कार्तिक शुक्ल एकादशीक देवोत्थान व्रत कएल जाइत अछि मिथिला मे

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*देवोत्थान एकादशी*
23/11/2023

। आषाढ़ शुक्ल एकादशी सँ भगवान शयन करैत छथि आ भाद्रशुक्ल एकादशी क करोट फेरैत छथि आ एहि दिन जगैत छथि ते ई तीनू एकादशी क्रमशः *हरिशयनी , पाश्वं परिवर्तिनी – कर्माधर्मा आ देवोत्थान* एकादशीक नामसँ प्रसिद्ध अछि ।
मिथिलामे प्रबोधिनी देवोत्थानक एकादशीक लोक दिनभरि उपवास रहि साँझमे फलाहार करैत छथि । कियो – कियो एक दिन पूर्व एकभुक्त कऽ दुनू साँझ उपवास रहि भिनसरमे पारणा करैत छथि जे सम्पूर्ण व्रत कहबैत अछि । ।
बीच आङनमे वा तुलसी चौड़ा लग पिठारसँ गृहस्थीक उपयोगक सभ वस्तुक अड़िपन दय सिन्दुर लगा एकटा अष्टदल अरिपन दय ओहि पर एकटा पीढ़ी राखि पीढ़ीमे सिन्दुर पिठार लगा तकरा चारू कात कुशियारसँ घरक ( मण्डपक ) निर्माण कए आहिम पूजा कए भगवानकें उठाओल जाइत अछि ।

सांझमे पूजाक सामान फूल , चानन , धूप – दीप नैवेद्य ( सामयिक वस्तु – अल्हुआ , सुथनी , सिंहार आदि ) । तिल , तुलसीक मंजरी , फूल , माला , पीढ़ीक चारू कोन पर चारि टा दीप देल जाइछ । तुलसी चौड़ा आ गोसाउनिक सिरमे दीप नश्चित जराओल जाइत अछि ।
सायं काल व्रती नित्य क्रिया निवृत भऽ शुद्धि पूर्वक आसन पर बैसि पंचदेवताक पंचोपचार पूजा कय भगवान विष्णु के षोडशोपचार पूजा कय भगवानके उठयबाक मन्त्र पढ़ैत तीन बेर उठाओल जाइत अछि ।

भगवानकें उठाबक मंत्र :-
*ॐ ब्रह्मेन्द्ररूद्रैरभिवन्द्यमानो भवानृषिर्वन्दितवन्दनीयः।*
*प्राप्ता तवेयं किल कौमुदाख्या जागृष्व – जागृष्व च लोकनाथ ॥*
*मेघा गता निर्मलपूर्णचन्द्र शारद्यपुष्पाणि मनोहराणि ।*
*अहं ददानीति च पुण्यहेतोर्जागृष्व जागृष्व च लोकनाथ ॥*
*उतिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते ।*
*त्वया चोत्थीयमानेन प्रोत्थितं भुवनत्रयम्।।*
बढ़ैत क्रम मे जेना – जतेक ऊपर पहिल बेर ओहि स बेसि दोसर बेर आ ओहु स बेसि तेसर बेर ।

रात्रि मे व्रत करएवाला फलाहार करैत छथि । प्रात : काल ब्राह्मण भोजन कराए पारणा करैत छथि ।
एहि दिन सांझ मे भगवती घर होइत छथि । जेना तीन बेर मंत्र पढ़िक भगवान के उठाओल जाइत छैन्ह, तहिना तीन बेर अहिवाती द्वारा तीन बेर आंचर स भगवतीके घर काएल जाइत छैन्ह ।
मान्यता अछि जे एहि दिन विधिपूर्वक व्रत आ पूजा केनिहार वैकुण्ठ केर अधिकारी होइत छथि।

बलराम मिश्र “मैथिल”