धातृ कें औषधि सेहो कहल गेल अछि

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लेखनीकेँ धार – लेख

प्रेषित : आभा झा

” प्रकृतिक अनमोल उपहार धातृ ( आंवला )

प्रकृतिक संग मानवक जुड़ाव जन्मजात छैक, ओ कोनो ने कोनो रूपमे प्रकृतिक संग जुड़ल रहैत अछि। सनातन धर्म प्रकृतिक अनुरूप आचरण केनाइ एवं जीनाइ सिखबैत अछि। हमर सभक पाबनि-तिहार सेहो प्रकृति संग जुड़ल अछि। त्योहार एवं धार्मिक कर्मकांडमे वृक्षकेँ अत्यधिक महत्व देल गेल अछि। प्रतिवर्ष कार्तिक मासक शुक्ल पक्षक नवमी तिथि कऽ आंवला नवमी, आरोग्य नवमी, अक्षय नवमी, कुष्मांड नवमीकेँ त्योहार मनाओल जाइत छैक। एहि त्योहारकेँ मनेबाक पाछू आरोग्य मुख्य कारण छैक।
धातृ आयुर्वेद यूनानी आ डाक्टरी मतसँ बहुत ही स्वास्थ्यवर्धक आ रोगनाशक फल साबित भेल छैक। एहिमे आयुष्य वर्धक विटामिन, तथा विष नाशक, रक्तशोधक, बुद्धिवर्धक, बलकारक, अग्नि दीपक तत्व एतेक बेसी अछि कि धातृक सेवन करी कऽ मनुष्य बहुत लाभ उठा सकैत अछि। धातृकेँ वैज्ञानिक नाम फाईलेंथस एम्बिलका छैक तथा ई करौंदा प्रजातिक वृक्ष छैक। ‘ धातृ’ जकरा अंग्रेजीमे ‘ गूसबेरी ‘ केँ नामसँ जानल जाइत छैक। धातृकेँ अमर फल कहल गेल छैक। धातृ सिर्फ एक फल टा नहिं अछि ई जीवन शक्ति आ कल्याणक प्रतीक अछि। सांस्कृतिक प्रथामे धातृक प्रति श्रद्धा, स्वास्थ्य आ दीर्घायु प्रदान करयकेँ एकर क्षमतामे गहिंर विश्वासकेँ दर्शाबैत अछि। आयुर्वेदक अनुसार, धातृ एक त्रिदोष
नाशक जड़ी-बूटी छैक। त्रिदोषनाशकक रूपमे वर्गीकरण तीनू दोष – वात, पित्त आ कफकेँ संतुलित करयकेँ एकर क्षमताकेँ दर्शाबैत अछि।
हिंदू धर्ममे धातृ एक धार्मिक वृक्षकेँ रूपमे पूजल जाइत अछि तथा एहेन मानल जाइत अछि कि भगवान विष्णु एहि वृक्षमे निवास करैत छथि। हिंदू धर्ममे ई मानल जाइत अछि कि धातृ अमृतक बूंदसँ बनल वृक्ष अछि। हिंदू धर्ममे आंवला एकादशी नामक एक त्योहार सेहो अबैत अछि, एहि दिन स्त्रीगण सभ एहि गाछक पूजा करैत छथि आ एहि गाछक चारूकात ओ परिक्रमा करैत छथि। एहि दिन धातृ गाछक नीचां भोजन कएलासँ भोजनमे अमृतक बूंद खसैत छैक जाहिसँ लोक रोगमुक्त आ दीर्घायु होइत छैक। धार्मिक महत्व भेलाक कारण लोकक एहि गाछक प्रति आस्था आ विश्वास बनल रहैत छैक। ” धातृकेँ गाछ सभ गाछसँ श्रेष्ठ छैक, कियैकि ई भगवान विष्णुकेँ प्रिय छैन्ह ” एकर दर्शनसँ दू गुना फल आ फल खेलासँ तीन गुना पुण्य प्राप्त होइत छैक। कार्तिक मासमे जे मनुष्य धातृक वनमे भगवान श्री हरिकेँ पूजा करैत अछि, ओकर पाप नष्ट भऽ जाइत अछि।
धातृ जेहेन उत्तम एंटी ऑक्सीडेंट फल कोनो नहिं छैक। ई हानिकारक कोलेस्ट्रॉलकेँ घटबैत अछि आ इन्सुलिन बनबैकेँ प्रक्रियामे मदद करैत अछि। ई पीलियाकेँ निषेध करैत अछि, रक्तकेँ साफ राखयमे मदद करैत अछि। एकर सेवनसँ आँखिक रोशनी बढ़ी जाइत अछि। धातृकेँ नियमित सेवन कएलासँ मानसिक शक्ति बनल रहैत छैक। धातृकेँ प्रयोग सौंदर्य प्रसाधनक रूपमे सेहो होइत छैक। मधुमेह रोगीक लेल सेहो धातृ फायदेमंद अछि। धातृकेँ गाछ व फल दुनू ही पूज्य अछि। आंवला नवमीक पाबनि पर्यावरण संरक्षणक लेल सेहो प्रेरित करैत अछि।हमसब धातृक महत्वकेँ बूझी आ ओकर संरक्षण करी।