पर जे कानून बनल य ओ कारगर तरीका स लागू होइ, ओइ लेल सरकार पर दबाव बनाउ और विवाह मे लेन-देन के स्टिंग अपरेशन चलबा के चाही। और ओकर खिलाफ कारवाई होइ के चाही।
मदन कुमार ठाकुरः बियाह मे जतेक खर्च हेतय ओहि के ५०-५० दुनु पक्ष करैथ। प्रेम बियाह उचित नइ कारण एहि मे कोनो भी जाइत सँ प्रेम भऽ जाएत छैक, जे अपन समाज उचित नहि मानैत अछि, दहेज खतम करैक लेल दुनु पक्ष बराबर के हिस्सा खर्च करैथ से उचित।
सगुन मैथिलः बहुत निक मुद्दा प्रकाश बाबू । मुद्दा जा ता धैर ख़त्म नै हैत जा धैर युवा सब बैढ-चैढ क विरोध या सहभागिता नै लेता।
रोहित यादवः की उचित वा की नै ओहि के कुनो मापदण्ड छैक त सोझा काएल जाउ। नीति, नियम ओ ढोंगक नाम पर अपना बहिन बेटी ओ भाइ बेटा के जिनगी स खेलब किनको अधिकार नै। जाहि चीज के मान्यता संविधान देलक ओहि के झुठो फुस्सो के पतिष्ठा के नाम दऽ अपना बाल-बच्चा के जिनगीक ख़ुशी केर आहुति देबाक हक किनको नै। बात हमरा घरक हो वा किनको दोसर। आब समय आबि गेलैक जे एकटा मापदण्ड तय होउ।
अनिल मिश्रः प्रेम विवाह उचित या अनुचित ई दोसर विषय भेल, कियाकि बहुतो प्रेम विवाह मे बाद मे दहेजक बात अबैत अछि। रोहित यादव जी माफी माँगैत कहय चाहब जे संविधान त तलाक के सेहो मान्यता देलक, शराब पिबैय के सेहो मान्यता देने अछि, त कि ओ उचित? और कि प्रेम विवाह में दहेज क बात नहिं आबैत अछि?
प्रवीण नारायण चौधरीः अहाँक निरन्तर सक्रियता सँ उत्साह बढैत अछि, संगहि ओहि लोक केँ सेहो जबाब भेटैत अछि जे मैथिली पर कोनो उच्चवर्गीय जातिक एकाधिकार मानि बैसैत छथि। अहाँक लेखनी, विचार शैली आ निरंतर चिन्तनशील होयबाक चर्जा हमरा खासकय खूब नीक लागि रहल अछि।

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जनजागरण भए रहल अछि, इ महामारीक पतन तय अछि।