“छठिक पारण दिनसँ बनाओल जाइत अछि सामा।”

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— पीताम्बरी देवी   

सामा भाई बहिन के पावन पर्व छैठ के पारण से सुरूह होईत अछि ।कयों कियो भरदुतिया दिन से सेहो बनाबय लगै छथि ।कहल जाईत अछि जे द्वापर युग में कृष्ण के बेटी सामा छलिह आर कृष्ण के बेटा साम छलाह ।सामा के ऋषि मुनि के सेबा करय में बहुत निक लगै छलनि ।ओ राति में पिता से चोरा के डिहुली सहेली संग जंगल में ऋषि मुनि सब के सेबा टहल कय आबथि । कृष्ण के एकटा मंत्री चारूक छल ओ सामा ओ डिहुली के जंगर दिस जाईत देख लेलक आर कृष्ण के झुठ फुसि लगा के कहि देलकनि । कृष्ण समा के तमसा के श्राप द देलखिन जे जाउ अहा के जंगल में बिचरण करैत बहुत निक लगैत अछि ते चकेवी चिरै भय जाउ आर जंगल में बिचण करू ।सामा चिरै भ गेलि ते हुनकर पति से हो महादेव के तपस्या कय के चकेबा चिरै हेबाक बर मंगलनि आर महादेव चकेबा बना देलखिन।दूनू जंगल में बिचरण करैत खरैत मिथिला आबि गेलि ।साम पिता के आज्ञा से युद्ध करय गेल छलाह जखनि एला ते बहिन के दसा देखि बहुत दुखी भेला आर कृष्ण के प्रशन्न कय के सब बात कहलनि ।तखनि कृष्ण सामा के श्राप मुक्त क देलखिन।साम तकैत तकैत बहिन के मिथिला एलाह आर खढ़ के जरा जरा के ईजोत क के जंगले जंगल बहिन के तकलनि बहिन भेटल खिन ।भाई बहिन के एहि प्रेम के देखि सब मिथिलानि सब पूजा करय लगलि ।चूगला के सब मिल के खुब मारलनि ओकर मोछ में आगि लगा देलखिन ।साम सामा के सब एतहि रहय लेल कहय लगलि ते साम सामा कहलनि जे हम सब बेर कातिक मास में आयब आर अहा सब बहिन खुब गीत नाद गाबि के कार्तिक पूर्णिमा के बिसर्जन कय देब जे बहिन सामा खेलेति हुनकर भाई के औरदा बढ़तनि।ओहि दिन कार्तिक पूर्णिमा छल जहिया साम सामा मिथिला से गेलिह।साम जे बहिन के ताकय आएल छलाह ते हुनकर संग में झाझी कुकर, सतभैया, खररुच भाई , ढोलिया बजनिया, भम्हरा , आर बहुतों चिरै चूनमूनि सब संग में छल।बाट पर बैस के बहिन सब बाट तकैत रहै छल तै बांटो बहिन , । मिथिला के बहिन सब भगवती गीत गबै छथि ओकरा बाद सामा के आराधना करै छथि ।
आबह सामा आबह चकेबा हे कातिक मास हमर भैया सबे भैया हे ईहो सामा पोसल।
सामा सुन्दर चिकनि माटि के सानि के ओहि से सबसे पहिने श्री सामा, आर तकर बाद सतभैया, झाझी कुकुर ,खररुचभैया, भम्हरा, ढ़ोलकिया बजनिया, चकबा चकबी, पौती जाहि मे सामा के गुर चूड़ा सिंन्दूर टिकली सब संग में देल जाई छनि।आर चूगला बिन्दाबन , तीतिर, कचबचिया, लड्डू वाली, अनेकों तरहक हमर बहिन सब सामा बनबैत छथि।
किछु गीत सब
गाम के अधिकारी तोहे बरका भैया हे ,भैया हाथ दस पोखरि खुना देह चम्पा फूल लगा देह हे।
नदिया क हे तीरे तीरे हमरो भैया खेलथि सिकार ,कहि पठौलखिन माई हे छोटकि बहिनों के समाद, गे माई भैया औता मेहमान।
पनामा जे खेलहि रे भैया पिकिया नरौले ओहि ठाम, ओहि पिकिये अयलै रे भैया गंगा जमुनामा केर बाढ़ी।
सामा फेरय काल
जीबो जीबो जीबो कि तोर भैया जीबो कि मोर भैया जीबो कि लाख बरिषा जीबो ,
जैसन कररिक थम्ह ओईसन भैयाक जाघ ।
सब बहिन भौज मिल के सामा के गीत गबै छथि ।सामा के देव उठाओन दिन पिठार से ढ़ौरल जाइत अछि सिंन्दूर के छिटका द देल जाईत अछि। ओकरा बाद बहिन सब सामा के रंग से लिखैत छथि ।बास के चंगेरा में सामा सब के सजा के नब धान दूभी दय के डाला में दीप जरा के सब बहिन सब बटगवनि गबैत अपन अपन आंगन से बहार होई छथि आर भरि टोल गीत गबैत सामा के ओस चटबैत छथि।सब सखि सहेली नन्दी भौज रंग रभस करैत अपन अपन घर अबैत छथि । कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पहिने सामा गीत के बाद समदाओन गावल जाई ये ।
एतेक जतन सओ सामा बेटी पोसल, ओहो सामा सासुर जाथि।
फेर कार्तिक पूर्णिमा दिन पिठार से एरपन दय सिंन्दूर लगाय ।ओहिपर सामा सब के बैसा के चूरा दही गुरु के भोग लगा के ।भाई के फाफर भरै छथि गुर चूरा लड़ू बतासा लय के आर भाई ठेंगहुन लगा के सामा फोरै छथि। आर फेर सब चगेरा में सामा‌ लय के जोतलाहा खेत में जा के सब बहिन चूगला के मोछ झरकबै छथि आर चुगला करें चूगलपन बिलारी करें म्यायू । बिन्दावन मे आगि लागल कियो ने मिझाबै रे हमर भैया सबे भैया से हो मिझाबै रे।साम चकों साम चकों अबिह हे सबरंग पटिय बिछबिह हे ।
फेर सब बहिन सब दूरूखा लग आबि के ई गीत गबै छथि
खोलू केबारे भैया खोलू केवार हम चल जायब राजा दरवार राजा दरबार में चम्पा फूल लोढ़ब उगी गेल हे पूर्णिमा के चान कि उगि गेल ।
आरे भम्हरा आरे भम्हरा हमर भैया छोटका भैया सुतल कि जागल अरे भम्हरा ।सात सहेलि दुअरहि ठाढ़ छियै रे भम्हरा ।काठ पसिझे मौजों नाभि पसिझै छै रे भम्हरा।
फेर सब गोसौन लग डाला राखि दै छथिन आर भगवती के गीत गावि के गोर लागी लै छथि ।हे सामा गलती सलती माफ करब ।भाई के औरदा राखव स्वस्थ राखव।
पीताम्वरी देवी।