“मिथिलाक समाज एखनहुॅं अपन शिक्षा आ सबलतासॅं देश-विदेशमे डंका बजा रहल अछि मुदा..”

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— झा पंकज। 

शिक्षित आ सबल मैथिल के ” शिथिला मिथिला ” या ” अबला मिथिला ” हमरा विचार स ऐ चर्चा के आरंभ हम सब अतै स करी.. कौनो समाज के शक्ति प्रदान करै छे ओई समाज के लोक, चाहे ओ शिक्षा स हो, सबलता स हो, या संस्कृति आ संस्कार स. हम मैथिल सब शिक्षित , कुशाग्र, सबल हमेशा स रहल छि.. आदि काल स हमर सभक् पहचान ओई जनक स छि आ ओई मिथि स छि जे अतेक सबल छलाह जे समाज के भलाई लेल् अपन काज स समाज लेल् उदाहरण देलाह.. चाहे ओ शरीर के मिथि के रूप मे या हल चलाव लेल्.. जेकर उपरांत सीता के प्रकट आ अकाल स मुक्ति भेल छल.. ई किस्सा सब त हम सब बचपन स सुनेत् आबि रहल छि.. आ हम सब ओई वरदान स अछूता नै छि.

मिथिला के समाज एखनो अपन शिक्षा आ सबलता स देश विदेश मे डंका बजा रहल छि.. लेकिन मिथिला कियेक नै सबल भेल जैखेन अतुका संतान अतेक योग्य छि त.. एकर मूल मे जाय त हमरा पुरान् पीढी आ नव पीढी के बीच आयल बदलाव पर बात केनाइ उचित बुझाइया.

१.हमर सब के दादा बाबा के पीढी तक हमर सबके परिवार संयुक्त रहेक जै मे आपसी सहयोग के भावना बसल रहे और ओई स कौनो परिस्थिति मे परिवार टुटब् के व्यवस्था नै रहेक जे घर के गार्डियन के विचार रहे ओई मे सब के विचार मिले रहेक. और शिक्षा आ संस्कार परिवार और समाज के लेल् पल्लवित होएक.. और ओई वज़ह स अभाव रहितो परिवार आ समाज स व्यक्ति दूर होब् के कोशिश नै करे.. व्यक्तिगत हित स पहिने परिवार आ समाज के बारे मे सोचेत छलेक्.. आ समाज आ परिवार से हो ओई व्यक्ति पर कौनो संकट नै आब दैत् छलेक्.. बहुत उदाहरण भेटत.. बच्चा के जन्म स ल क उत्सव संस्कार विवाह आ मृत्यु तक. त जैखेन परिवार आ समाज नै छूटत त पलायन कत..

२.पलायन भेल कियेक.. आपसी सहयोग खत्म भेला के और परिवार टुटला के वज़ह स जैखेन हम अपन डफली अपन राग गायब त फेर समाज परिवार आ व्यक्ति के बीच अहंकार पनप ओई सामाजिक व्यवस्था मे रोजगार के आ परिश्रम कर के बीच खाई पैदा क दैत् छे आ फेर व्यक्ति अपन शिक्षा आ सबलता के ल क पलायन क जायत छेक अपन समाज आ जन्म स्थान छोरी क.. त ओ समाज या कहु मिथिला सबल केना हायत.

३. पलायन के बाद के स्थिति

जे कियो सबल आ शिक्षित मैथिल पलायन क गेलाह हुन्का नया देश विदेश मे सामंजस्य बेसब् मे अपन शिक्षा आ सबलता के ऊर्जा लगब् पड़े छैन त अपना समाज आ मिथिला लेल् ऊर्जा खत्म और ऊर्जा नै त मिथिला के उद्योग आ रोजगार लेल् शिक्षित आ सबल मैथिल के भूमिका हाशिया पर ..

४. मैथिली संस्कृति आ धरोहर के अपनाव मे पलायन पीढी के बाद के पीढी के संकोच

समाज आ गाम स दूर जन्मल पीढी सने दिक्कत ई आबि गेल छि जे जै बाहरी समाज मे वो पीढी विकसित भेल ओ बाहरी समाज के वो अप्पन समाज मनै छे.. घर मे मैथिली छोरी आन भाषा के प्रयोग, बाहरी समाज के मैथिली समाज स उत्तम घोषित केनाइ.. ई अखुनक पीढी मे स्वयंभू विकसित भ रहल छे और ओई मोह माया मे पलायन पीढी मिथिला के त्याग पर तुल गेल छेक..संतान मोह मे… न माया मिली न मिसाले सनम..

आरो बहुत रास स्तिथि छे जे योग्य मिथिला संतान के होयतो जन्मभूमि मिथिला के सबला नै बना अबला बनेने अछि.. राजनीतिक स्वार्थ, व्यक्तिगत अहंकार, अंतर्मुखी.. लेकिन मूल मे ऊपर देल गेल कारण छि, यदि वो सब ठीक भ जा त मिथिला के सबल हो व मे दिन दूर नै छि.. कियेक हम सब जखने आपसी द्वंद के पीछा छोरब, त राजनीति, परिस्थिति आ स्वार्थ सब स दूरी बना लेब..

सोच अपना सब के छि… घर लोटी क आव वाला पीढी के सबल मिथिला देव के छि.. की कौनो आर मिथिला