“मैथिलक विवाहमे पहिने विधके प्रधानता देल जाइत छल

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शीर्षक:– आ आब विध कम आडम्बर बेसी एकरा पर कोना अंकुश लगेल जाए”

खर्चीली शादियाँ आडम्बर दिखावा।
देखा-देखी आरो करब नहि रहब पाछाँ।।
भs गेल आब मैथिल समाजक ई सोच।
विधि-व्यवहार लागय आब बोझ।।

◆बियाह आब आँगनक शोभा नहि भेल आब भs गेल ई
पाँच सिताराक “डेस्टिनेशन वेडिंग” टका-टका के खेल। संस्कारक, विधि-व्यवहारक नहि रहल आब कोनो काज। आडंबर आ प्रदर्शन के तथाकथित संस्कृति में शामिल मैथिल कयलक आब। बियाह के जुलूस आ भोज के आयोजन के लेल पांच सितारा होटल के उपयोग, महग उपहार, घर पर समूह नृत्य आ अन्य सड़क, मंडप आ पंडाल के सजावट पर लाखों के खर्च, कार लैंडिंग सs पंडाल तक फूल के विस्तृत सजावट, अतिरिक्त रोशनी। भोजन में सैकड़ों तरह के भोजनक भोज, तरह-तरह के पेय पदार्थ, खाद्य व्यवस्था मे लाखों करोड़ों के बर्बादी। हमरा नहि बुझल अछि, ई सब कि भs रहल अछि, धूमधाम, प्रदर्शन आ देखाबटी के कारण सामाजिक परंपरा आ जीवन एतेक बोझिल भs रहल अछि जे आम आदमी के आर्थिक रीढ़ टूटि रहल अछि। एक तरहेँ समस्त सामाजिक व्यवस्था घायल भऽ रहल अछि । आइ उच्च वर्ग मे करोड़ों टका विवाह मे आ सामान्य वर्ग मे 50-60 लाख टका खर्च करब आम बात भs गेल अछि।
नै रहल आब विधि व्यवहार
नै रहल आब विवाहक मूल संस्कार
दिखावटी पर ज्यादा ध्यान भs रहल अछि
धोती कुर्ता आ पागक रिवाज पुरान भs रहल अछि
कनियाँक सिंगार आब नै करैया एहवाती
आँगन प्रवेश कs गेल पार्लर ब्यूटी
भs गेल बियाह में विधि सँ दिखावा भारी
संस्कृत मन्त्र सँ हिंदी मन्त्र भागल अगारी
बहुत बात पाछाँ छुटि गेल
अपन आगाँनक विवाह डेस्टिनेशन वेडिंग में बदैल गेल
मैथिली विवाहक गीतक कमी भs गेल
आदमी में आत्मीयता के कमी भs गेल
भोजन आब नै चाही शाकाहारी
मांसाहारी पर आब हौया रिश्तेदारी
नै करैया आब किओ परिचय बाजी
सब करैया आब हुल्लड़बाजी आ हुड़दंगवाजी

बदलाव!!!!!
◆किछु-किछु जगह कोनो विवाह मे 21टा सs बेसी लोक के नहि जेबाक अनुमति अछि, दहेज नहि लेबाक अनुमति अछि, जखन कि अपना मैथिला मे मोटर, स्कूटर आदि क मांग आम भs गेल। फैशनक कपड़ा, ब्यूटी पार्लर आदि पहिरब पर रोक लगा देल गेल अछि। किछु प्रांत मे हजारों रुपया के विवाह कार्ड पर मात्र रोक लगा देल गेल अछि, किछु ठाम कुल 21 खाद्य पदार्थ के नियम बनाओल गेल अछि । उपहार लेनाय देनाय बन्द कs देल गेल, समाज सुधार के लेल अपनाओल गेल एहि पद्धति पर अलग-अलग विचार भs सकैत अछि, मुदा प्रदर्शन, फैशन, दहेज, पैघ भोज पर सीमा तय करय पड़त, लघु बियाह के समूह बनायल जाय ,कम सँ कम खर्चाक जरूरत के हिसाब सs चार्ट तैयार हुया। समाज सुधार ताबेत धरि प्रभावी नहि होयत जाबत धरि प्रचारक स्वयं अपना आँगन सँ शुरुआत नहि करत । जा धरि लोक सिर्फ सुधार के नाम पर अपन नेतृत्व, वर्चस्व आ समर्थन के आधार स्थापित करैत रहत, लक्ष्य के सफलता पर संदेह अछि।

सुखी विवाह चाहि तs
विवाहक खर्च
कनि कम करू
देखा-देखी
पड़ोसक सभसँ
नहि करू जगमग तड़क-भड़क
अहाँ विवाह करू आडम्बर नय
भरू मांग सिंदूर सँ
आँसू सँ मांग भरू नय
रिश्तेदारे के संग बराती जाऊ
बस विवाह जोड़ा मे दुल्हन लाऊ
एक दिन लेल बुद्धिमान बनु
अपन मैथिल विधि व्यवहार संग वियाह करू
बचत-बचत सँ पाय जोडूं
धिया पुता के शिक्षा सँ जोडूं

।।जय मिथिला.. जय मैथिली..जय मैथिल।।
।। जय दहेज मुक्त मिथिला परिवार ।।

✍️ अमित जी 30/11/23
(अशुद्धिक लेल क्षमाप्रार्थी)