“शिक्षित आ सबल मैथिल सभक मिथिलाक स्थिति यथावत बनल रहबाक कारण “-

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— आभा झा।   

 

मिथिला माता सीताक भूमि अछि। संस्कारक भूमि अछि।एतय प्रबुद्ध आ शिक्षित लोकक कमी नहिंअछि, जे अपन वाक्चातुर्यसँ ककरो छद्म बौद्धिकताक दर्प चूर-चूर कऽ सकैत अछि। चाहे ओ गोनू झा होइथ या मंडन मिश्र आ हुनकर पत्नी भारती जिनकासँ आदि शंकराचार्यक संग भेल शास्त्रार्थ, जाहिमे शंकराचार्यकेँ हारि मानय पड़लनि। मिथिलाक लोक अपन देश ही नहिं विदेशोमे अपन टैलेंटक जलवा बिखेर रहल छथि। हर क्षेत्रमे मैथिल आगू छथि। बिहारमे मिथिलांचल सर्वाधिक पिछड़ा इलाका अछि। मिथिलामे राज दरभंगा द्वारा स्थापित सभटा उद्योग मृत्य प्राय अछि। एकहुटा उद्योग चाहे पेपर मिल हो, चाहे शुगर मिल हो, चाहे जुट मिल हो सभटा बंद अछि। जाहि कारण मिथिलांचलमे सर्वाधिक बेरोजगारी अछि आ बेरोजगारीक कारण लोकक पलायन भऽ रहल अछि। देशक विकासमे सभ स्तर पर मिथिलाक लोक कार्यरत अछि, तइयो मिथिलाक स्थिति यथावत अछि। मिथिलाक लोक देश-विदेश सभ जगह अपन परचम लहरा रहल छथि। मुदा शिक्षित आ सबल होइतो कतेक लोक अपन मिथिलाक लेल सोचैत आ किछु करैत छथि। एहेन मैथिलक संख्या बड़ कम अछि जे अपन मिथिलाक विकासक लेल आगू आबि रहल छथि। अपन मिथिलाक पिछड़ापनक बहुत कारण अछि ताहिमे सभसँ पैघ समस्या पलायन अछि।
जनसंख्या विस्फोटक चलते आबादी बढ़लासँ जलवायु प्रभावित होइत अछि। बढ़ैत जनसंख्याक कारण साधन पर दबाव बनैत जा रहल अछि। फलतः एतऽ आर्थिक बदहाली दृष्टिगत होइत अछि। मिथिलासँ पलायनक मुख्य कारण अपर्याप्त जीविकोपार्जन अछि। लघु उद्योग, कृषि उद्योग, कुटीर उद्योग पर एहिठामक जीविकोपार्जन निर्भर करैत अछि। एहि उद्योग सभक मिथिलामे कहियो कोनो विकास नहिं भेल। मिथिलाक अर्थव्यवस्थाक मुख्य आधार कृषि अछि। परंतु जनसंख्याक अनुपातमे कृषि व्यवस्था बड़ पिछड़ल अछि। मिथिलाक आर्थिक पिछड़ापनमे प्राकृतिक आपदाक बड़ योगदान रहल अछि। विनाशकारी बाढ़ि प्रत्येक वर्ष भारी मात्रामे धन आ जनकेँ अपन चपेटमे लऽ लैत अछि।बाढ़िक बाद उत्पन्न सूखाकेँ समस्या संपूर्ण मिथिलाकेँ अपन चपेटमे लऽ लैत अछि। अपन भिथिला राजनीतिक षडयंत्रक शिकार अछि। चाहे कोनो मंत्री या नेता होइथ ओ अपन मिथिलाक स्थितिकेँ सुधारयकेँ प्रयत्न बिल्कुल नहिं करैत छथि। ओ सभ खाली करोड़ों-करोड़ अपने खा जाइत छथि जेकर कारण अपन मिथिलाक विकास असंभव अछि। लोकेँ रोजगारक सुविधा अगर अपन मिथिलामे उपलब्ध हैत तखन लोक कियैक अपन मिथिलाकेँ छोड़ि पलायन करत। पलायन रूकत तखने मिथिलाक विकास संभव अछि। जीविकोपार्जन केँ इंतजाम केनाइ एहि पलायनकेँ रोकय लेल अति आवश्यक अछि। आर्थिक पिछड़ापनकेँ दूर करयकेँ लेल सरकारक स्थायित्व, उद्योगक विकास, जनसंख्या नियंत्रण, राज्य-केंद्रक बीच एक समन्वय स्थापित केनाइ। मिथिलाक लोकमे एकजुटताक अभाव अछि। के बीस आ के उनीस ई कहनाइ मुश्किल अछि। खाली एक-दोसर पर दोषारोपण केनाइ अपन मिथिलाक लोकक प्रवृत्ति अछि। मिथिलाक स्थितिमे तखने सुधार होयत जखन मैथिल सभ अपना आपके मैथिल कहयमे गर्व महसूस करता।
जय मिथिला जय मैथिली।

आभा झा
गाजियाबाद