“आस्था आ आडंबरक बीच औनाइत आमजन केर मोन।”

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— मीना मिश्रा।         

सबसं पहिले त ई बुझब आवश्यक की आस्था की थिक और आडंबर की थिक।आस्था एकटा एहन शब्द अछि जे बिभिन्न सुंदर शब्द संग मिलि सुंदर
भाव प्रकट करैत अछि।आस्था जखन भक्ति संग मिलि जाइत अछि आ ओहि मे विश्वासक नींब परैत अछि त मनुष्य मे सकारात्मकता, सामर्थ्य, शक्ति, उल्लास भरि दैत अछि आ मानव केहन-केहन कठिन काज क लैत अछि ,असम्भव के सम्भव बना दैत अछि।मनुष्य मंदिर मे जाइत अछि आ पाथरक मुर्तिक पूजा करैत अछि,माटिक देवी-देवताक निर्माण क हुनकर पूजा,आराधना करैत अछि,हुनका सं अपन सुख-दुख कहैत अछि।मनुष्यक अवचेतन मोन मे जे ईश्वरक एकटा रूप बसैत अछि ओकरा ओ एही रूपें अपन आंखिक समक्ष देखैक कोशिश करैत अछि।इएह त थिक मानव मात्र केर “आस्था”।और वेह मोन मे बसैत ईष्ट ,”हमरा हरदम संग देता”ई सोचब थिक विश्वास।आ जखन आस्था – विश्वास संग मिलि जाईत अछि त मनुष्य अपन कर्म नीक सं करैत अछि और अपन लक्ष्य के प्राप्त करैत अछि।भगवान के कियो साक्षात त नहि देखैत छनि मुदा
“ओ हमेशा सबतरि छथि” ई विश्वास थिक आस्था”
आस्था मनुष्य के ब्यवस्थित रखैत अछि,सकारात्मक रखैत अछि,संस्कार आ संस्कृति के वहन करैक मार्ग दैत अछि आ समाज सुव्यवस्थित रहैत अछि।आस्था कखनो मनुष्य के धर्म सं च्युत नै होअ दैत अछि।

जखन कोनो सांस्कृतिक रीति-रिवाज मे,पूजा अथवा धर्म-कर्म मे, मनुष्य जे अपन सामर्थ्यक प्रदर्शन करैत अछि ओ थिक “आडंबर”।और ई आडंबर कैक तरहक भ सकैत अछि।कखनो मनुष्य अपन शारीरीक शक्ति के कखनो धन-बैभव के कखनो अपन लोकशक्ति के प्रदर्शन कय अपन भक्ति देखबैत अछि,अपन रीति-रिवाज नीभबैत अछि जे कि मात्र आडंबर थिक।आडंबर निश्चित रूपें जन-मानस के बहुत प्रभावित करैत छै।जे आडंबर कोनो एक ब्यक्तिक लेल एकटा सामान्य बात रहैत छै वेह कोनो दोसरक लेल असंभव वस्तु होइत छै।कियाक त नहिये शारीरीक रूपे,नहिये धन -वैभव सं सब मनुष्य एक समान अछि और तें
बास्तव मे आडंबर मनुष्य के मोनके बहुत ब्यथित करैत छै।

समाज मे होई बला पूजा-पाठ मे तेज आवाज मे भक्ति गीत बजाएब(जे कखनो -कखनोअश्लील गीतक रूप मे सेहो परिवर्तित भ जाईत अछि)कनेक देरक लेल मोन के आनंद अवश्य दैत छै मुदा बूढ,बीमार, और विद्यार्थीक लेल कष्टक कारण बनि जाइत छै।तहिना बिभिन्न पूजा मे सजावट के लेल जबरदस्ती चंदा वसूली कयल जाईत अछि।जे सामर्थ्यवान छथि हुनका लेल त नै कोनो बात मुदा बहुत गोटेक लेल ई भरि महिनाक बजट मे अनियमितता आनि दैत अछि।त एहन आडंबर निश्चित आम आदमी के औनाबैत अछि।
दान करब ,गरीब के मदद करब सराहनीय कार्य थिक लेकिन एकर प्रदर्शन आडंबर भेल।

भगवान के पूजा भक्ति मानवक आस्थाथिक मुदा एकरा लेल सबहक सामर्थ्य एक रंग नै रहैत अछि।
और एकर एकटा सुव्यवस्थित रूप समाज मे आवश्यक अछि🙏🙏

मीना मिश्रा “मुक्ता”
पटना, बिहार।