आखिर कहिया धरि हैत दहेज दानव सन कुप्रथाक अंत?

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दहेज दानव अछि ई बात बुझितो एकर अंत नै भ रहल अछि। दहेज प्रथा आदि काल से चलल आबी रहल अछी। पहिने मांग कम रहै लेकिन तैयो लड़की के पिता के मांग के पाई पुरेनाय बहुत कठिन रहैंन। तहिया लोक लग पाई कम होयत रहै। कर्ज क के सब ब्यबस्था करैत रहैथ। दहेज तहियो गरीब लोक लेल परेशानी छल अइयो अछि।
दहेज ओयह अछि बस मांगो के तरीका अलग अलग अछि।

एक सीधा सुना देलगेल जे हमरा एतेक पाई चाही। जय लड़का बला के सिर्फ पाई चाहि हुँनका लड़की बला खूब पाई द के अपन केहनो बेटी के लेल किन अनै छथी।
जिनका पाई नै छन्ही ओ कर्ज करै छथी।
आब लड़का लड़की बराबर के पढाई करै छथी तैयो दहेज कम नै भेल अछि।
आब लड़का बला कहै छथिन जे पाई नै चाहि बस दुनु तरफ के खर्च करू। फाइव स्टार होटल, थ्री स्टार होटल में ब्यबस्था करू। हमर बरियति के विदाई निक हुए के चाही।
जिनका लग पाई छैन हुँनका लेल त ठीक जिनका लग नै अछि ओ त बहुत परेशानी झेलई छथी।

दहेज के बढ़ाबा देबो में लड़की बला के हाथ कम नै बुझु।
जय लड़की बाला लग पाई छैन ओ दिखबा में अनाप सनाप खर्च करै छथी खाना में बहुत तरह के ब्यंजन जे सब चीज लोक खाइयो नै सकैये। सिर्फ बर्बादी।
दुरागमन में ट्रक भरी क गृहस्ती के समान।
लेकिन गरीब लोक के जखन ऐ सब लेल प्रेसर देल जाय छै हुँ नका लेल जे परेशानी छैन ई ओएह बुझी सकै छथी।
दहेज के चलते तलाक़, हत्त्या, प्रताड़ना में दिनों दिन बरहोतृ भो रहल अछि।
पता नै ऐ दहेज रूपी दानव के कहिया अंत हेत।

पूनम ठाकुर