यात्री-नागार्जुनक समाधिस्थल पर काव्य-पाठ सँ प्रेरणा

विशेष सम्पादकीय
 
yatri samadhi1मधुबनी मे मिथिलाक अति प्राचीन साहित्यिक सृजनशीलताक प्रखर रूप वर्तमान समय मे खूबे देखबा मे आबि रहल अछि। अजित आजाद समान युवा साहित्यकारyatri samadhi2 आ संचारकर्मक माँजल पत्रकार जँ अपन जीवन केँ साहित्यक कार्य मे सौंपि दैथ तऽ एहेन क्रान्ति होयब स्वाभाविके अछि। लेकिन अगुआयल पथ-प्रदर्शक केर संग जँ साहित्यशिल्पी स्रष्टा लोकनिक भरपूर संग जाबत नहि भेटत ताबत क्रान्ति तऽ दूर एकटा साधारण परिवर्तनो देखायब मोसकिल होयत। वर्तमान मिथिलाक विभिन्न जिला केँ मधुबनीक ई सक्रिय सर्जक लोकनि बहुत पाछू छोड़ैत हरेक दिन – हर घड़ी मैथिली भाषा-साहित्यक संस्कार केँ अलग-अलग रूप मे आगू बढाबय लागल छथि।
 
आइ अपन फेसबुक सँ अजित आजाद स्टेटस अपडेट करैत जानकारी करौलनि जे “आइ भोरे-भोर हमरा लोकनि यात्री जी (बैद्यनाथ मिश्र यात्री) क गाम तरौनी मे बाबाक समाधि (सारा) पर आबि हुनका काव्य पुष्प अर्पित कैल। संग मे तारानन्द वियोगी जी, ऋषि वशिष्ठ जी, आनंद मोहन झा जी आ दीप नारायण विद्यार्थी जी आदि रहथि।”
 
yatri samadhi3अपन एहि तरहक निरंतर अपडेट्स सँ मैथिली भाषा-साहित्यक गतिविधि सब सँ सदैव सुजान रखनिहार अजित आजाद द्वारा एहि अपडेट सँ एकटा नव उर्जाक संचार भेल। मैथिली जिन्दाबाद हुनकर जानकारी केर प्रशंसा करैत गोटेक रास जिज्ञासा हुनका सँ एना रखलक, “बहुत नीक – गामक लोक सब सेहो भाग लेलाह कि भाइजी? समाधि-स्थल पर मात्र घास-फूस टा अछि आ कि किछु कीर्ति आदि सेहो कैल गेल अछि? बाबाक वर्तमान परिवारक अवस्था पर सेहो किछु जानकारी दितहुँ। प्रतीक्षारत – मैथिली जिन्दाबाद लेल प्रवीण।”
 
yatri samadhi4
गाम मे यात्रीक नाम पर बनल पुस्तकालय मे हुनक प्रतिमाः सब कहानी एखनहु अपन कविता शैली कहि रहला अछि स्वयं यात्री

उपरोक्त जिज्ञासाक समुचित समाधान करैत अजित आजाद कहलैन जे ग्रामीण केँ बिना कोनो जानकारी देने मात्र साहित्य सर्जक लोकनिक संग बाबाक समाधिस्थल पर ओ सब गेलाह। बाद मे ग्रामीण लोकनि उत्सुकतावश एकर संज्ञान लेलनि। परञ्च बाबाक समाधिस्थल (गामक श्मसानघाट) पर काव्य-पुष्प अर्पण करबाक योजनानुसार मात्र कवि लोकटि टा पहुँचिकय नितान्त आध्यात्मिक कार्यक्रम कएलनि।

 
yatri samadhi5समाधि स्थल एवम् ओतय कोनो कीर्ति कैल गेल अछि वा नहि, एकर जबाब मे श्री आजाद कहलैन जे, “वैह माटिक ढिमका, जेकरा मिथिला मे सारा कहल जाएछ, मात्र वैह अछि बाबाक समाधि-स्थल पर। कोनो विशेष चिन्हो तक नहि अछि। मात्र अनुमान टा आधार! बाबाक अपनो इच्छा एहने छलनि। ओ आम लोक जेकाँ जीवन आ मृत्यु चाहैत छलाह। प्रायः समाधियो ताहि कारण नहि बनल हैत।”
 
yatri samadhi6तऽ कि ग्रामीण लोकनि अपन गामक एहि शान व पहिचान केँ विश्व भरि मे परिचित रखबाक लेल बाबाक वैह इच्छा अनुरूप ऐगला पीढीक संग अन्याय करता? समाधि-स्थल पर अहिना घास-फूस आ बेतरतीब ढंगक अनुमान मात्र जियैत रहत? ग्रामीण सबहक कोनो खास रुचियो छन्हि वा नहि? किछु एहने हाल वाचस्पति मिश्र केर डीहक भेल छल। मिथिलाक प्रखर उचितवक्ता किछु एहि तरहें बात-फटकार सँ ठाढीवासी केँ प्रेरणा देलनि आर निरंतर चारि वर्ष सँ स्मारक – स्मृति भवन आदिक निर्माण कार्य पूरा करैत हालहि ओकर उद्घाटन दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालयक कुलपति महोदयक हाथ सँ पूरा भेल जाहि मे स्वयं सुरेश्वर बाबु सेहो पहुँचल छलाह।
yatri samadhi7शायद अपन जीवनक अन्तिम सार्वजनिक सभा सेहो ठाढियेक ओ सभा भेल सुरेश्वर बाबुक, मुदा ताहू मे ओ मिथिलावाद केर चर्चा मे अपन विभूतिक स्मृति चिह्न प्रति अपनहि लोकक उदासीनताक प्रखर आलोचना कएने छलाह। ओ वाचस्पति द्वितीय एवं तृतीय केर गाम मे सेहो स्मारक स्थल निर्माण करेबाक आ से जँ बाँचल रहि गेलहुँ तऽ देखबाक संदेश वर्तमान पीढी केँ देने छलाह। आइ हुनकर ओ आलोचना खूब मोन पड़ि रहल अछि। यात्री आ नागार्जुन सँ जगविदित कवि केर सुन्दर पढल-लिखल सुसंस्कृत गाम तरौनी केर ई हाल, कतहु सँ प्रशंसाक योग्य नहि कहल जा सकैत अछि। एतय भव्य स्मारक बनब जरुरी अछि। राज्य केर सहयोग नहियो भेटय तऽ स्वयंसेवा सँ ई स्थल केँ विशेष संरक्षण भेटब जरुरी अछि।
 
yatri samadhi8हमर आगूक जिज्ञासा श्री आजाद समान प्रखर अभियानी सँ छल, “आर अपने सब केना ई योजना बनेलहुँ…. एहि सँ कि सब उपलब्धि भेटल ताहि पर अपन प्रतिक्रिया देल जाउ। स्थानीय लोक केर सहभागिता लेल कोनो प्रयास भेल आ कि नहि?? ओ सब कि कहलैन?
 
अजित भाइ जबाब देलनि जे “हम, तारानन्द वियोगी, ऋषि वशिस्ठ, दीप नारायण विद्यार्थी आ आनंद मोहन झा रही। अद्भुत अनुभूति भेल। मौन धारण कैल हमरा लोकनि। कविता पाठ भेल। किछु संकल्प लेल। रात्रि में योजना बनल। भोरे 6 बजे विदा भेलहुँ। रात्रि विश्राम हमरे आवास पर छल। 7 बजे पहुँचलहुँ। 10 बजे फिरता। अगिला यात्रा बिस्फी, विद्यापतिक डीह।”
 
yatri samadhi9एहि तरहक कार्यक्रमक योजनाक मुख्य उद्देश्य साहित्यिक पर्यटन केँ बढ़ावा देबाक आर अपन महान विभूति लोकनिक समाधि किंवा स्मृति-शेष प्रति वर्तमान समाजक अवस्था देखबाक बात रहल, ओ कहलैन। पूर्वजक प्रति सम्मान व्यक्त करब आ हुनक महत्ता केँ नव लोकक बीच ल जायब – ई हमरा लोकनिक कर्तब्य छी, ताहि मुताबिक हमहुँ सब अभियान संचालित कय रहल छी। अजित भाइ जानकारी करौलनि।
yatri samadhi10अपन यात्रा संस्मरण केँ कैमराक लेन्स मार्फत जेना देखलनि तेकर स्मृति प्रतीक फोटो सब सेहो पठौने छथि। ई सब देखला सँ आँखि सँ नोर बहैत अछि आर अपन वर्तमान समाजक संवेदनशून्यता पर दुःख भऽ रहल अछि। आशा अछि जे एहि मे आवश्यक सुधार आओत। हम सब एहेन महान् विभूति लोकनिक समाधि हुनक मूलग्राम मे ठोस आ दीर्घकाल लेल स्मरणीय जरुर बनाबी। ओना एकटा आरो संयोग नीक बुझायल जे मैथिलीक सेवा मे निरंतर योगदान देनिहार कवि-लेखक आ विचारक डा. तारानन्द वियोगी हालहि बिहार सरकार केर सचिवालय मे उच्चाधिकारीक पद पर प्रोन्नति पेलनि अछि आर ओहो एहि यात्रा मे संग छलाह। यात्रीक सामीप्यता ग्रहण कएनिहार श्री वियोगी निश्चित एहि वियोग केँ बुझताह आ बिहार सरकारक ध्यानाकर्षण सेहो उचित प्रतिनिधित्वक संग कय सकताह। हम सब नीक आशा आ अपेक्षा राखि रहल छी। बाकी समय मालिक!