होरीक अवसरपर मिनापद्वारा जनकपुरमेँ दु दिवसीय कार्यक्रम होयत

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जनकपुरधाम, 4मार्च2023, मैथिली जिन्दावाद ।। होरी पावनिके अवसरपर मिथिला नाट्यकला परिषद् (मिनाप)  जनकपुरधाममें प्रत्येक वर्ष आयोजना करैत आएल दु दिवसीय होरी महोत्सव आ महामुर्ख सम्मेलन अहु वर्ष सेहो भव्यतापूर्वक मनायबक निर्णय कायल गेल अछि।

मिनाप अहिवर्षक होरी महोत्सव फागुन २२ गते सोमदिन आ महामुर्ख सम्मेलन २३ गते मंगलदिन जानकी मन्दिरक प्राङ्गणमें मनयबाक निर्णय भेल मिनापक महासचिव शैलेन्द्र मल्लिक जानकारी देलैन्ह।

ओ पहिल दिन सोमदिन डम्फा वादन आ उद्घाटन, होरीपर विशेष चर्चा परिचर्चा, हास्य कवि गोष्ठी, निश्चित मापदण्ड अनुसार होरी गायन, उत्कृष्टाक चयनसँगहि पुरस्कार वितरण करबाक जानकारी देलैन्हि ।

ताहिना, दोसर दिन (मंगल दिन) विशिष्ट शैलीमें उद्घाटन, होरी गायन, मिनापक हास्य शैलीक व्यंग्यपूर्ण नाट्य प्रस्तुती, मूर्ख एवं महामूर्खक उपाधि वितरणक साथे मूर्ख आ महामूर्खसभक सम्मान तथा प्रमोपहार वितरण करबाक लगायतक कार्यक्रम रहल महासचिव मल्लिक बतोलैन्ह ।

वि.सं. २०६१ साल सऽ जनकपुरधामें महामूर्ख सम्मेलनक आरम्भ काएल गेल छल ।

२०६१ सालमेँ महामूर्खको उपाधी मैथिली कवि नरेश ठाकुर, २०६२ मेँ तत्कालीन नेकपा एमालेक नेता शीतल झा, २०६३मेँ तत्कालीन जनकपुर नगरपालिकाक मेयर हरिबहादुर बिसी, २०६४ में तत्कालीन सदभावना पार्टीक नेता ओमकुमार झा, २०६५ मेँ वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.राजेन्द्र विमल, २०६६ मेँ पूर्वमन्त्री रामचन्द्र झा, २०६७ मेँ नेपालक चर्चित राजनीतिक विश्लेषक सिके लाल, २०६८ मेँ साहित्यकार रामभरोष कापड़ि “भ्रमर”, २०६९ मेँ नेपाली काँग्रेसक नेता रामसरोज यादव, २०७० मेँ तमलोपाक वरिष्ठ नेता डॉ. विजयकुमार सिंह, २०७१ में नेता शत्रुधन महतो, २०७२ में समसानघाटकेँ स्वरुप परिवर्तन कऽ आधुनिक स्वर्गद्वार बना क’ चर्चा में रहल पवन सिंघानीयकेँ महामुर्खक उपाधी देल गेल छल।

ताहिना २०७३ सालमें सप्तरीक मलेठमें नेकपा एमाले कएने  मेची महाकाली अभियानक क्रममें पुलिसक गोली लागि कऽ ५गोटेकऽ मृत्यु भेला कारणे अन्तिम समयमें आबि मिनाप अपन कार्यक्रम स्थगित कएने छल।

२०७४मेँ महामुर्खक उपाधी तमलोपाका अध्यक्ष वृषेशचन्द्र लाल, २०७५ मेँ जसपाक नेता लालकिशोर साहकेँ देल गेल छल।

तहिना २०७६ सालमें मधेस प्रदेशक पूर्वमुख्यमन्त्री लालबाबु राउत, २०७७ सालमेँ महजोडी मदन कृष्ण श्रेष्ठ आ हरिवंश आचार्य एवम् २०७८ सालमा अर्थविद डॉ. भोगेन्द्र झाकेँ महामुर्खक उपाधि देल गेल छल।‌‌‌‌‍‍‍‍‌‍‍‍