“बदलैत समाजमे महिलाकेँ भूमिका”

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— आभा झा।       

” बदलैत समाजमे महिलाकेँ भूमिका “- नारी! तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पगतल में। पीयुष स्रोत- सी बहा करो, जीवन के सुंदर समतल में। कविवर जयशंकर प्रसाद जीकेँ पंक्ति स्वस्थ समाजमे नारीकेँ भूमिकाकेँ अमृतक स्रोतकेँ सदृश सिद्ध करैत अछि। भारतक बहुविध समाजमे नारीकेँ विशिष्ट स्थान छैक। कहल जाइत अछि कि जतय नारीक पूजा होइत अछि, ओतय देवता रमण करैत छथि – यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः। स्वस्थ समाजक निर्माणमे महिलाकेँ भूमिका ओतबे महत्वपूर्ण अछि, जतेक शरीरमे रीढ़क हड्डीकेँ होइत अछि। महादेवी वर्मा कहने छथिन – ” नारी केवल एक नारी ही नहीं, अपितु ओ काव्य और प्रेमक प्रतिमूर्ति छथि। पुरूष विजयकेँ भूखल होइत अछि और नारी समर्पणक। वास्तवमे नारी पृथ्वीकेँ कल्पलताक समान छथि। ताहि दुवारे नारी- निन्दाक निषेध करैत कियो उचित कहने छथि –
नारी-निन्दा मत करो, नारी नर की खान।
नारी से नर होत है, ध्रुव-प्रह्लाद समान।।
स्वस्थ समाजमे नारीक भूमिका – समाजक निर्माणमे नारीक भूमिका उच्चकोटिकेँ अछि, जकर संक्षिप्त विवेचन एहि प्रकार अछि –
1: नारी समाजक जननी छथि – सृष्टिक सृजनमे नारीक महत्वपूर्ण स्थान छैक। देव सँ लऽ कऽ मानव तककेँ जन्मदात्री नारीये छथि। नारीक बिना समाजक कोनो अस्तित्व नहिं छैक।
2 : चरित्र – निर्मात्री – नारी मनुष्यकेँ केवल जन्म ही नहिं दैत छथि, हुनकर पालन-पोषण, संस्कार-दान और चरित्र निर्माणक दायित्व सेहो पूरा निष्ठा सँ निभबैत छथि। माताक रूपमे बच्चाकेँ प्रथम गुरू वैह होइत छथि। हुनके देल गेल संस्कारक बल पर सुदृढ़ चरित्रक निर्माण होइत छैक। आजुक बच्चा ही काल्हिकेँ नागरिक होयत, ताहि दुवारे बच्चाकेँ संस्कार दऽ कऽ और हुनकर चरित्र गढ़ि कऽ एक स्वच्छ चरित्रवान राष्ट्रक निर्माण करैत छथि।
3 : शिक्षाक क्षेत्रमे – शिक्षाक क्षेत्रमे नारी अपन महत्वपूर्ण योगदान दऽ कऽ समाजकेँ स्वस्थ और शिक्षित बनाबैमे अग्रणी भूमिका निभबैत छथि। आब महिला चारदीवारी सँ मुक्त भऽ कऽ विज्ञान, तकनीक, उद्योग, व्यवसाय, न्याय, अंतरिक्ष, खेल, कृषि, अनुसंधान और शिक्षाक क्षेत्रमे अपन सशक्त भूमिका निभा रहल छथि तथा अपन ज्ञान सँ समाजकेँ आगू बढ़बैकेँ लेल प्रेरित कऽ रहल छथि।
4 : आर्थिक क्षेत्रमे – एक समय छल, जखन नारी कुप्रथाक बेड़ीमे जकड़ल छलीह। आजुक नारी और समाजक सोचमे पर्याप्त परिवर्तन भेल छैक। वर्तमान भौतिकवादी युगमे अर्थक महत्ता बढ़ि गेल छैक। एनामे नारी पुरूषक संग कन्हा सँ कन्हा मिला कऽ धनोपार्जनक लेल प्रयत्नशील छथि। अपन गरिमामयी प्रयास सँ ओ परिवार – समाजकेँ समृद्ध करयकेँ लेल कृतसंकल्प छथि।
5 : व्यवसायिक क्षेत्रमे – आजुक नारी बैंकिंग, केंद्र सरकार, राज्य सरकार, कार्पोरेट जगत, स्वयंसेवी संस्था आदि सब क्षेत्रमे अपन उपस्थिति दर्ज करेने छथि।नारीकेँ धैर्यपूर्ण कार्य क्षमता, सहयोगिक संग मधुर व्यवहार, सीखैकेँ जिज्ञासा, संवेदनशीलता, सकारात्मक सोच तथा विनम्रता आदि गुण समाजमे हुनकर भूमिकाकेँ महत्वपूर्ण बना देने छैन्ह।
6 : प्रशासनिक क्षेत्रमे – आजुक नारी लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा तथा स्थानीय निकायकेँ नेतृत्वमे सेहो अग्रणी छथि। ओ समाजक अन्य स्त्रीक हितक लेल पर्याप्त सजग छथि। महिला सशक्तीकरण हुनकर एहि सजगताक परिणाम छैन्ह। अपन सजगताक माध्यम सँ नारी अन्य स्त्रीकेँ उत्थानमे उल्लेखनीय कार्य कऽ रहल छथि।
समाजकेँ नब दिशा देबयवाली नारी – कविवर मैथिलीशरण गुप्तकेँ – ” अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आँचल में है दूध और आँखों में पानी।”वाला अवधारणाकेँ गलत सिद्ध करैत समाजकेँ नब दिशा देबयमे जुटल छथि। ओ अबलापनक अवधारणाकेँ तिलांजलि दऽ कऽ विकासक सोपान पर अग्रसर छथि। अनेक नारी समाजकेँ नब दिशा प्रदान कऽ रहल छथि, शिक्षाक अलख जगा रहल छथि और दहेज प्रथा जेहेन कुप्रथाकेँ उन्मूलन कऽ रहल छथि। नारीक अबला होइकेँ धारणाकेँ बदलि कऽ अपना लेल गरिमामयी मंच तैयार करि कऽ, भावी पीढ़ीक लेल सकारात्मक सोच उत्पन्न कऽ रहल छथि। नैसर्गिक रूप सँ स्त्री-पुरुष एक-दोसरकेँ पूरक छथि। आधुनिक लोकतान्त्रिक समाजमे पुरूष अपन व्यक्तित्वकेँ नब ऊँचाई छू रहल छथि, हुनकर निर्माणमे नारीक भूमिका सर्वोपरि अछि।

आभा झा
गाजियाबाद