अद्भुत उमंग सौं भरल होइ अछि गामक दुर्गा पूजा

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दुर्गा पूजाक उत्साह – – – दुर्गा पूजा आओर गामक बाल्यावस्था, दुनू एक दोसर केर पूरक। स्कूलक झोड़ा आ बोरा पटकि क मूर्ति देखवाक लेल सीधे दुर्गा स्थान नित्य गेनाइ आ घंटा घंटा भरि ओहि मूर्ति केर निहारनाइ, इ नित्य केर कार्यक्रम छल । दुर्गा जी के चाल में जाहि दिन सँ खुटटा _खट्टी गाड़ैत छलैक ताहि दिन सँ लऽ कऽ रंगाई ढौराइ धरि नित्य दिन एक बेर सांझ में दुर्गा स्थान गेनाइ आवश्यक छल। दुर्गा पूजाक एक महीना गामक आकर्षण एकटा विशेष होइत छलैक। समय कोन दऽ कऽ बीति जाइत छलैक से बुझेबे नहि करैत छलैक। ओहि समय बुझाइत छल जेना सांझ जल्दी भ जाइत छल। पूजा के दस दिन त सदिखन दुर्गा स्थान में बीतैत छल। अपन सोझ साझ, सरल आ सुमधुर बाल्यावस्था, चौरचन के परात सँ दुर्गा जी के चाल में खुट्टा खट्टी गड़ैत छल। ओकर बाद नार पुआर सँ दुर्गा जी केर आकृति बनैत छलैन्ह आ तकर बाद माटि लगैत छलैक। अनन्त चतुर्दशी के दिन माटि लगनाई प्रारम्भ होइत छलैक। भरि दिन में कम सँ कम दू बेर दुर्गा स्थान गेनाई आवश्यक छल कारण मूर्ति के प्रगति के सूचना लेबा में आ पुनः ओकरा परिवार में पैघ भाई आ अगल बगल के संगी सभक समक्ष ओकर प्रचार प्रसार करवा में अत्यन्त आनन्द केर अनुभूति होइत छल। हमरा सभक मोन में कखनहु एहि बात केर घमण्ड नहिं होइत छल जे गामक पूजा के सर्वे सर्वा हमर पिताजी पंडित जटाधर झा छलाह। वएह एहि दुर्गा पूजा के गाम मे आरम्भ कराओने छलाह। ओना आइयो हमरा लोकनि एकरा गामक पूजा मानैत छियैक आ कोनो प्रकारक हस्तक्षेप नहिं ओना गामक लोक सभटा बुझैत छैथि। खैर बाल्यावस्था में दुर्गा पूजा केर एक महीना गामक रंग के बदलि दैत छल। समय एतेक जल्दी बीति जाइत छलैक जे बुझवे नहिं करियै जे कखन भोर भेलैक आ कखन साँझ। पूजा के दस दिन तऽ पढाई लिखाई बन्द आ भरि दिन दुर्गा स्थान। सभ सँ नीक लगैत छलैक दुपहरिया आ सांझक आरती में। दुपहरिया मे खीरा के काटि कऽ प्रसाद बँटाइत छलैक। ओकरा लेवाक लेल मारि होइत छल। आ वएह खीरा बारी में लत्ती मे लुधकल रहैत छलैक ओ जखन कियो तोड़ि कऽ काटि क कियो सामने राखि दियेए त लगैत छल जेना कांच करैल अछि। छुवितो नहिं छलहुँ हमरा लोकनि। मेला त ओना दसो दिन लगैत छलैक मुदा बेलनोती के उपरांत षष्ठी दिन सँ जबरदस्त भीङ जमा होइत छल। कारण ओहि दिन सँ नटुआ के नाँच आ राति में नाटक आरम्भ होइत छलैक। नाटक देखवाक लेल त हमरा लोकनि साँझे सँ स्टेज के आगू बोरा बिछा कऽ अपन अड्डा बना लैत छलहुँ। एहि लेल कतेको बेर झगड़ा सेहो होइत छल कारण गामक किछु बदमाश बच्चा सभ सभक बोरा उठा कऽ फेकि दैत छलैक मुदा नाटक आरम्भ होइत होइत मामला शांत भऽ जाइत छलैक। दुर्गा पूजा के दस दिन त बहुत आनन्द पूर्वक बीतैत छल मुदा यात्रा के दिन इच्छा होइत छल जे गाम छोड़ि कऽ कतहु भागि जाई। भसाओन दिन की बात छलैक से नहिं जानि जे लगैत छलैक जेना दुर्गा जी के आँखि सँ नोर खसि रहल छैन्ह। पूरा गाम उदास भ जाइत छल। गामक जीवछ तिवारी केर लाउडस्पीकर बन्द भ जाइत छलैक। ढोल पिपही केर आवाज शांत भ जाइत छल। चारू कात शांति। अद्भुत उमंग छलैक गामक दुर्गा पूजा में……..कीर्ति नारायण झा