“मिथिलामे माछ बहुत शुभ मानल जाइत अछि।”

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— पीताम्बरी देवी।       

अपन सब के मिथिला में माछ बहुत शुभ मानल जाईत अछि।यात्रा काल माछ देखा गेद ते यात्रा शुभ मानल जाईत अछि। पहिले विवाह करय वर जाईत काल माछ लय के मलाह ठाढ़ रहैत छल। कनिया द्विरागमन कय के अबै छलि ते जाल से सबारी के झांपि लै छल मलाह तखनि ईनाम मेटै छलै ओकरा तखनि जाल हटबैत छल। विवाह के चतुर्थी के भार भरफोरी के भार कहाउत के भार सब में माछ एनाई आबश्यक रहैये आर माछ भार में अबिते टा अछि।सब सगुन काज में माछ भेनाई आबश्यक अछि जमाय बसता यानि भात खेता ते माछ हुनका देले टा जेतनि।समधि के बसेवनि ते माछ देनाई अछि ।कनिया जे अबै छथि ते हुनका माछ निकावय देल जाईत छनि।भोज भात पितर तक के कर्म पर एकादशा द्वादशा के माछ बना के पिंड देल जाईत छनि।ई कहब जे मिथिला में जे शुभ अशुभ काज होईत अछि सब में माछ देल जाईत अछि। बिना माछ के कोनो काज नै होईत अछि। हरिमोहन झा खटर काका क तरंग में लिखने छथि हरी हरी जन्म किया भेल जखनि माछक मुरा पटि नहि भेल।तहिना प्रो०तन्त्रनाथ झा लिखने छथि रहुक सीर में गंग विराजय पूछि में छथि काशी पेट में चारू धाम बिराजय ई खा करि एकादशी। मिथिला में मैथिल माछ के एतबे प्रेमि छथि जे केहै छथिन जाहि दिन माछ नहि भेटल ते बूझू ओहि दिन एकादशी भेल।अपन मिथिला में बहुत गोटा कोनो दिन नै बारै छथि कोनो मास नै बारै छथि सब दिन सब मास में माछ खाईत छथि।भोर साझ दूनू साझ भेट जेतनि ते नहि नहि कहता।कहावत छै माछ भात पांच हाथ।माछ भात खा लिय तीन लोक जीत लिय।माछ सोहागक चिज अछि अहिवाति के माछ खेवेक चाहि ।पावनि होईत अछि जीतिया ओहि मे माछ मरूआ रोटी खेनाई पवनैतिन के अनिवार्य होईत अछि।माछ के बहुत जाईत अछि ।छोट से छोट पैघ से पैघ माछ मिथिला में भेटैत अछि।सबसे निक माछ रहुं के मानल जाईत अछि। मिथिला में रहु, भाकुर, बूआरी, भून्ना, बामी, सौरा,गैची, कतरा, गरैय, कबैय, पैठी , मारा , ईचना, सिंघी, मांगुर, टेंगरा, छहि, चेंगा, ढलैय, चन्ना, आदि अनेको तरहक माछ अपना सब के पोखरी में भेटैत अछि ।सब माछ के अपन अपन महत्व अछि जेना पैघ माछ में रहु भाकुर सोरा बूआरी मून्ना माछ नामि अछि ।तहिना छोट माछ में मारा पोठी ईचना छहि कबैय गरैय के अलगे स्वाद होईत अछि।ह हम एक्टा बात कहब छोटका माछ बरका माछ से बेसि सुअदगर होईत अछि।खत्ता के माछ के सेहो बर स्वाद होई छै ।माछ लोक बहुत तरह से बना के खाईत छथि। जेना तैर के सरिसो मिरचाई वला, कच्चा माछ गर्म मसाला वला, दहि दय के जीर मेरचाई वला , ईचना माछ तरी के चूरा संगे मारा माछ बैगन संगे झोर, माछ पका के साना लहसुन प्याज पका के नोन मिरचाई दय के बड निक बनै छै ।माछ ते मिथिला में घर घर के भोजन में अपन प्रिय स्थान बनौने अछि ।बूढ़ से बूढ़ माछक प्रेमि मैथिल सब रहैत छथि।