बिहारः मदिरापान पर प्रतिबन्ध खुशहाल प्रदेश लेल नितान्त आवश्यक

विचार आलेख

– राम बाबु सिंह, मधेपुर, मधुबनी

मदिरा स मुक्ति सुखी जीवन के लेल आवश्यक

भगवान बुद्ध केर कथन अछि कि जाहि राज्य में  मदिराक सेवन आदर हएत ओतय महाकाल केर अभिशाप सँ नाश होएत चलि जायत। अकाल पड़ि सकैछ, औषधि सब काज केनाइ बन्द कय दैछ आ चारु कात सँ बिपत्ति घेर सकैछ। बिहार में आब बहार केर शुरुआत होयत से कहि सकैत छी।

nitish no drinkई वास्तव में सबसँ पैघ काज कएलाह मुख्यमंत्री नीतीश जी जाहि लेल राज्यक जनता सब हिनका कोटि कोटि धन्यवाद दय रहल अछि। मद्यपान पर पूर्ण प्रतिबन्ध बिहारक लेल अपार हर्षक विषय अछि।

एखन टटका टटकी बात छैक हमरहि गामक हे अहाँ सब संग साझा करबाक मोन भेल अछि। छैठ पूजा में गाम में रही। साँझ में अद्भुद दृश्य देखलहुँ। ग्रामीण महिला लगभग 300 केर संख्या में हाथ में बारहनि सोटा छीटा सटका लेने दौड़ल जाय आ संगहि जोर-जोर सऽ नारा सेहो लगबैत छल शराबक दोकान केर खिलाफ। हउ बाबू! कनिये काल बाद समाचार भेटल कि महिला सब दोकान केँ तोड़ि फोड़ि कय सबटा शराबक बोतल नाश कय देलकैक।

मदिरा पर प्रतिबन्ध गाम-घरक हिंसा सँ मुक्ति

फेर पुलिस पंचायत सब आयल। मुदा ग्रामीण सब सेहो महिला संग कदम ताल करय लगलाह। कारण आर कोनो उपाय नहि छल। हिनकर सभक आत्मविश्वास आ साहस देखि मोन में नव तरंग जेकाँ दौड़ि गेल। कारण पहिल बेर गाम में एहन असाधारण घटना देखबाक अवसर भेटल।

बीच गामहि में शराब पीबाक प्रथा अदौकाल सँ चलि रहल खराब परम्परा केर नाश भेल। गामक लोक सेहो खूब खुशी छथि। कारण पहिने साँझ होयत गाम में कोनो ने कोनो कात ब्यर्थ में झगड़ा झाँटी होएत छल। संगहि गाम में 30 स 35 साल केर छोटे उमेर केर लोक एहि शराब केर लतक कारण कालक ग्रास बनि चुकल अछि।

बिहार सरकार केर एहि कदम सँ राज्य में पैघ बदलाव आबि सकैत अछि। जेना घरेलू हिंसा, पति-पत्नी वा परिवार मे कलह, तरह-तरह केर बीमारी आदि सँ मुक्ति तऽ भेटबे करत, संगहि पारिवारिक सौहार्द्रता आ आर्थिक स्थिति मे सेहो गाम-घर तथा जनमानस मजबूत बनत।

आखिर शराब की छै आर कोण प्रकारे मनुखक जीवन केँ प्रभावित करैत छैक

मदिरा चाहे देशी हुए आ चाहे बिलायती, जाहि वस्तु सँ मादकता केर प्रभाव होएत अछि ओकर नाम “इथाइल अल्कोहल” आ आम भाषा में एकरा “अल्कोहल” कहैत छैक। गुणबत्ताक हिसाब सँ मदिरा में 1% सऽ लय केँ 59% धरि एहि अल्कोहल केर मिश्रण शराब मे रहैत छैक। मादकता बढ़ेबा में यैह अल्कोहल प्रमुख कारक तत्त्व थीक। शराबक सेवन कएनिहार मनुख मादकता मे अपना स्वयं पर सँ नियंत्रण हेरा लैत अछि, संगहि स्वास्थ्य पर सेहो बड़ पैघ क्षति पहुँचबैत रहैत अछि।

मदिरा सेवन केर तुरन्त आहार नली सोइखि लैत छैक आ फेर रक्त में मिल जाएत छैक। ओना शरीर में प्राकृतिक रूप सँ सेहो लगभग 4% अल्कोहल केर मात्रा अपनहि विद्यमान रहैत अछि जे कोशिका केर माध्यम सँ शक्ति में परिवर्तित करैत अछि आ यैह शक्ति प्रतिदिनक शारीरिक क्रियाकलाप में काज सेहो अबैत अछि। परञ्च एकर बाहरी डोज शरीर लेल अपकार बेसी करैत अछि, उपकार केर चर्चो करब बेकार अछि।

मदिरा सेवन पारिवारिक कलह केर प्रमुख कारण

मुदा जे बेसी मात्रा में आर निरन्तर पिबैत अछि तेकर शरीरक कोशिका केँ ओहि अल्कोहल केँ शक्ति में परिवर्तित करबाक लेल बेसी काज आ मेहनत करय पड़ैत छैक, जाहि मे समय सेहो बेसी लगैत छैक आर धीरे-धीरे यैह कारण शरीर क्षीण आ दुर्बल होएत कतेको प्रकारक बीमारीक घर बनि जाएत छैक। छोट छीन रोग सँ लड़बाक क्षमता सेहो शरीर केँ नै रहि जाएत छैक।

मदिरा सेवन सँ शरीर में स्फूर्ति भेटबाक समझ जे कियो बुझैत अछि तेकरा मानसिक रोगी कहि सकैत छी। एकर सेवन सँ मस्तिष्क शिथिलता केँ प्राप्त होएत छैक, चालि मे लड़खड़ाएत चलबाक आदि, लड़बड़ाएत बोली व आवाज, आ यदा-कदा बेहोशी धरि भऽ जाएत छैक, कतेको बेर साँस सेहो रुकय लगैत छैक आ मरणासन्न स्थित भऽ जाएत छैक।

मदिरा शरीर केर लेल जहर

मदिरा सेवन सँ शरीर में लाभ कनेको नै मुदा हानि होयब सुनिश्चित छैक। पिला सँ थकान दूर हएत आ स्फूर्ति आओत से स्पष्तः झूठ बुझाइ थीक। देखा-देखी पहिने सौख सँ लोक शुरू करैत अछि, वैह बाद में हिस्सख लागि गेला पर लोक केँ सेवन करब बाध्यता भऽ जाएत छैक।

ताहि हेतु कोनो परिस्थिति में मदिरा केँ छुबाक नै चाही। एकर सबसँ पहिने परिवार पर आ फेर समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ैत छैक। आर्थिक रूप सँ लोक केँ भिखारी बना दैत अछि ई पीनाय! लोक एकर अधीन में आबि चोरी चपाटी करबा में सेहो लज्जा नै बुझैत छैक। एकटा भयंकर मानसिक रोग जेकाँ बूझि एहि दुर्व्यसन सँ दूर रहि स्वस्थ जीवन जीबाक प्रयास करबाक चाही।

गांधी जी कहलाह कि जँ हम एको घन्टा वास्ते सर्वशक्तिमान शासक बनि जायब तऽ सबसँ पहिने मदिरालय पर ताला जरि देब।

सत्यानाशी मदिरा स आत्मरक्षा

मदिरा मनुखक शरीर केँ तिल-तिल गला दैत अछि। शारीर आ मष्तिष्क केर बर्बादी, धन केर अन्धाधुन्ध तबाही और दूरगामी सामाजिक दुष्परिणाम दैत अछि जाहि सँ सब प्रकारे विनाशे होयत अछि। अर्थात् समझदारी अहि में अछि कि एहि सर्वभक्षी असुर सँ अपन समय केँ ख़राब होमय सँ बचेबा में किछ ठोस कारगर प्रयास कयल जाए।