मार्कण्डेय पुराण : एक दृष्टि, एक दृष्टिकोण

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मैथिल यायावर , सहरसा,७ अक्टूबर २०२३/मैथिली जिंदाबाद

 

यद्वयं मद्वयंचैव व्रत्रयं वचतुष्टययम् ।

आलिभ्याग्नि कुस्कानि पुराणानि विदुर्बुधा: ।।

 

अर्थात,अहि श्लोकक भावसं अठारह टा पुराण अछि। ओना त उपपुराणादि विभेदें अनेक भेद कहल जाइत अछि।परंच अठारह टा पुराण जगत मे बेस प्रतिष्ठित भेल अछि।

एतय हम मार्कण्डेय पुराणक संदर्भ मे चर्चा क रहल छी। असल मे ई पुराण महर्षि जैमिनी आ मार्कण्डेय मुनिक मध्य निबद्ध संवाद थिक। ओना त पुराणक रहस्य बुझबा मे बड्ड कठिनाई होइत अछि। तथापि महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यासक रचनाक कारणे लौकिक इतिहासक ज्ञान एहिसं सुगम भय गेल अछि।

पुराण शास्त्रक पांच भेद अछि —

महापुराण,पुराण, उपपुराण, पुराण संहिता,ओ इतिहास।

एहिमे महाभारत सर्वांगपूर्ण इतिहास लक्षणयुक्त अछि। पुराण शास्त्र ने ऐतिहासिक ग्रंथ थिक आ ने कल्पित गाथाहि सं पूर्ण अछि।वस्तुत: पुराण पूर्ण ज्ञानमय त्रिकालदर्शी वेदक भाष्य ग्रंथ थिक।

एहि पुराणक भाषा अतिग्राह्य,अतिमधुर आ मर्मस्पर्शी अछि। संगहि एहिलोक आ परलोक संबंधित ज्ञान से परिपूर्ण अछि। तें जनसाधारणक लेल बेस प्रतिष्ठित होएबाक कारणे बेसी महत्वपूर्ण बुझाइत अछि।

मार्कण्डेय पुराण कुल १४७ अध्याय मे समाप्त भ जाएत अछि। एहि मे देवी देवताक लीला कथा अछि, ऋषि मुनिक उपाख्यान अछि। एहि मे महापुरुषक जीवन चरित्र अछि, इतिहास अछि, काव्य अछि, राजनीति अछि, व्यावहारिक ज्ञान अछि। संगहि एहिमे सब प्रकारक विद्याक विषद वर्णन अछि।

एहि पुराणक ई विशेषता अछि जे एकरा अन्तर्गत बहुत रास विषयक विस्तार पूर्वक वर्णन कयल गेल अछि। जाहिमे मुख्य रूप से

जैमिनीक महाभारत संबंधित प्रश्न,

चरकोत्पत्ति कथन,

शमीक मुनिक निकट पक्षीक शाप वृतांत कथनोपरांत विंध्याचल गमन

चरक से जैमिनीक महाभारत संबंधित चारि टा प्रश्न आ तकर उत्तर

द्रौपदीक पांच पति होएबाक कारण

द्रौपदीक अविवाहित पांचो पुत्रक निधन

राजा हरिश्चंद्रक उपाख्यान

प्राणि जन्मादिक प्रश्न आदि