अमित आनन्द, सहरसा। अगस्त १८, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!!
सहरसा केर जनसभा केँ संबोधित करैत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपन दल भारतीय जनता पार्टीक चर्चा बैढ-चैढकय केलनि। ओ कहला जे भाजपा बिहार मे विकास केर नव इतिहास रचत। नवयुवक केँ रोजगार, कृषक केँ सुरक्षा आर कल्याणकारी योजनाक व्यापक इंतजाम, सुलभ आ सुगम यातायात, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा आदि समस्त क्षेत्र मे आम जनमानसक इच्छानुरूप विकास कैल जायत। विकास लेल अपन पुरने सूत्र केँ कारगर मानि ओ दोहरेला जे सबहक संग, सबहक विकास केर नीति पर भाजपा कार्य करत।
केन्द्र मे जेहेन मजबूत सरकार भारत केँ विकास मार्ग पर अग्रसर कएने अछि, किछु ताहि तरहक आवश्यकता बिहार लेल सेहो अछि, प्रधानमंत्री जनमानस केँ स्पष्ट केलनि। परिवर्तन सदिखन युवा पीढी द्वारा भेल अछि, बिहार मे परिवर्तन लेल युवा केँ आगाँ अयबाक अपील कैल गेल।
अपन विरोधी दल पर चुटकी लैत प्रधानमंत्री जनता सँ सवाल पूछि देला जे ‘बिहार कोना आगू बढत? कि अहाँ सबकेँ जंगलराज चाही?’ लालू आ नितीशक नाम लेने बिना ओ दोहरेला जे ‘बिजली नहीं तो वोट नहीं’ कहयवला नेता आब कोन मुँह सँ जनता सँ वोट माँगत आ कि जबाब देत ओ नेता जनता केँ।
पीएम मोदीक पैकेज केर घोषणाक इन्तजार सेहो खत्म भऽ चुकल अछि, आइ एक लाख पेंसठ हजार करोड़ रुपयाक अनुदान राशि बिहारक विकास लेल देबाक घोषणा कए देलनि मोदी। ओ कहलनि जे “बिहारक भाग्य बदलब, नव बिहार बनायब। बिहारक जनता एनडीए केँ जितेबाक निर्णय कए लेने अछि। तैँ बिहार मे एकटा मजबूत सरकार चुनिकय हमरा सहयोग करू।”
प्रधानमंत्री मोदी केँ देखबाक आ सुनबाक लेल लाखों लोकक भीड़ उमैड़ पड़ल छल। मोदीजी मैथिली मे अपन उद्घोषण संबोधन शुरु करैत अपना केँ मिथिलाक धरती पर आबि गद्गद् होयबाक बात कहैत सबकेँ प्रणाम करैत अपन बात आगू कहब शुरु कएने छलाह। प्रतिकूल मौसम आ जोरदार बरखा भेलाक कारण भिजलो-तितलो लोक मोदीजी केँ सुनबाक लेल घंटों धरि जोश आ उत्साह सँ ‘मोदी-मोदी’ केर नारा लगबैत ध्यानपूर्वक मोदीक बात सुनलक। मोदी द्वारा विपक्ष पर चुटकी आ आक्रमण भरल शब्द पर जोश बीच-बीच मे आरो ऊफान लैत रहल। मोदी कुसहा मे २००८ केर कोसी जलप्रलय केर समय देल गेल ५ करोड़ केर सहायताक स्मरण सेहो करेलनि। वर्तमान सरकारक समय मे बढि रहल आपराधिक घटना केँ जंगलराज केर संज्ञा दैत जनता सँ परिवर्तन करबाक अपील करैत मोदी अपन संबोधन केँ विराम देलनि।

2 Comments
प्रधानमंत्री मोदी बिहारमे आयल छलथि मिथिलामे नहि। तञ मिथिलावासीकें बेसी खुस नहि होमक चाही। की हमसब मैथिलीमे मात्र दू लानि सुनि कय संतोष कय लेब? ऐ स’ बढिया होइत जे मोदी भोजपुरिएमे मुजफ्फरपुर जकां बजतथि मुदा मिथिला राज्यक घोषणा करतथि अथवा नहि किछु त’ कम स’ कम सहरसामे AIIMS के घोषणा करतथि त’ ओ बड़्का काज होति। बिहारके देल गेल १.६५ लाख करोड़ स’ मिथिलाक नहि वास्तविक बिहारक जे मिथिला छोडि कय अछिमे खर्च होयत आ लोकके एकर लाभ भेटत।
मोदी एकटा ठक छथि आ मिथिलाके ठकबाक हेतु आयल छलथि। राजनीतिक लोक सब सदा स’ मिथिलाक लोकके बुडि बनबैत रहल अछि आ फेर ई मोदी मिथिलाक लोकके उल्लू बना गेलथि। आ हमम्मर पतचट्टा-लभरचट्टा जनप्रतिनिधिसब चप्पल पोछयमे लागल रहत। धिक्कार अछि एहन पतचट्टा-लभरचट्टा जनप्रतिनिधिसब पर।
शब्द-विन्यास सहित एकटा लेखे लिखू – ओकरो मैथिली जिन्दाबाद पर चढा देल जायत। लेकिन मिथिलावादी मे ई नकारात्मक शब्द कियैक एतेक जल्दी अबैत अछि जे एतेक रास ‘पतचट्टा, लभरचट्टा… कि कहाँदैन…’ ई सब कि?