“एखनहुॅं मिथिला क्षेत्रमे बहुत हद तक छोटका -बड़का शब्दक प्रयोग होइत अछि जाहिसँ सामाजिक भेद समाप्त नै भ’ रहल अछि जे पिछड़ापनमे सहायक अछि।”

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— अखिलेश कुमार मिश्र। 

सभ सँ पहिले संदर्भित विषय में ” मिथिलाक स्थिति यथावत” के अर्थ स्पष्ट कs दी। कियैक तs कुनो चीजक स्थिति यथावत नै रहि सकैत अछि। समयानुसार इ सदिखन बदलैत रहैत अछि। “एतय मिथिलाक स्थिति यथावत” सँ तात्पर्य भेल जे मिथिला किछु समय पहिलो (मुगल अंग्रेजक आ स्वतंत्रताक बादक समय में) सेहो पिछड़ल छल आ एखनो पिछड़ल अछि, तकर की कारण जेखन कि मैथिल जतय कतौ छैथि से बहुत सक्षम छैथि।
हम एतय कsह चाहब जे शिक्षित आ सबल मैथिल के छैथि जे मिथिला में रहैत छैथि। एहेन मैथिलक संख्या बड़ कम अछि। जे शिक्षित आ सबल छैथि से मिथिला सँ पलायन कs चुकल छैथि आ घुरि कs गामक रास्ता नै आबैत छैथि। यदि कहियो कुनो कारणवश एबो करैत छैथि तs अपना में लागल रहैत छैथि। पावनि-तिहार में थोड़ बहुत गामक समाजक लोक सभ सँ भेंट घाट करैत छैथि।
ओना मिथिलाक पिछड़ापन के बहुत रास कारण अछि ताहि में सभ सँ पैघ समस्या मैथिलक पलायन अछि। एहि पलायन के पाछाँ सेहो कारण अछि।
मिथिला क्षेत्र सं पलायन के कारण: आबादी के हिस्सा के पलायन के कारण मुख्य तया 1. सामाजिक असुरक्षा के भावना, 2. जिबिकोपार्जन, 3. रह के मूल भुत सुबिधा अर्थात भौगौलिक परिवेश. इत्यादि। लेकिन मिथिला क्षेत्र सं पलायन के मुख्य कारण अछि अपर्याप्त जिबिकोपार्जन। कतौ के जिबिकोपार्जन के सुबिधा मुख्य तया ओतुका कृषि उद्योग, कुटीर उद्योग, लघु उद्योग अथवा उद्योग (कल-कारखाना) पर निर्भर करैत अछि. भारत के स्वतंत्रता के बाद जनसँख्या विस्फोट के चलते आबादी बढ़ला सं प्रत्येक मनुष्य पर पड़ बाला कृषि योग्य भूमि घटि गेल। कुटीर उद्योग, लघु उद्योग अथवा उद्योग (कल-कारखाना) के अहि क्षेत्र में कुनो विकास नै भेल। जे कृषि योग्य भूमि अछि लगभग तीन महिना जलमग्न रहैत अछि। फलस्वरूप आदमी के कुनो रोजगार नै हेबाक कारण भुखमरी तक के स्थिति पहुँच गेल छल. बिहारक मुख्य मंत्री श्रीकर्पूरी ठाकुर, श्री जगन्नाथ मिश्र, श्री लालू प्रसाद आ श्रीमती राबड़ी देवी तक मिथिलांचल क्षेत्र के अवनति ही देखल. एखनो इ क्षेत्र राजनैतिक उपेक्षा के शिकार अछि। फलस्वरूप आबादी के पलायन त निश्चिते। हमहू ओकरे शिकार छी। ओतेक नीक संसथान सं इंजीनियरिंग के डिग्री लेलाक बादो बिहार में कुनो रोजगार नै भेटक कारण ही गाम छोड़ पडल.
पलायन रोकबाक लेल उपाय: पलायन के मुख्य कारण अछि समुचित जिबिकोपार्जन के अभाव। तहन त जिबिकोपार्जन के व्यवस्था केनाइ ही इलाज अछि एक्कर. ताहि लेल कृषि उद्योग, कुटीर उद्योग, लघु उद्योग अथवा उद्योग (कल-कारखाना) के विकास भेनाई जरुरी अछि। दुनिया के सभ सं नीक भूमि आ जल सं परिपूर्ण क्षेत्र में सिर्फ आ सिर्फ पानी-बाढ़ी के ठीक सं व्यवस्था क देल जाय त धरती स्वर्ग। पंजाब सनक बालु सं पूर्ण क्षेत्र सिर्फ पानि के नीक व्यबस्था के चलते पूरा देश के भोजन करा देत अछि, मुदा मिथिला ओहिना रहि गेल। बिहारक आधा जीडीपी के हिस्सा खेलाक बाद भी कोशी प्रोजेक्ट ओहिना के ओहिना अछि. मात्र इ प्रोजेक्ट नीक सं पूरा भेला सं आधा विकास सम्भव छल. क्षेत्र में कृषि उद्योग, कुटीर उद्योग, लघु उद्योग अथवा अन्य उद्योग के बढ़ाबा देला सं समुचित विकास सम्भव। इ त कहि सकै छी जे बिजली आ सडक के स्थिति नीक भेल अछि मुदा कानून व्यवस्था के स्थति बिल्कुल बढ़िया नै। कुनो तरहक उद्योग (कल-कारखाना) आदि स्थापित कर के लेल सुरक्षा अनिवार्य, अहि में आभाव के चलते ही इ क्षेत्र अहि सं बंचित अछि।
मैथिलक पलायन के बाद दोसर मुख्य कारण अछि राजनैतिक उपेक्षा: एतुका मुख्य आबादी बहुत पिछड़ल अछि आ राजनैतिक रूप सँ सुतल सेहो। जखने मिथिला मैथिलीक विकास वा कुनो अन्य बात होइत अछि तs इ काज उच्च वर्गक (जातिक) अछि, से बुइझ सभ अपना कें अलग थलग केने रहैत छैथि। कहक तात्पर्य इ भेल जे सामाजिक भेद के कारण राजनेता सभ सिर्फ अपन गोटी सेंकय के काज केलैथ। सामाजिक भेदो के कारण इ अछि जे मातृभाषा मैथिली कें इ उच्च वर्ग अपन निजी बुझलैथ ताहि कारण सँ भेद बहुत बढि गेल। कियो निम्न वर्ग सँ मैथिली भाषा लेल आगाँ आबs नै चाहैत छैथि कियैक तs हुनकर बोली कें मैथिलीक साहित्यकार सभ कुनो स्थान नै देलखिन्ह। मिथिला-मैथिलीक विकास सुनिश्चित करै लेल मुख्य आबादी कें एहि सँ जोड़नाइ अनिवार्य अछि।
तेसर मुख्य कारण अछि हीनताक बोध: मैथिलक मुख्य आबादी सदियों सँ दमनक शिकार रहल। इ अपना आप में तेना अंदर तक समाहित भs चुकल अछि जे लोक मैथिली बाजै सँ अपना के हीन बुझैत छैथि। यदि हीनताक बोधक सङ्ग कुनो काज करब तs उछित परिणाम नै भेंटत। तs अपना कें आ मैथिली कें हीन नै बुइझ सक्षम बुइझ काज कsर पड़त।
चारिम कारण, सामाजिक भेद: एखनो मिथिला क्षेत्र में बहुत हद तक छोटका बड़का शब्दक प्रयोग होइत अछि जाहि सँ सामाजिक भेद समाप्त नै भs रहल अछि जे पिछड़ापन में सहायक अछि।