“जानकी नवमीक उल्लासक सापेक्ष समाज मे नारीक स्थान ।”

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— उग्रनाथ झा।       

शास्त्रोक्त मतानुसार जनक नंदनी जानकीक प्रकटोत्सव बैशाख शुक्ल नवमी के मनाओल जाएत छैक । जाहि संबंध में वर्णित छैक जे राजा जनक के द्वारा अपना प्रजाकेँ सुखाड़ सं मुक्ति दिएबाक निमित्त यज्ञ कैल आ यज्ञोपरांत यज्ञ भूमि के जोतबाक छलन्हि। फलत: ओहि भुमि के जोतबाक क्रम में भूगर्भ सं जानकी प्रकट भेल छली। फलत: हर’क अग्र भाग जे सीत कहल जाए छैक कें पहिल स्पर्श कारणे सीता नामे जानल गेलीह।
जानकीक प्राकट्य तिथि आ रामक अवतरण तिथि दूनू नवमी छैक जे राम सीता के फराक फराक परिस्थिती रहितो सदति त्याग , समर्पण विश्वास में एकरूपताक बाट देखाबय छै जेना संपूर्ण अंकगणित पद्धति में 9 एहन अंक जेकरा कोनो परिस्थिती में गुणन करबै मुदा गुणफल के अंक जोड़बै त हाथ वैह 9 आएत। परिस्थिती केहनो हो मुदा ओ अपन स्वरूप आ प्रकृति सं बदलैत नहि छैक। सीता आ राम के बीच अटुट प्रेम , त्याग , तपस्या , समर्पण छलन्हि जे सद्ति नीज मर्यादाक पालनक बाट प्रशस्त करैत छल । जानकी अपन एहि लीला के माध्यमे नारी जीवनक आदर्श स्वरुप के प्रदर्शित करैत समाज में स्त्री पुरूष के मर्यादाक शिक्षा प्रदान केलीह ।एक राजा के महल सं पोसल -पालल , एक चक्रवर्ती राजवंशक पुतोहु रहितहुं हर परिस्थिती में नारित्वक गुण समेटने रहली । जाहि मे माय बाप , सास ससुर , दिअर, दियादनी, पति , सेवक , प्रजा सभक प्रति नारीक कर्तव्य आ धर्मपरायणताक अक्षुण्ण पाठ पढ़ा गेलीह । जे नारी आदर्शक परिचायक छलीह। सौभाग्य जे ओ एहि मिथिला भूमि के बेटी छलीह । ताहि हेतु नारी आदर्शक प्रतिमूर्ती जानकी सतत हमर समाज में नारित्वक बहुमुखी प्रकाशक प्रेरणा स्रोत बनल रहथी ताहि लेल जानकी नवमी के अवसर पर उत्सव होएबाक चाहि बल्की घर घर में आवश्यक घोषित करबाक चाहि । जाहि सं हमरा लोकनि के समाज में नारी के सम अथवा विषम परिस्थितियों यथायोग्य आदर्श मर्यादा पालन करबाक चेतना जगाबय ।
वर्तमान समाज में स्त्री हो वा पुरूष अपन भौतिकवादी महत्वाकांक्षा आ एकोहम के चक्कर में विसंगतिक बयार बहल छैक । हमरा लोकनि आजादी क बाद ही सं समाज में नारीक स्थिती सुधारबाक संवैधानिक रुप स प्रयास क रहल छी मुदा ओ चेतना जागृत नहि भ पाबि रहल छैक । फलत: कतौ नारि प्रताड़ित होइत छथि त कतौ पुरूष । किएक त ओ त्याग तपस्या समर्पणक बीजांकुरण हृदय में हो ओहि लेल जे खाद पानि भेटबाक चाहि ओ समाज सं विलुप्त भेल जा रहल छैक । भावनात्मक लगाव के सारा पर सौहार्दता नहि पनगी सकैत छैक । सौहार्दताक अभाव घरैया हिंसा , अलगाववादी सोच के जननी छैक । जेकर कारण हमरा सभ नीज त्याग समर्पण के नहि देख दोसरा सं अगवे त्याग समर्पण के आश करै छि त गाड़ी पटरी पर नहीं चलत।
ताहि हेतु हमरा सभक परम कर्तव्य जे जगत जननी जानकीक आ श्री रामक देखाओल पथ के अनुशरण करैत घर परिवार समाज के प्रति अपन कर्तव्य निमाह करैत आदर्श स्थापित करबाक प्रेरणा ग्रहण करबाक वास्ते जानकी नवमी आवश्यक छैक ।