“स्त्रीगणमे सहन करवाक बहुत क्षमता होइत छैन।”

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— कीर्ति नारायण झा।       

“पुरूष पातर आ मौगी(स्त्रीगण) मोट” “स्त्रीगण अख्खज होइत छैथि” इत्यादि हम सभ अपन बाल्यावस्था सँ सुनैत अयलहुँ अछि। हम अपन दाई (माँ) के देखने छियैइ जे एक डेढ बजे सँ पहिले मुँह में किछु नहिं जाइत छलैक। हम सभ छटपटा कऽ रहि जाइ जे भोर में कम सँ कम एक गिलास सत्तू पी लेए मुदा कथी लए मानत? कहैत छल जे गोसाओन के पूजा करवाक अछि आ ताहि सँ पहिले अन्न कोना लऽ लिअऽ मुँह में? खेनाइ जखन बनैत छलैक तऽ तीमन तरकारी अथवा तरुआ अपना लेल कहियो नहि रखैत छलैक। हम सभ जँ पूछियै तऽ कहै जे ई सभ पुरूष पात्र लेल बनैत छैक आ ओ सभ जँ खा लेलन्हि तऽ भऽ गेलै। मौगी मोट लेल एकर सभक कोनो आवश्यकता नहिं छैक। हमरा लोकनि निरुत्तर भऽ जाइत छलहुँ ओकर एतेक विश्वास के संग बजवाक कारणे…जखन कि एकटा सशक्त परिवार के लेल एकटा सशक्त आ स्वस्थ स्त्रीगण के भेनाइ अत्यन्त आवश्यक होइत छैक कारण एकटा स्त्रीगण घरक सभ सामान केर संग संग सभ सदस्य के देखभाल सेहो करैत छैथि मुदा दुर्भाग्यवश जखन अप्पन देखभाल करवाक बात अबैत अछि तखन ओ अनेकानेक बहाना के लऽ कऽ ठाढ़ भऽ जाइत छैथि। सभ सँ पहिल बहाना जे किछु खयवाक लेल समय नहि भेटैत अछि आ वास्तव मे एहि बहाना में दम सेहो रहैत छैक कारण जे घर में कोनो ने कोनो काज अवश्य रहैत छैक जेना उदाहरणस्वरूप बच्चा विद्यालय सँ आबि झोरा कतहु फेकलक, कपड़ा कतहु फेकलक आ जूता आ मौजा के तऽ कोनो बाते नहिं आ माय के सभटा बिछि बिछि कऽ राखय पड़ैत छैक आ बच्चाक पिता के जँ अपन टाय खोलवाक हेतैन्ह तऽ ओ हुनकर कनियें खोलथिन्ह, ई हाल होइत छैक स्त्रीगण सभ के तें समय के अभाव अवश्य रहैत छैन्ह हुनका सभ लग मुदा एही में सँ समय निकालि ओ किछु मुँह में दऽ सकैत छैथि। हुनका ई बुझअ पड़तन्हि जे स्वास्थ सभ सँ बेसी जरूरी छैक। भोजन के अलावा योग आ प्राणायम के लेल समय निकालय पड़तन्हि। दोसर बहाना होइत छैन्ह “नतिनी सीखेएल बूढी दादी के” जँ कियो स्त्रीगण के स्वास्थ्य सम्बन्धी कोनो जानकारी देवाक प्रयास करैत छैथि तऽ ओकरा ओ बहुत जोर सँ हरका दैत छथिन्ह जे जो – जो हमरा सीखवय चललेहें। हम सभटा बूझैत छियैइ आ रौद मे केस नहिं पकाओने छी इत्यादि। जँ ककरो बात सँ प्रभावितो भेलीह तऽ कहि देतीह जे आधा सँ बेसी अवस्था निकलि गेल आ सीखवाक समय सेहो बीति गेल इत्यादि। तेसर बहाना जे बसिया अथवा वेकार भोजन जकरा खयला सँ स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ैत छैक ओहो खयवा में स्त्रीगण सभ सँ आगू इ कहैत जे खराब जे हेएत ताहि सँ पहिले खा कऽ सधा दैत छी। जखन कि ओ खराब भऽ चुकल रहैत छैक आ जकरा खयला सँ स्त्रीगण के मोन खराब होइत छैन्ह।स्त्रीगण जँ गलती सँ बजार चलि गेलीह तखन सस्ता होयवाक नाम पर घटिया समान सभ कीनि कऽ घर में अनैत छैथि जाहि मे शारीरिक आओर मानसिक विकास के लेल कोनो प्रकारक पौष्टिकता नहिं रहैत छैक जकर प्रतिकूल प्रभाव स्त्री स्वास्थ्य पर पड़ैत छैक। मूलतया स्त्रीगण में वरदास्त करवाक बहुत क्षमता होइत छैन्ह संगहि ओ अपना स्वास्थ्य के विषय में बेसी अनभिज्ञ होइत छैथि ओ पति आ बाल बच्चा के स्वास्थ्य के आगू अपन स्वास्थ्य के गौण बुझैत छैथि जे वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण अछि कारण जीवनक गाड़ी सफलतापूर्वक चलेवाक लेल पुरूष आ स्त्रीगण रूपी दुनू पहिया के सुचारू रूप सँ चलनाइ परम आवश्यक होइत छैक