“मैथिली लोकगाथाक वर्तमानमे संकुचित होइत आयाम निःसंदेह चिंताजनक अछि।”

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— दिलीप झा।     

 

कोनो लोकगाथा लोक साहित्यक अभिव्यक्ति आ संगहि सुदूर अतीतक परंपरा के संवाहक होईछ अतः हम कहि सकैत छी जे लोक साहित्यक जनजीवन सs जुरल बेहद लोकप्रिय विधा लोकगाथा थिक जाहि सs कोनो सभ्यता संस्कृति के माटिक सुगंध विसरित होईत रहैत छैक। साहित्य में लोकगाथाक बहुत महत्वपूर्ण स्थान होईछ। लोकगाथा हमर संस्कृतिक संग संग प्रेम, श्रृंगार आ शौर्य के उद्भाषित करैछ। लोक गाथा मे गोपीचंद आ नैका बनिजाराक गाथा छोरि आर सभ नायक के शौर्य, जनकल्याण आ मंगल कामनाक भावना के प्रस्फुटित करैछ। लोकगाथा सभ मे नायक गण के सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामया के भावना शौर्य रूप मे दृष्टगोचर होईछ। ओतहि लोकगाथा सभ मे नायिका के अपन सुंदर चरित्र आ प्राकृतिक सौंदर्य मे अति मोहक आ आकर्षक रूप के प्रदर्शित केलक अछि जे मैथिल परंपरा मे मर्यादाक लक्ष्मण रेखा के भीतरहि पालन करैत देखल गेल अछि। समय परला पर ओ अपन प्रभुत्व सs देवता लोकनि के सेहो झुकैवाक सामर्थ रखैत छलीह। एहि तरहे कहवा मे कोनो अतिश्योक्ति नहि जे मैथिली लोकगाथा मे वर्णित शौर्य आ श्रृंगार वर्तमान आ भविष्यक लेल संबल आ पाथेय सिद्ध भs सकैत अछि।
अभिधेय लोक साहित्यक आधार रस संचयन होईछ। लोक साहित्य के अनुपम बिधा लोकगाथा अपन गेयात्मकता के कारण पुरातन सs लs कs अधुनातन तक लोक कंठ मे सुरक्षित आ संरक्षित रहल जाहि मे कथा तत्व आ गायन के सुंदर सम्मोहक उत्तेजक सम्मिश्रण भेटैछ। जाहि कारण सs एकर नायक लोकनायक होईछ जनिकर भलेही एतिहासिक प्रसिद्धि नहि होइन्ह परंतु हुनकर एतिहासिक उपस्थिति संदिग्ध नहि मानल जा सकैत अछि जे अपन शौर्य पराक्रम आ जन कल्याण करवाक बलबूते कालांतर मे देवताक रूप मे प्रसिद्धि पौलनि आ प्रतिष्ठित, पूजित सेहो भेलाह उदाहरण राजा सलहेस, आल्हा रुदल, शीत वसंत इत्यादि इत्यादि। ई नाच सभ आइओ अपन मिथिला मे बहुचर्चित अछि आ लोकप्रिय सेहो। ओना तs मैथिली लोकगाथा मे सभ रस के संजोजन देखवा मे भेटैत अछि लेकिन श्रृंगार आ वीर रसक प्रमुखता सs उद्घाटित भेल अछि। लोकगाथाक लोकनायक अपन शौर्य आ पराक्रम सs लोक के अत्याचारी तत्व सs मुक्तिक अभयदान देवा मे वैशिष्ट्य रहल अछि। अमर सिंह लोकगाथाक नायक स्वयं अमर सिंह वदिला चमार के आतंक सs आतंकित ब्राम्हण वाला “कमला” के त्राण दियैने छलाह। समकालीन समाज बदिलाक कुकृत्य सs तंग भs गेल छल, धर्म पर आघात भs रहल छल, समाजक बहु बेटी अपना आप के असुरक्षित महसूस कs रहल छलीह। ओही समय मे आलौकिक अमर सिंह के जन्म भेल आ ओ प्रतिज्ञा कैलथि। तदुपरांत मोरंग स्थित बदिला चमार के घर पहुंच युद्ध करवाक लेल ललकारलैन आ अपन छुरी सs बदिला चमार के सिर काटि कs ओकर दुरखुर पर टांगि देने छलाह। एहि लोकगाथा मे अमर सिंहक सौर्य के आगा श्रृंगार फीका परि जाईत अछि। नव बिबाहिता जे श्रृंगार सs सुसज्जित छलीह आ कोनो तरहक वैवाहिक सुख नहि पौलीह कारण एतs अत्याचारी के नाश करब प्रथम प्राथमिकता छल। एहि तरहे मैथिली लोकगाथा मे बहुतो रास लोकगाथा अछि जे अमिट छाप छोड़ने अछि जेना कारिख पजियार, दिनाभद्री, सती बिहुला लोकगाथा इत्यादि इत्यादि।

अप्पन मिथिला मे प्रारंभहि सs एहि तरहक बहुतो रास लोकगाथा अछि जेकरा सुमधुर, उत्तेजक आ कर्णप्रीय गायन के विधा सs आ आकर्षक नाट्य मंचनक रूप मे समय समय पर प्रस्तुत कैल जाइत रहल अछि जेकर भाषा सर्वसामान्य आ लोकप्रिय रहल अछि। वर्तमान मे कमोबेश एहि मे कमी जरूर देखवा मे अबैछ परंतु अखनो समाज मे निषेध नहि कैल गेल अछि। लोक कंठ मे संरक्षित ई लोकगाथा सभ हमर समाज मे जनकल्याणक भावनाक संचरण, अत्याचार उन्मूलन, मानवीय कुकृत्य के उन्मूलन आ सर्वमंगल कामना के उद्बोधित करैत अपन समाज के परिमार्जित करवा मे अपन महत्वपूर्ण भूमिका निभबैत अछि।
मैथिली लोकगाथाक वर्तमान मे संकुचित होईत आयाम निःसंदेह चिंताजनक अछि तैं हेतु कहुखन कहुखन कलुषित मने एकर प्रचार प्रसार के संवर्धन के हृदयाभाष होइछ जे परमावश्यक थिक। अंततः कहवा मे कोनो संकोच नहि जे मिथिला मे अदऊ काल सs अबैत लोकगाथा हमरा सभक वर्तमान आ भविष्यक लेल अति महत्वपूर्ण संबल आ पाथेय अछि।