“आजादीक लड़ाईमे महिला सभ ने सिर्फ अँग्रेजसँ जमि क’ लोहा लेलनि बल्कि क्रांतिक जे आगि लगेलखिन ओहिसँ घबरा क’ अँग्रेज अपन डेग पाछू हटेलक”

72

— आभा झा।       

स्वतंत्रता संग्राममे नारी शक्तिकेँ भूमिका – स्वतंत्रता आंदोलनमे नारीक भूमिका सराहनीय अछि। महिला सभ आंदोलनमे आगू बढ़ि-चढ़ि कऽ कन्हा सँ कन्हा मिला कऽ पुरूषक संग देलखिन आ शक्तिस्वरूपा बनि कऽ महत्वपूर्ण कार्य करैत अपन शहादत देलनि। आजादीक लड़ाईमे महिला सभ ने सिर्फ अँग्रेज सँ जमि कऽ लोहा लेलनि बल्कि क्रांतिक जे आगि लगेलखिन ओहि सँ घबरा कऽ अँग्रेज अपन डेग पाछू हटेलक। आदिकाल सँ ही नारी शक्तिक प्रतिष्ठाक वर्णन रहल जखन असुरकेँ नष्ट करयकेँ लेल दैवी शक्तिक आश्रय लेल गेल। गाँधी जी कहने छलखिन कि हमर माय-बहिनक बिना ई संघर्ष संभव नहिं छल। जे सब महिला आजादीक लड़ाईमे अपन साहस सँ धार देलनि, हुनकर जिक्र जरूरी अछि – कस्तूरबा गाँधी, विजयलक्ष्मी पंडित, अरूणा आसफ अली, सरोजिनी नायडू, सिस्टर निवेदिता, मीरा बेन, कमला नेहरू, मैडम भीकाजी कामा, सुचेता कृपलानी, रानी लक्ष्मीबाई, कनकलता बरूआ। 1857 के विद्रोहमे जतय वीरांगना रानी लक्ष्मीबाईकेँ अद्भुत शौर्यपूर्ण योगदान रहलनि, ओतहि बेगम हजरत महलक साहसिक एवं उल्लेखनीय उदाहरण छलनि। जाहि तरहें आजादीक जंगमे स्त्री आ पुरूषक योगदानमे समानता रहल, ओहि तरहें ई संग्राम कोनो धर्म, जाति या वर्णमे सीमित नहिं छल। जहाँ तक स्त्री सभक सवाल छल, तऽ ओहिमे रानी,बेगम, वीरांगना आदि सँ लऽ कऽ तवायफ, बाँदी सब सम्मिलित छलीह जे की अमीर-गरीब, शिक्षित-अशिक्षित एवं सवर्ण-दलित सभ श्रेणीमे व्याप्त छलीह। रानी लक्ष्मीबाई आ रानी चेनम्मा जेहेन वीरांगना अँग्रेज सँ लड़ैत-लड़ैत अपन जान दऽ देलीह। सरोजिनी नायडू आ लक्ष्मी सहगल जेहेन वीरांगना देशक आजादीक बादो सेवा केलनि।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राममे महाराजगंजक शहीद फुलेना बाबू आ तारा देवीक त्याग आ बलिदान अविस्मरणीय अछि। एक एहेन महिला स्वतंत्रता सेनानी जे विवाहक पहिल रातिमे पतिकेँ संग प्रण केलनि कि देश आजाद भेला पर ही बच्चाकेँ जन्म देती।ताबे तक ओ कुमारि बनि कऽ रहती। 1942 में जखन महात्मा गाँधी भारत छोड़ो आंदोलनक घोषणा कयने छलाह, ओहि समय सिवानक महाराजगंजमे एहि आंदोलनक नेतृत्व यैह दंपत्ति सम्हारने छलखिन। आजादी भेटला पर हिनकर प्रण पूरा होइतेन।दाम्पत्य जीवनक गाड़ी आगू बढ़तैन, एहि सँ पहिने नियतिकेँ किछ और मंजूर छलनि। 16 अगस्त 1942 कऽ महाराजगंज थाना पर तिरंगा फहराबैकेँ दौरान अँग्रेजी हुकूमत गोली सँ फुलेना बाबू शहीद भऽ गेलाह। तखन तारा देवी अपन पतिक शवक संग पूरा राति असगरे बितौलनि। सन् 1917 ईमे बिहारमे महात्मा गाँधीक पदार्पणक संग ही आंदोलनमे नारीक भूमिका बढ़ि गेल। 1919 तक कस्तुरबा गाँधी, श्रीमती सरला देवी, प्रभावती जी, राजवंशी देवी, सुनीता देवी, राधिका देवी और वीरांगना महिलाक प्रेरणा सँ संपूर्ण बिहारक महिलामे आजादीक प्रति रूझान बढ़ि गेल। 1921ईमे देश बंधु कोषक लेल जखन गाँधी जी बिहारक भ्रमण केलनि तऽ एतयकेँ महिला सभ अपन आभूषण तक दानमे दऽ देलखिन। एहि कार्यमे महात्मा गाँधीक संग श्रीमती प्रभावती देवी( जयप्रकाश नारायणक पत्नी ) के महत्वपूर्ण योगदान छलनि। सन् 1921ईकेँ नमक आंदोलनमे बिहारक महिला सभ बड्ड जोश-खरोसक संग भाग लेलनि। 1941 में महात्मा गाँधी जखन संप्रदायक तत्वकेँ विरोध सत्याग्रह केलनि तऽ ओकर समर्थनमे बिहारक महिला सभ बढ़ि-चढ़ि कऽ हिस्सा लेलनि। वैशालीकेँ श्रीमती विंदा देवी, शहीद फुलेना बाबूक पत्नी तारा देवी, मुंगेरक संपत्तिया देवी, पटनाकेँ सुधा कुमारी शर्मा,मुजफ्फरपुरक भवानी मेहरोत्रा, भागलपुरक रामस्वरूप देवी आदि महिला सभ स्वतंत्रता संग्राममे अद्वितीय योगदान देलखिन। स्वतंत्रता संग्रामक गौरवशाली इतिहासक पन्नामे रानी सत्यवतीक संस्मरणक जिक्र प्रभावशाली अछि। एहि सतत संघर्षमे घर, परिवार, समाज आ स्वयंकेँ लड़ाई सँ सर्वोपरि एहि स्वाधीनता संग्रामकेँ अपन उद्देश्य बना कऽ अपन प्राणक आहुति देलनि, ई महिला सभ अविस्मरणीय एवं अद्भुत साहस देखेलनि। असंख्य महिलाकेँ स्वतंत्रता आंदोलनमे भाग लेबाक कारण ही आजादीक ई महान आंदोलन सक्रिय भेल। महिला सभ देशक प्रति प्रेम भावनाक परिचय दैत व ओकरा स्वतंत्र कराबैकेँ लेल सभ तरीका सँ अपन योगदान देलखिन। शांतिप्रिय आंदोलन सँ लऽ कऽ क्रांतिकारी आंदोलनमे महिलाक महत्वपूर्ण भूमिका रहल अछि। हिनका सभकेँ याद कऽ हम अपन माथ गर्व सँ ऊँच राखैत छी, हुनकर त्याग एवं बलिदानकेँ नमन करैत छी। जय मिथिला जय मैथिली।

आभा झा
गाजियाबाद