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रजनी-सजनीक भाषा सँ रोजी-रोटीक भाषा धरि मैथिली

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maithili professorsहालहि मैथिली भाषा मे असिस्टैन्ट प्रोफेसर्स केर नियुक्तिक समाचार प्रकाश मे आयल। ४९ जना केँ विभिन्न विश्वविद्यालय अन्तर्गत रिक्त पद पर नियुक्ति हेतु सफल घोषित कैल गेल अछि। एहि समाचारक लगत्ते फेर दोसर समाचार भेटल जे उपरोक्त नियुक्ति भेलाक बादो एखन रिक्त पद केँ पूर्ति लेल आरो उम्मीदवार चाही। कहबाक तात्पर्य ई भेल जे मैथिली भाषा मे सहायक प्राध्यापक पद पर नियुक्तिक प्रक्रिया आरो बाकी अछि।

एक दिशि मैथिली भाषा सँ दूरी बनि रहल छल, दोसर दिशि ई आरोप लागि रहल छल जे आब तऽ मैथिली पढनिहार छात्रो नहि भेटैत अछि तऽ फेर सरकार कियैक एहि विषय केँ पढेबाक लेल कोनो नव नियुक्ति करय। मैथिली केवल गीत-नादक भाषा यानि रजनी-सजनीक भाषा बनिकय रहि गेल अछि – आलोचना कएनिहार ई कहैत थकैत नहि छलाह। किछु एहनो विज्ञ सज्जन भेटलाह जे कहलनि कि मैथिली सँ पढिकय समाज मे हंसारत भऽ गेल, नौकरी नहि भेटल तखन गाम सँ भागिकय प्राइवेट नौकरी करैत कोनाहू परिवारक गुजर चला रहल छी। एहेन सन बिपरीत समय मे मैथिली प्रोफेसर्स केर नियुक्ति एकटा नव किरण केर दर्शन करा रहल अछि।

याद कय रहल छी इग्नू केर क्षेत्रीय निदेशक – सहरसाक शंभूशरण बाबुक ओ बात जाहि मे ओ कहने छलाह कि मैथिली मे छात्र सब अध्ययन करय ताहि लेल एकटा स्पेशल डेस्क लगबेने रही, छात्र-छात्रा सबकेँ ओपन काउन्सिलिंग केने रही…. बुझेने रही जे मैथिली भाषा मे उच्च अध्ययनक कि लाभ छैक। तथापि विद्यार्थी सब हँसिकय टारि दैत छल। वर्तमान युग मे सब केँ अर्थ सँ सरोकार छैक। वैह टा विषय पढत जाहि मे तुरन्त कोनो कैरियर बनबाक स्थिति बनतैक। निश्चिते ई सत्य छैक। समाज मे पाइये टा सँ प्रतिष्ठा छैक, बाकी बात बाद मे गानल जाएत छैक। नैतिक स्तर केर पहिल पहिचान पैसा कमेनाय होइत अछि वर्तमान युग मे, तैँ एकरा अर्थ युग सेहो कहल जाएत छैक। तऽ मैथिलीक नीक दिन एक बेर फेर आबि रहल अछि से मानि सकैत छी। मैथिली रोजी-रोटीक भाषा बनि गेल अछि से कहि सकैत छी। आब एहि भाषा मे सब जाति ओ वर्ग केँ आगू बढबाक अवसर भेटत आर खराब राजनीति सेहो रुकत।

जाहि स्तर पर मैथिलीभाषी मे जागृतिक प्रसार आबि गेल अछि निश्चित ओहि बातक असैर चौतर्फा होमय लागल अछि। मैथिल केर अतिसहिष्णुता सँ बहरिया केँ बाँटू आ शासन करू नीति अपनेबाक मौका भेटि जाएत अछि। लेकिन विगत किछु वर्ष मे युवा मैथिल सब देशक राजधानी व लगभग हर क्षेत्र मे अपन स्वयंसेवा व स्वसंरक्षण सँ ई प्रमाणित कय रहला अछि जे अतिराजनीति सँ ई सब चिन्तित नहि छथि, बल्कि हर खराब परिस्थिति सँ अपने लड़ैत बढि सकैत छथि। क्रमशः मैथिल जाहि कोनो भाग मे प्रवास पर रहैत छथि, ओहि ठामक राजनीति मे सेहो अपन पहुँच व पहिचान भाषाक आधार पर आर समुदाय सँ अलग व नीक बना लैत छथि। आइ हिनका लोकनिक सम्मान देशहि टा नहि विदेशो मे ओतबे अछि। शिक्षा व संस्कार मे आर कोनो वर्ग सँ बहुत आगू मैथिलीभाषी अहिना अपन स्वराज्य केर प्राप्ति करता ताहि मे कोनो दुइ मत नहि।

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