आजुक चतुर्दशी व्रत केला सौं महादेव सिद्धि प्रदान करय छथिन

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लेख

प्रेषित : कीर्ति नारायण झा

शास्त्र केर अनुसार नरक निवारण चतुर्दशी के दिन भगवान शिव आ माता पार्वती के बिवाह तय भेल छलैन्ह तें शिव शक्ति के मिलन के शुभारम्भ के दिन आजुक दिन के मानल जाइत छैक। भगवान भोलेनाथ एहि दिन अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में रहैत छैथि आ भक्त द्वारा विधि पूर्वक आ स्नेह सँ पूजा अर्चना कयला पर ओ बहुत प्रसन्न भऽ आशीर्वाद दैत छैथि। मान्यतानुसार आजुक दिन शिव आराधना कयला सँ भक्त के अनेकानेक सिद्धि केर प्राप्ति होइत छैन्ह आ स्वर्ग आ नर्क के फेर सँ निवारण अर्थात मुक्ति भेटि जाइत छैन्ह। पौराणिक कथा के अनुसार हिमालय अपन पुत्री पार्वती के बिवाहक प्रस्ताव भगवान शिव लग पठाओनै छलखिन्ह आ ओकर बाद फागुन कृष्ण चतुर्दशी अर्थात महाशिवरात्रि चतुर्दशी के दिन दुनू के बियाह भेल छलैन्ह। एहि अवसर पर विभिन्न मन्दिर में भक्त केर भीड़ उमड़ि पड़ैत छैक। पवित्र गंगा स्नान के सेहो प्रावधान छैक नहिं तऽ आन पवित्र नदी में स्नान कऽ कऽ बाबा भोलेनाथ के पूजन अर्चन के आजुक दिन समर्पित अछि। दिन में निराहार आ सांझ मे ब्रत खोलल जाइत छैक। सर्वविदित अछि जे सभ भगवान में सभ सँ बेसी सरलतापूर्वक आशीर्वाद अढरन ढरन बाबा भोलेनाथ सँ प्राप्त कयल जा सकैत अछि। ओ बहुत जल्दी अपन भक्त पर ढरि जाइत छैथि। हमरा सभ के मोन अछि जे एहि दिन हमरा लोकनि गामक भुवनेश्वर स्थान में भोरे भोर स्नान ध्यान कऽ कऽ एक लोटा जल आ पाँच टा बेएर बाबा के शिवलिंग पर चढबैत छलहुँ। अत्यन्त भीड़ रहवाक कारणे दर्शन करवा में एक डेढ घंटा लागि जाइत छल मुदा ओहि मे पाछू नहिं हँटैत छलहुँ कारण मन्दिर के वातावरण शिवमय रहैत छलैक। बोल बम आ ॐ नमः शिवाय के नारा सँ मन्दिर के प्रांगण गुंजायमान रहैत छलैक। हमरा गाम सँ बहुत गोटे एहि दिन देवघर में बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक करैत छलाह। पूरा गाम आ अगल बगल बाबा भुवनेश्वर नाथ केर जयकारा सँ पवित्र वातावरण में परिवर्तित भऽ जाइत छलैक आ सभ आस्था में परिणत भऽ जाइत छलैक। आब वातावरण में बहुत परिवर्तन भऽ गेलैक अछि आ बहुत गोटे तऽ पावनि तिहार के विसरि गेल छैथि। धिया पूता के नरक निवारण चतुर्दशी के विषय में बूझल सेहो नहिं छैन्ह कारण ओ सभ कहियो अपन माय बापक मुँह सँ एहि विषय में सुनबे नहिं कयलन्हि अछि। माय बाप सेहो एकर सभक चर्चा उचित नहिं बुझैत छैथि कारण ओ अपन धिया पूता के आस्थावान मनुष्य नहिं बना कऽ पाई कमाय बला डाक्टर इंजिनीयर बनेनाइ बेसी आवश्यक बुझैत छैथि आ येएह सभ कारण अछि जे मनुखक जीवन सँ आस्थाक संचार आस्ते आस्ते कम भेल जा रहल छैक जे भविष्य के लेल नीक संकेत नहिं अछि। आस्थावान ब्यक्ति तुलनात्मक रूप सँ बेसी सरल आ संतोषी होइत छैथि जाहि सँ हुनक जीवन के गाड़ी निर्वाध रूप सँ चलैत रहैत छैन्ह ।