“नेनाक’ सुयोग्य आ संस्कारी बनाबए क’ लेल अभिभावककेँ बहुत किछु त्याग करए पड़ैत छैक।”

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— सिन्दू झा       

की कहु, आब त’ पेटहिसँ नेना सभकेँ भरण-पोषण केनाइ अति दूभर भेल जाइत अछि। ताहि दिन काँच वएसमे लोक माय आ बाप बनि जाइत छल। धिओ पुता गरदामे ओंघराइत कनैत खिजैत माँड़ झोड़ पीबि पोषा जाइत छल। ककरहु नाक बहैत त’ ककरहु कान, ककरहु आँखिमे काँची पिची त’केओ कुपोषकक शिकार।
बेरोजगारहिमे अदहा दर्जन बाल बच्चा भ’ जाइत छल। स्त्री पुरुष केओ जागृत नहि।
आइ काल्हिक अभिभावक युवा पीढी दुनू बुधिआर। सभ कथुक प्लान बनाक’ भविष्य सोचैत वर्तमानमे जीबैत अछि। तीस पैंतीसमे त’ बौआ बुच्ची सभ बड़-कनिञा बनैत छथि। तकरा दू चारि वरखक वाद बाल बच्चा,सेहो एकटा सँ दू टा मात्र।
ओना समयानुसार नव पीढिक सोच विचार अति उत्तम।किऐक त’ महगाई आसमान छूने जाइत अछि। आजुक घड़िमे एकटा नेनाक उत्पन्न सँ ल’क’ जन्म धरि कतेको रुपैया खर्च भ’ जाइत छैक। दुनिया भरिक जाच पड़ताल आ रोग सँ गर्भवती जनिजाति तबाह रहैत छथि। ताहि दिन शुद्ध वातावरण आ खान-पान भेटैत छल त’ नेना सभ किछु खाक’ केहनो वस्त्र पहिरिक’ शिक्षा ग्रहण क’ लैत छल। आब त’ ने ओ नगरी ने ओ राम!
पहिल चरण – आजुक अभिभावक नेना केर सभ कथुक धिआन रखैत छथि आ रखबाक चाही। जनमौटि चिलकाक साफ सुथरा सँ ल’क’ ओकर अंग प्रत्यंगक देख रेख नीक सँ करबाक चाही। जौँ पार लागए त’खाँटि सुच्चा सरसो तेल सँ सभ दिन,नहि त एक वरख धरि अवश्य चिलकाकेँ दू तीन बेर मालिश करबाक चाही। सुसुम पानिसँ सभ दिन स्नान करबिऐक । साबुन सैम्पुक कम सँ कम व्यवहार करी। सप्ताहमे एक दिन नीमक पात पानिमे खौलाक’ ताहि सँ स्नान करा दिऐक। अवस्था देखिक’अपन घरक बनाओल टटका सभ बस्तु खुअबिऐक।तहिना खेलौना सेहो एहन दिऐक जाहि सँ ओकर बुद्धि ज्ञानमे बृधि होइक। दुलार करैत घरि कुभाषा किवा अपशब्द नहि बाजी। किऐक त’ ओकर संस्कार पर पड़ैत छैक। चिलका सभ त’अबोध ,कुम्हारक बासन होइत अछि। हम सभ जैह सिखेबैक सैह सीखत।
दोसरचरण- “बढए पुत पिताक’ धर्मे” ई कहबी एकदम सत्य अछि। जौँ बाल बच्चा सुपात्र भेल त’ माय बापक झंडा सगरो फहराए लगैछ। नहि त’ अपनहु मोन झहरत आ रंग रंगक समाजक उलहन,,,,,,,,।
अपन आर्थिक स्थितिक मुताबिक धिआ पुताक भरण-पोषण करबाक चाही। जाहि सँ ओकर सख आ मांग अकाश नहि ठेकै। औकात सँ फाजिल बस्तुक लोभ देखाक मनौनी नहि करिऐक। उठनै बैसनै सँ ल’ क’ पैघ छोट संग बजनै, आदर सत्कार सभ संस्कार हमरा लोकनि बाल्येकालमे सीखैत छी। कहल गेल अछि जे- “जे ननुआँ से गर्वहि ननुआँ”!खिस्सा पिहानी एहन सुनबिऐक जे ओ बुझि पाबै आ किछु सीख सेहो भेटैक। ओकरा संग बेसी सँ बेसी गप्प करिऐक। आजुक अभिभावक सभ नेनाकेँ हाथमे फोन किवा टीवीक’ रिमोट थमाह अपने गप्पमे लागल रहैत छथि। जाहि सँ ओकर स्वास्थ्य आ आचरण दुनू पर बेजाए प्रभाव पड़ैत छैक।
तेसर चरण – धिआ पुताक’ अपन परिवारक आ परोसिआ सभक परिचय करबिऐक। सभक सोझामे खुलिक’ बजबाक लेल प्रेरित करबाक चाही। अनरगल गप्प सभ ओकरा समक्ष नहि बाजि। बाल बुदरुक लग पति-पत्नीक बीच उकटा पैंची त’ कखनहुँ नहि होइक! किऐक त’ एहि सँ ओकरामे मानसिक तनाव उत्पन्न भ’ जाइत छैक। जाहिसँ बच्चा जिद्दी, छिनकाह ,मरतरिआ आ खौंझाह बनि जाइत अछि। खेलाइत धुपाइत ओकरा किछु श्लोक, आखर आ गीतक ज्ञान सेहो दिऐक। भनसा घर सँ ल’ क’
शयनकक्ष तक सभ वस्तु केर नाम आ कार्यक्षमक बोध करबिऐक।
चारिम चरण – जखन धिआ पुता विद्यालय जाए लागए त’ सभसँ पहिने समयक महत्व आ उपयोग सँ अवगत करबिऐक। गुरु शिष्यक ज्ञानक संग कक्षाक संगी साथी सभक संग मेल मिलापक बुद्धि दिऐक। पोथी, कलम,कागत संगे विद्यालयक अर्थ आ महत्व बुझबिऐक।दोसरहु नेना सभक संग खेलाए आ कुद फान करए दिऐक। समय समय पर किछु अनुशासन सेहो उचित होइत छैक। नेनाक संस्कार सँ माय बापक संस्कारक प्रमाण भेटैत छैक।
पाँचम चरण- छठी सँ बारहवीं कक्षा तक बाल बच्चा पर विशेष रूप सँ धिआन रखबाक चाहि। किऐक त’ इएह उमर बनबाक आ बिगड़बाक होइत अछि। आधुनिक अभिभावक सभ अत्यंत व्यस्त आ प्रगतिशील रहैत छथि। धिआ पुताक’ घरमे असगर छोड़ि अपने ऑफिस आ रातिमे आबि भोजन कए पसरि जाइत छथि।धिआ पुता स्वतंत्र पाबि कुमार्ग चालि चलए लगैछ। जेना – चोइर केनाइ, झूठ बजनाइ, नशेड़ी आदि।
अतएव एकटा कुशल अभिभावककेँ कर्तव्य बनैत अछि जे – भरि दिन अफसिआॅत रहलाक बाबजूद रातिमे सिनेह सँ नेना सभक संग गप्प करथु।संगमे बैसिक’ भोजन करथु आ भरि दिनक ब्योरा सुनबाक प्रयत्न करथु। मासमे एक दू बेर विद्यालय सँ ताल भाँज अवश्य लेवाक चाही। अवकाशक दिन अंचोकहिमे घर अएबाक चेष्टा करिह। जौँ धिआ पुता किछु नाजायज काज कए लिएह त’ कनेक अनुशासन आ विशेष सिनेह सँ बुझबिऐक।अति दुलार सेहो दुख दारुण भ’ जाइत छैक। नेनाक’ सुयोग्य आ संस्कारी बनाबए क’ लेल अभिभावककेँ बहुत किछु त्याग करए पड़ैत छैक। ओकर रुचि देखिक’ ओकरा ओही दिश मार्ग दर्शन करबिऐक। अपन मोन मुताबिक कखनहु नहि बाल बच्चा पर बोझ दिऐक।