“समाजसॅं अलग भ’ मनुक्खक कोनो अस्तित्व नहि”

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— रिंकू झा।   

मनुष्य एक टा सामाजिक प्राणी होईत अछी, समाज स अलग हुनकर कोनो अस्तित्व नहीं रही जाय छैन।एक टा सामाजिक प्राणी होवय के नाते मनुष्य स ब्यभारिकता के उम्मीद केवल मनुष्य नहीं बल्कि समाज स जुरल अन्य प्राणी सेहो करै छैथ।
आधुनिक युग में समाज एक टा पैघ परिवर्तन के दौड़ स गुजरी रहल अछी,जकर गति बहुत तेज रफ्तार स भागी रहल अछी।एकर प्रभाव हमरा अहां के सामाजिक, आर्थिक,आर पारिवारिक तथा धार्मिक परिवेश पर असर छोड़ी रहल अछी। समाज के हालात पर तेजी स आश्चर्यजनक बदलाव भऽ रहल अछी,एकर असर हमरा अहां के नैतिक मूल्य आर संस्कार पर सेहो परी रहल अछी।बिज्ञान आर तकनीक के नया-नया आविष्कार समाज के हर क्षेत्र के प्रभावित कऽ चुकल अछी।ई केवल हमरे अहां के समाज या देश के नहीं बल्कि समग्र विश्व में अपन असर दिखा रहल अछी।अपना आप में श्रेष्ठता आर दिखावा के लड़ाई के होड़ पुरा समाज में सर्प जका अपन जहर फैला रहल अछी।नीजी स्वार्थ स भरल मनुष्य के मन दोशर के बारे में सोचबे नहीं करै छैथ अपनही धुन में मस्त रहै छैथ।
कहैत दुखद मुदा कड़वा सच ई अछी की मनुष्य एक दोशर के दुश्मन बनि चुकल छैथ आपस में सगा -संबधी एक दोशर के चिन्हो कऽ अंनचिन्हार बनी जाय छैथ। अड़ोस-पड़ोस के संबंध तऽ बिसरीये गेल छथिन।गाम -घर में तऽ तैयो कनी -मनी लिहाज बचल अछी मुदा शहर में तऽ लेश मात्र नहीं हया बचल अछी।आजुक बच्चा सब अही लेल बिगरी रहल छैथ कारण पड़ोसी के नजरी हुनका पर छऐन्ह नहीं, संयुक्त परिवार आर ओकर प्यार ओ सब बुझबे नहीं करै छैथ , । पैसा कमाय के होड़ में भागमभाग आर चकाचौंध के जिंदगी में हम अहा एतेक रमी चूकल छी जे संबंध के बिखराव, बच्चा के बचपन, रिस्ता के कद्र, आपसी सहयोग, भाईचारा, इंसानियत सब किछु के ताख पर राखी कनिए में सिकुड़ी रहल छी । पहिले कै समय में छोट स छोट आर पैघ स पैघ काज पुरा समाज मिली कय करै छला ,शादी ब्याह,जनेउ किनको एक के काज नही रहै छलैन बल्कि ओ पुरा समाज के भार होय छलै, जवार के जवार पुरा समाज मिली खुवा लै छला,मुदा आब सब किछु पैसा के बल पर लम्फ लम्फा दिखा कऽ होई छै मिनटो में जाहि मे समाज बस दर्शक बनी रही जाइ छैथ।हर चीज में लोक आब नफा नुकसान देखै छैथ, स्वार्थ के वशीभूत भय बस रिस्ता के दरकिनार करै छथिन,
अगा बढब गलत नहीं छै,समय के साथ चलब निक बात छै, मुदा आधुनिकता के होड़ में सब संबंध के पाछु छोड़ी स्वार्थी बनी अगा निकली जाई ई निक बात नहीं छै, ताहि हेतु भविष्य के साथ साथ वर्तमान पर ध्यान दैत एक दोशर स आपसी सहयोग भाईचारा, प्यार आर सौहार्दता बना कऽ राखी। रिस्ता के डोर जे बिखरी रहल अछी ओकरा सहेज कय राखी तखने तऽ एक टा सभ्य सामाजिक प्राणी कहआएब।