मिथिला मे मंगलमूर्ति सब दिन पुजल जाय छथि ।

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वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

#लेखनीक_धार #

शीर्षक:- “मिथिलामे गणेश भगवानके पूजा आ महत्व ”

हम मैथिलानी सभहक अपन धार्मिक संस्कारक प्रति आसक्ति एवं जागरूकताक कतबो प्रशंसा करब तँ कम हाएत । देवता-पितर सभहक पूर्ण भक्ति भाव-विधि विधान सँ अनवरत आराधना में लोक लागल रहैत अछि।
मिथिला में तs पूजा-पाठ आ पर्व तिहारक बहुत महत्व अछि।जखन कोनो पूजा आ माँगलिककार्य या कोनो संस्कारक शुरुआत होई छै त प्रथम गणपति जी के आवाहन कायल जाय छै।
पूजा-पाठ में भगवान गणेश जी के बहुत महत्वपूर्ण स्थान अछि । सामान्यतः बाधा दूर करय वाला भगवानक रूप में हुनकर पूजा कायल जाइत छनि । जे सब अपन महत्वाकांक्षा पूरा करय चाहैत छथि आ कृतज्ञ छथि हुनका हुनकर पूजा करबाक सलाह देल गेल अछि ।
गनपतिक आराधना सँ सब मनोरथ पुरैत छैक।
कोनो धार्मिक क्रियाकलाप के शुरुआत भगवान गणेश भगवानक पूजा स होइत अछि । सब देवता मे ओ सबसँ प्रिय छथि । कहल जाइत अछि जे गणेश देवी पार्वतीक सृष्टि छलाह । भगवान गणेश के पूजा करला स जीवन के सब परेशानी दूर भ जायत अछि मनोकामना पूरा भ जायत अछि । यही कारण छै कि, बुध दिन भगवान गणेशक पूजा करब विशेष फलदायी मानल जाइत अछि ।

मिथिला में गणेश चौठ(चौरचंन) क महत्व
भादव मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि क गणेश चतुर्थी मनआओल जाईत अछि। अहि दिन गणेश जी के बिशेष पुजा, आराधना होईत अछि मिथिला में। समस्त मिथिला में अहि दिन चौरचंन पआबऐन सेहो मनआओ जाय छै।
ओना तऽ कहै छै जे चऔठक चान नहीं देखबाक चाहि कारण ओ कलंकित रहै छैथ जे देखला स दोष लागै छै मुदा मिथिला में ई नहीं मानल जाईया बल्कि ओहि दिन चान के दर्शन बिशेष रुप स केल जाई छऐन्ह। चन्द्रदेव के अपन सुन्दरतक बहुत अभिमान छलऐन जाहि कारण ओ एक बेर गणेश जी के देखी हुनकर रुप के ऊपर हँसने छलथिन, जाहि स क्रोधित भय गणेशजी चंद्र देव के श्राप देने रहथीन कि ओ कुरुप भय जेतैथ आर हुनकर दर्शन जे कियो करता हुनका ऊपर मिथ्या कंलक लगतैन। लेकिन बाद में जखन चंद्र देव के एहसास भेलैन त ओ गणेश जी स क्षमा-याचना कैलथिन गणेशजी हुनका वरदान देलखीन जे भादवक चौथ पर जे कियो गणेश जी के संग -संग चंद्र देव के पुजा करथिन, हुनका कोनो दोष नहीं लगतऐन।

केना भेला गणेश भगवान प्रथम पूज्य
एक बेर जखन श्री गणेश भगवान के प्रथम पूज्य हुआक दर्जा मिल गेल छलैन त सब देवता नाराज आ क्रोधित भ भगवान विष्णु के पास गेलथिन । भगवान विष्णु एक रास्ता निकाललथिन की जे कियो पूरा ब्रह्माण्ड के परिक्रमा क सबसे पहिने एता उनके प्रथम पूज्य घोषित क देल जायत।
कुमार कार्तिकेय, देवराज सहित सब देवता पूरा ब्रह्माण्डक परिक्रमा करै चएल गेला । सब देवता
आश्वस्त छ्ला, कि गणेश कखनौ नहि जीतता । भगवान श्री गणेश जी स्वयं बुध्दि और ज्ञानक देवता , अपन माता(पार्वती) आरु पिता(महादेव) के एक साथ बैठा क माता-पिताक परिक्रमा कराय लगला । आर सबसे पहिने परिक्रमा क प्रथम आयब गेला। गणेश भगवान कहलथिन जे हमरा लेल त हमर पिता महादेव और मां पार्वती समस्त संसार छथिन । उनकर चतुराई आ तर्क शक्ति देख सब देवता आश्चर्य भs गेला आ उनका खुशी-खुशी प्रथम-पूज्य स्वीकार कयलथिन।

हमरा आओर नहीं अप्पन अपमान चाहि।
दहेज मुक्त मिथिला के मिथलांचलधाम चाहि।।

✍️ अमित जी 21/09/23