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“पारिवारिक जीवनपर सोशल मीडियाक प्रभाव।”

155 भ्यूज

— उग्रनाथ झा।     

मैथिलीक सुप्रसिद्ध गायकक गीत
दांत खा गेल तमाकू स्वाद पीब गेल चाह ।
कनि दिया ने नून मिर्चाई ,ने तीमन सुअदगर ।
इएह हाल आई सोशल मिडियाक प्रभाव सं पारिवारिक जीवनक स्नेह , समर्पण बेसुआद भेल जा रहल छैक । परिवारमे एक चार’क नीचा बास केनिहार के एक दोसराक संग पड़ोसी सदृश व्यवहार भेल जा रहल छै । ई कहबा में संकोच नहि जे शोसल मिडिया लोक’क बीच दूरी के पाटी’ देलक मुदा ई लगीचता खालीपन सँ भरल छैक । एहि जुड़ाव में ने ओ उत्साह आ प्रेम भेटै छै । बस हाथिक दांत बला नजदीकी रहि गेल छैक ।पारिवारिक माहौल खालीपन सं भरल छैक । सभ अपना अपना में व्यस्त रहैत छैक । पहिलका समय में चाहे कतबो व्यस्तता रहैत छल त पारिवारिक सदस्य आपस में चाह ,नाश्ता , भोजन ईत्यादी कृत्य काल आपस में बैसी सभ तरहक चर्चा परिचर्चा हास्य विनोद करै छलाह । जे एक दोसरा के व्यवहार , स्वभाव आ हृदयस्थ आत्मियता के जोड़ के मजगूत करैतिछल। परंच ई शोसल मिडिया के आगमन जेना जेना अपन भिन्न मायावी रूप अपनौलक व्यक्ति सं व्यक्ति दूर होईत गेल । आदमी ई हिस्सक बना लेलक अछि । वर्तमान में जौ मात्र किछु काल’क लेल शोसल साईट रूकी जाए त जल बिनू , बसात बिनू जीवन सदृश बुझाए लगैत छैक । ई पारिवारिक सदस्यक बीच सौहार्दपूर्ण संबंध पर प्रतिकूल प्रभावक आबरण देने जा रहलै अछि । आई बढ़ैत शोशल साईट्स के प्रयोग सं सिर्फ परिवारे नहि बल्की सम्पूर्ण समष्टि प्रभावित भ रहल छैक ।एकर तीव्रगामी सुक्ष्म प्रवाह किछु पले भरि में लाखों लोक तक पहुंच जाए छैक। जाहि मे संवाद प्रेषण , गतिविधि प्रदर्शन शक्ति में बेसुमार वृद्धि भेल । जतय जरूरत मंद एकर सद्उपयोग सं लाभान्वित होएत छथि ,ओतहि खुरापाती ओतहि तीव्रता सं दुरूपयोग क घर परिवार आ समाज के खुरापात घूरझी लगाबैत छथि। ताहि हेतु शोसल मिडिया के एकदिशाह नजरि सं नहि देख सके छि। वैश्वीकरणक एहि दौर में ई आम जीवन लेल अत्यन्त महत्वपूर्ण छैक मुदा पारिवारिक जीवन में एकर उपयोगिता सीमित छैक । जदि परिवार में एकर उपयोगिताक स्थान बेसी उच्च होएत त निश्चय छैक जे ई एक दिन बिष व्यापित फल सदृश साबित होएत। जेकर आकर्षण घातक छैक।उदाहरण स्वरुप आधुनिक कामकाजी दौर में पुरूष आ स्त्रीगण दूनू कमौआ वा व्यस्ततम जीवन प्रक्रिया में उलझल रहैत छैथ । छोट परिवार सुखी परिवारक अनुशरण करैत छथि ।फलत: परिवार में बुढ़ बूजूर्ग वा बेगार बैसे बाला सदस्यक अभाव रहे छन्हि। जेकर परिणाम स्वरूप घरक छोट बच्चा सभ के थथमारबा लेल मोबाईल थमा दैत छथि । फलत बच्चा कार्टून रैम्स बगैरह चला क द दैत छथि। जाहि निश्चिंतता सं कार्य संपादित हो । जाहि कारणे बच्चा सभ शुरूआती सं एकर आदि भ जाए छैक ।जे आगु चलि भिन्न भिन्न तरहक शारिरिक , मानसिक, चारित्रिक समस्या सं ग्रस्त होएत छैक । किएक त नेनपन में ओकरा निक बेजाए के ज्ञान नहि रहैछ और नै शोसल साईट चलै बाला प्रोग्राम के बीच में अबै बला एड के कोनो बंधेज जे कोन प्रकारक एड वा विडियो शुरू होएत । जेकर फलाफल नेनपन सं बच्चा के मन मस्तिष्क में बिड़ि,सिगरेट,दारू वा बल्गर दृश्य आदि छाप बनैत जाएत छैक जे समयक संग मानसिक विकृतिक जन्म दैत छैक । जाहि कारणे समाज में कम उम्र के बच्चा में नशेरी, खुरापाती, प्रेम प्रसंग , दैहिक आकर्षण, आत्महत्या , गुंडागर्दी साईबर क्राईम के प्रति रूक्षान देखबा में अबै छै । आई शिक्षाक माध्यम सेहो आनलाईन भेला स बच्चाके शोसल साइट व्यवहारक बुझू लाइसेंसे भेटी जाए छैक । फलत: पठन पाठनक अलावे बच्चा ओहि मे रूचि ल अन्य उपयोग करैत छैक । जे परिवारिक जीवन बाल बच्चा लेल नैतिक चारित्रिक निर्माण स्थल छल ओ आई सोशल मीडियाक स्थान लेल पतन के कारण बनि रहल छैक।
सोशल मीडिया फ्रेंडली होएबाक कारणे बच्चा सभ भौतिक खेल के छोड़ी रहल अछि जाहि कारणे शारिरिक विकास बाधित भ रहल छैक।
एतबहि नहि एकर दुष्प्रभाव सं पारिवारिक पैघ सदस्य बांचल नहि छथि यथा पति पत्नीक आत्मिय संबंध सेहो बदरंग भ रहल छैक । समाज में बहुधा घटना देखबा में आओत जे शोसल मिडियाक कारणे आपसी सुझबुझ के दरकिनार क संबंध में दरारि पड़ि जाए छन्हि। जे पति पत्नीक बीच हास्य विनोद के क्षण होईत छल सेहो आब शोसल मिडियाक माध्यमे हंसी लैत छथि ।किएक त आपसी सम्पर्क के बीच शोसल मिडिया रहला सं सभ अपन मनोनुकूल चैनल , वा कलाकार के बालों करै छथि जे कखनहुं दूनू के मन मस्तिष्क में एकरूपता नहीं आबय दैत छन्हि ।
सभ मिला क निचोड़ रूपे जौ कहल जाए त निर्विवाद छै जे पारिवारिक जीवन में सोशल मीडिया सूर्पनखाक रूप बनि आयल छैक जे अपन पूर्ण प्रभाव स ग्रसित क परिवार में विकृति आ अमानवीयता के पैसार केने जा रहलै अछि। हं एहनो छैक जे शोशल मिडिया सीमित क्षेत्र में पारिवारिक जीवन में जरूरी छैक तै ओहि सीमित तक समेटी राखी त ठिके छैक। अक्सर देखबा में अबैत छैक जे दूर रहनिहार वृद्ध माता पिताक हाल चाल आ साक्षात दर्शन लेल साल भरि छ महिना पर गाम घर अबैत छलाह परंतु शोसल मिडियाक विडियो कालिंग एहुं झंझट फारकति द देलकन्हि। फोनों पर प्रणाम पांति आ दर्शन भ गेल बस जय श्री राधे । सालक साल बीत जाए छैक ।जे आत्मिय प्रगाढ़ता के भक्षक साबित भ रहल छैक । ताहि हेतु पारिवारिक जीवन में सोशल मीडिया सं जतेक संभव हो दूरहि रहि आ पारिवारिक सदस्य के दूर राखि । हां व्यक्तिगत जीवन , व्यवसायिक जीवन वा आर्थिक समाजिक उपयोगिता के ल जौ आवश्यक हो त जरूर उपयोग करी । किएक त आधुनिक डिजिटल दुनिया में एकर बिना स्थापित भेनाए मुश्किल नहीं बल्कि असंभव छैक ।

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