आडम्बर के पाछू विलुप्त होईत पारम्परिक विध -व्यबहार,

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लेखनी के धार 🙏🏽🌹
दिनांक -1/12/23
शीर्षक –
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कोनो भी समाज के संस्कृति ओहि समाज के संस्कार होइत अछि,जाहि मे पारम्परिक विध -व्यबहार के दर्शाओल जाईत अछि।
आधुनिक युग में मनुष्य अपन संस्कृति यानी संस्कार के बिसरी पाश्चात्य संस्कृति के अपना रहल छैथ। मनुष्य के जीवन शैली में आधुनिकता के समावेश भ चुकल छै।समाज अपन पारम्परिक विध -व्यबहार के छोड़ी आडम्बर के होड़ में फसल जा रहल छैथ,जेकर परिणाम स्वरूप पुरान पारम्परिक विध -व्यबहार सब कतौह ने कतौह विलुप्त भ रहल अछी।
आजुक वियाह -दान में जाहि तरहे बढि -चढि कय धन के खर्च करल जाइत अछि ओ एक तरहे धनक दुरुपयोग होईत अछि कारण अहि स केवल आडम्बर के फैलाव भय रहल अछि।
वियाह वर -कनीयां के लेल एक टा पवित्र बंधन होई छै जाहि मे दु टा परिवार के मिलन होई छै,जेकर साक्षी कुटुम्ब आर समाज रहैत छैथ। ओहि वियाह में भिन्न भिन्न तरहक विध -व्यबहार सब होई छै जाहि स मनोरंजन के संग -संग किछु ज्ञान सेहो भेटै छऐन्ह वर -वधु के संग समस्त परिवार के,सब अपन जिम्मेदारी मे लीन रहै छैथ जाहि स आपसी सहयोग आर भाईचारा के संदेश भेटै छै। मूदा आबक वियाह के लोक सब धन के तराजू पर तौल दै छथिन, जेकरा जते छै से ततेक धनक प्रदर्शन करैत छैथ ,अहि में पिसा जाई छैथ किछु मजबूर आर गरीब बेटी के बाप जिनका छनिक पल के खुशी लेल अहि आडम्बर के लेल अपन जमीन आर मकान तक बेचय परैत छऐन्ह।
आडम्बर के चक्कर में नव -नव फैशन अपना रहल छैथ लोक सब जेना डेस्टिनेशन वियाह, प्रि वेडिंग शुट, मेंहदी, हल्दी, संगीत, रिसेप्शन पार्टी, जयमाला कार्यक्रम, आदि अहि सब में अपन मिथिला के विध -व्यबहार जेना धोविन सुहाग,आम,मौह वियाह,नैना ,जोगिन, मौहक, चतुर्थी,भरफोरी विसरने जाई छैथ ,अहि में हमहुुं आंहा कम जिम्मेदार नहीं छी ।
पिछला सप्ताह एक टा वियाह में शामिल भेलहुं अपने कुटुम्ब के ओतय,। ओहि ठाम्ह मंडप आर सजावट देखी आँखी चौंधिया गेल ,सबहक पहिरावा,ओढावा देखी बुझी परल जेना कोनो वेष -भुषा प्रतियोगिता में आएल छी।खान -पान के बाते नही पुछू छप्पन प्रकारके दुकान लागल छल ,खाए स बेशी कुड़ादान में फेका रहल छल। जयमाला के स्टेज देखी बुझलहुं स्वर्ग स विमान उतरी रहल अछी कनियां -वर लय। फोटो खिचवय में आर सेल्फी पोज में सब एते व्यस्त छलैथ जे के बाराती आर के साराती सब अपना मे लीन,किनकर स्वागत हेतैन , कनियां के देखय स के बचला जे भोर तक कष्ट सही रहता सोहाग देबय लेल ।बराति -सराती अपने अपने लिय खाऊ आर जाउ सब फोटो खिचवय में व्यस्त छैथ आर हेता किया नहीं अहि लेल ने लाखो के कपड़ा आर मेकअप पर खर्च केलैथ हे ,सब स पैघ बात काजे कि छै सब टा ठेका बला पर भार छै। एतबे नहीं सुनलहुं जे पंडित जी के कहै छथिन कनी शार्टकट में निपटा देबै सब थाकि गेल छैथ , बेचारा पंडित जी करता कि एके घंटा में करा देलखीन वियाह आर करता कि ओहो भरि राति फोटो शूट देखी कय थाईक गेल छलाह।हम कि करीतहू हमरो अहि आतिशबाजी के धुंआ स घुटन भ रहल छल मुदा किनका कहबैन कहता देखनेहे नहीं छथिन हाई क्लास के वियाह।
जे भी छै हमरा नजरी स अगर सादगी के अपना पारम्परिक विध -व्यबहार आर मंत्र जप पर ध्यान दय वियाह होई छै त ऽ अहि तरहक बर्बादी स बचल जा सकैया।संगे अपन संस्कृति के बचाओल जा सकैया।आर अही पैसा स कोनो गरीब के बेटी के कन्यादान कराय पुण्य कर्म के भागी बनल जा सकैया।
✍️ रिंकू झा, ग्रेटर नोएडा