“बेमेल विवाहक दुष्परिणाम आ बदलैत स्वरूप”

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— दिलिप झा।     

अपन सभक समाज में एकटा बहुचर्चित लोकोक्ति अछि “विवाहक लड्डू जे खेलैथ सेहो पछतेलैथ आ जे नइ खेलैथ सेहो पछतेलैथ” समाज में पूर्णतः चरितार्थ होईत अछि। एकर मूलभूत कारण थिक बेमेल विवाह। समतुल्य विवाह संबंधक मात्र कल्पना कैल जा सकैछ कारण ई एक प्रकारक आदर्श शब्द अछि। बेमेल विवाह के प्रमुख कारक अछि अशिक्षा, गरिबी, धन लोलुपता, बाल विवाह, दहेजक विकराल स्वरूप आ मध्यस्थ व्यक्ति (घटक वर्ग) द्वारा बर अथवा बधुक द्वारा प्रस्तुत आंशिक विबर्णिका के सत्यापन, कुलीनक संग संबंध स्थापित करबाक पूर्व अपक्षित आंतरिक लिप्सा, रंग रूप सौंदर्यक पूर्व अपक्षित आंतरिक लिप्सा इत्यादि इत्यादि। अपन समाज में अधिकांश व्यक्ति आई बेटी विवाह के भार बुझि अपन माथ स जल्दी स जल्दी एकर निपटारा करs चाहैत छैथ। परंतु मेल विवाह (समतुल्य विवाह) संबंधक परिभाषा तखने पूर्ण होइत छैक जखन वर-वधूक पारिवारिक, वैचारिक, आर्थिक, धार्मिक आस्था, संस्कृति, जाति धर्म आ शैक्षिक स्तर, रंग रूप सौंदर्य, विचारधारा, शौख, मिज़ाज, शहरी या ग्रामीण परवरिश सब में समतुल्य होइक। संबंध स्थापित करवा स पहिने एक दोसर के परिवार के पूर्ण गुनब बुझब आ तदुपरांत वर-वधूक सहमति आवश्यक छैक। नहि त कालांतर में एकर बहुत गंभीर परिणाम के सामना वर-वधू या संबंधित परिवार के करs परैत छैक कखनो कखनो त मामिला न्यायालय तक पहुंच कs तलाक के रूप लs लैत छैक।
वैवाहिक संबंध जे बर कनियाक संसर्ग स नव सृजन के आधार मानल जाइत अछि ओकर समतुल्य भेनाई अर्थात सभ स्तर सs मेल रहनाई परमावश्यक थिक। समाज में एकरा लेल पूर्णतः प्रयास सेहो देखल जाइत अछि परंतु पूर्णतः समतुल्यता मात्र कल्पनाक विषय होईछ। आजुक परिदृश्य में बर वा कानियाँ द्वार मेल विवाह के आयाम के बदलि देल गेलैक अछि। कारण एतेक तक कि ओ आधुनिक दिखावा में परि कs मेल विवाहक मूल भूत कारक के उपेक्षा कय रहल छैथ जेना की समगोत्रीक संग विवाह, अजातिक संग विवाह, दोसर धर्मालंबीक संग विवाह, बिसम आयु बाला संग विवाह, रूप रंग सौंदर्य सs समझौता इत्यादि इत्यादि जेकर मूल जैर आधुनिक अर्थ प्रधान युग में भौतिकवाद सs ग्रसित मांसिकता आ दहेज के विकराल स्वरूप के अपन समाज में द्रुत गति सs प्रसार के कहल जा सकैत अछि। आजुक युग में किछु हद तक शैक्ष्णिक प्रसार सेहो बेमेल विवाह के नया स्वरूप गढ़वा में प्रमुख भूमिका निभsबैत अछि।आई काल्हि यूवक युबतीक पढाई के पाठ्यक्रम में सीर्फ़ आधुनिक युगक मांगक विषय वस्तुक समाविष्ट कैल गेल छैक नहि की अपन सुसंस्कृति सs संबंधित विषय वस्तुक आ ओकर परिणाम जेकर परिणाम सामने थिक। उच्च शिक्षा ग्रहन कs कs ओ लोकनि अपन सुसंस्कृति आ ओकर अपन जीवन पर प्रभाव सs अनभिज्ञ रहि जाइत छैथ। विबाहक विस्तृत परिभाषा सs अनभिज्ञ, दहेज सs प्रतारित, विवाह में विलम्ब होयबाक कारण जल्दबाजी में अपन नैसर्गिक दैहिक अवश्यताक पूर्तिक लेल लव मैरेज के निर्णय लेवाक लेल विवश भs जाइत छैथ आ मेल विवाह के मुख्य कारक आ एकर महत्व के उपेक्षा करैत छैथ। हुनक स्थित जेहने अन्हरा के सूतने ये तेहने अन्हरा के जागने वाला भs जाईत छैन्ह।  क्रमशः स आगु………..
अंत एहि सs करै चाहब जे समाजक प्रबुद्ध वर्ग बेमेल विवाहक दुष्परिणाम आ बदलैत स्वरूप पर गहन चिंतन कय कs अपन मैथिल समाज के एक गोट दिशा निर्देश देथून। कन्यागत वा बरागत सs हमर व्यक्तिगत आह्वान रहत जे सुसंस्कृति के शिक्षा अपन धीया पुता के अपन परिवारिक स्तर सs प्रबंध कराबैथ। आ अपन घीया पुता सs आकांक्षा रहत जे एहि पुरुष प्रधान समाज में अपन सुसंस्कृति के रक्षा करैत विवाहोपरांत सामंजस्य स्थापित करवा में अपन अहम भूमिका के निर्वाह करैत सहभागिताक संग आगामी अमूल्य जीवन के आनंदमय बनाबैथ। हमर व्यकतिगत अवधारणा थिक जे समतुल्य विवाह सिर्फ काल्पनिक शब्द थिक जकर पूर्ण स्वरूप भेटब असंभब।
आशा करैत छी जे प्रेरणाक श्रोत जाहि संस्कृति में साक्षात मां गौडी थिकीह ओतय सभ ठीक होयत आवश्यकता थिक सिर्फ व्यक्तिगत प्रयास आ व्यतित्वक विकाश के।