एक वंश के छी सब मैथिल – सबकेँ सब सम्मान करीः डा. चन्द्रमणि

सबकें सब सम्मान करी

– डॉ.चंद्रमणि झा, दरभंगा, मो.नं.9430827795

chandramani1सीताके नइहर मिथिला मे जनम भेल अभिमान करी

एक वंश केँ छी सब मैथिल सबकेँ सब सम्मान करी॥

सीताके नइहर………………………..

सूर्यवंश इक्क्ष्वाकु पुत्र निमि गुरु सँ शापित भेला विदेह

अरणी-मंथन-कृत मिथि बनिकs परम प्रतापी नृपति सदेह

वेद व्यास मिथि-मिथिला के गुण गओलनि ग्रीव उतान करी

एक वंश केँ छी सब मैथिल सबकेँ सब सम्मान करी॥

सीताके नइहर…………………………

पिताक तन सं जनन भेल तेँ मिथि वंशज जनकहि भेला

जनक एकैसम महा सिरध्वज हsर जोति महि तृप्त केला

लक्ष्मी सीता बनि अवतरली ताहि भूमि गुणगान करी

एक वंश केँ छी सब मैथिल सबकेँ सब सम्मान करी॥

सीताके नइहर……………………..

ब्रह्मज्ञान के पाठ पढ़ओलनि याज्ञवल्क्य मिथिलेश केँ

शुक्ल यजुर्वेद बृहदारण्यक जे देलनि निज देश केँ

मैत्रेयी गार्गी सन विदुषी मिथिलानी संज्ञान करी

एक वंश केँ छी सब मैथिल सबकेँ सब सम्मान करी॥

सीता के नइहर…………………………

परशुराम के देल शिवक धनु जनकक गृह मे रहल जोगाय

नृपतिक प्रण तेहि सिया बियाहब जे एहि धनु केँ देत चढ़ाय

भूप सहस दस हित भारी सिय नित्य उठाबथि ध्यान करी

एक वंश केँ छी सब मैथिल सबकेँ सब सम्मान करी॥

सीता के नइहर…………………………..

मिथिलापुत्री हेतु स्वयंवर रचल जनकपुर धाम मे

दुलकल दशरथनंदन अयला भाव कोन छल राम मे

धनुष तोड़ि लक्ष्मीपति सीता पति बनला पहिचान करी

एक वंश केँ छी सब मैथिल सबकेँ सब सम्मान करी॥

सीताके नइहर………………………….

क्षत्रिय कुल-तारणि परिणय मे पंडित-पुरहित वेद उचार

वैश्य देल वस्त्राभूषण आ महफा शूद्रक कान्ह कहार

एहन समन्वय बनल रहय तs निज मुख कियै मलान करी

एक वंश केँ छी सब मैथिल सबकेँ सब सम्मान करी॥

सीताके नइहर मिथिला मे…………………….

ब्रह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र सब मैथिल सबहक सीतादाइ

बनल रही अपना कर्मक पथ एक रही सब बहिनी-भाइ

अपन अस्मिता मिथिला के हित ‘चंद्रमणि’क पद कान धरी

एक वंश केँ छी सब मैथिल सबकेँ सब सम्मान करी॥

सीताके नइहर मिथिला मे……………………….