अपन संस्कार आ विधि ब्यवहार केर संग कतेक न्याय कऽ रहल छी इ सोचनीय विषय

1448

शिक्षा संस्कार केर जननी होइत छैक आ संस्कार कहियो नहिं कहैत छैक जे अपन विधि ब्यवहार के त्यागि कऽ पाश्चात्य संस्कृति के अपनाबी। मुदा बिडम्बना जे मैथिल समृद्ध संस्कार के त्यागि हमरा लोकनि अपना के बहुत काबिल बुझैत छी। संस्कार कखनहु नहिं कहैत छैक जे वस्त्र छोट आ अप्राकृतिक सुंदरता के अपनबैत अपन छवि केर प्रदर्शन करी। सदिखन इच्छा जे सभक ध्यान मात्र हमरे टा पर आकर्षित होइत रहय, फोटोग्राफी आ विडियोग्राफी के क्लिक मात्र हमरे दिस रहै, एकर होड़ में हम अछि। छवि प्रदर्शन केनाइ कोनो खराब बात नहि थिकै मुदा ओकर समय आ स्थान होइत छैक मुदा बैवाहिक स्थल के फैशन टीवी बनाओनाइ कोनो तरह सँ उपयुक्त नहिं मानल जा सकैत अछि। बुढिया बाबी सौंसे घर के माथ पर उठाओने छैथि जे केरा के कोशा नहिं छैक, बेदी पर के समान सभ के कोनो पता नहि छैक, अमुक समान नहिं देखैत छियैइ, मुदा घरक आन सदस्य बाबी के बात नहिं सुनि रहल छैक, कनियाँ के श्रृंगार करवाक लेल मधुबनी के सभ सँ महग ब्युटी पार्लर के दू टा बच्ची आयल छैक जे कनियाँ के सजा रहल छैक आ कनिया के बहिन बहिनोइ विडियो बला के सामने फोटो शूट करा रहल छैथि। कनियाँ के माय बाबू भाई सेहो सेल्फी में मग्न छैथि आ एको रत्ती बुझेवे नहिं करैत छैक जे बिवाह दू टा पवित्र आत्मा के मिलन होइत छैक आ ओकरा लेल वैदिक रीति रिवाज सँ पाणिग्रहण संस्कार होइत छैक।बरियाती के स्वागत सत्कार के सभटा भार कांट्रेक्टर के देल गेल छैक। बियाह सँ पूर्व वरमाला के लेल मंच सजल छैक जाहि पर आंगन के प्रायः प्रत्येक सदस्य फोटो खिंचेवाक लेल कतारबद्ध छैक। बरियाती अयलाक पश्चात् कोनो प्रकारक उत्साह नहिं छैक, जे मिथिला भगवान राम के बरियाती के लेल अपन हृदय सँ अतिथि सत्कार कयने छलाह, बरियाती के पैएर धोयवाक लेल छोट चौकी आ पानि राखल रहैत छलैक आ कन्या पक्ष के सम्मानित सदस्य हुनक चरण पखारवाक लेल उपस्थित रहैत छलाह, ओ सभटा लापता भऽ गैलैक अछि। आंगन में स्त्रीगण सभ के फैशन में कोनो कमी नहिं छैन्ह मुदा मैथिली विवाह गीत गावय बाली कतहु नहि देखा रहल छैथि। धोती कुर्त्ता पाग बला ने बरियाती छैक आ ने बर, सभटा ब्यवस्था आधुनिकता सँ परिपूर्ण छैक। बियाह करबै बला पंडित जी एकटा दोग में नुकाएल छैथि कारण हुनकर कोनो महत्वे नहिं छैन्ह.. बातावरण के देखि कऽ एकदम नहिं लगैत छैक जे कोनो मैथिल केर बियाह थिकै। मिथिलाक संस्कृति के आंखिक सामने एतेक ह्रास होइत देखि मोन कचोटनाइ स्वभाविक।मोन बेरबेर एकहि टा बात कहैत अछि जे एकर दोषी के? हम समस्त मिथिला बासी ।हम अपन धिया पूता के शिक्षित अवश्य कयलहुँ मुदा संस्कार नहिं दऽ सकलहुँ। अपन सुन्दर संस्कृति आ विधि ब्यवहार के विषय में अपन धिया पूता के नहि बुझा पयलहुँ…..
कीर्ति नारायण झा