“मिथिलाक संस्कृति, पाबनि-तिहार सबमे एक दोसरकेँ प्रति स्नेहक प्रत्यक्ष वा परोक्ष रूपसँ जोड़बाक माध्यम।”

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–विद्या चौधरी     

भरदुतिया भाई बहिन क स्नेह क पावनि अछि। ई अपन मिथिला मे बहुत उत्साहपूर्वक मनाओल जाइत अछि, भरदुतिया के दिन बहिन गोबर स आंगन निपैत छथि आ पानि मे फुलल चाउर के पिठार पिसी आंगन मे अरिपन दैत छथि, पिढी पर अरिपन सेहो दैत छथि, आ पानक पात, सुपारी, कुमहर क फुल, मखान, चाँदी के सिक्का ,गायक धी, मधु, अछिंजल,पिठार, सिन्दूर सबहक ओरियान क क रखैत छथि, आ भाई के ऐला पर नओत लैत छथि आ कहैत छथिन-यमुना नओतई छथि यम के हम नओतई त छी अपन भाई के जाबैत तक यमुना मे जल रहै ताबैत तक हमर भाई के औरदा बढय। आ भाई के नाना प्रकार के व्यंजन परोसिक खुआबैत छथि। कहल जाइत अछि जे यमुना के भाई यमराज छलखिन ओ अपन बहिन यमुना के सासुर हुनका स भेट करक लेल नहि जाईत छलखिन जे हमर काज त लोकक प्रान लेनाई अछि त हम अशुभ मानल जाइत छी त बहिन क सासुर कोना जाऊ, परन्तु जखन बहिन यमुना जिद ठानि देलखिन जे आँहा एबे टा करू त यमराज बहिन क स्नेह आगु बेबस भ गेला आ हुनका यमुना के ओतय जाई परलनि यमराज के आओल देखि यमुना बहुत प्रसन्न भेली आ भाई स कहखिन जे आई आँहा हमरा ओत एलहु से देखि हमरा बहुत प्रसन्नता भेल तहिना यदि दुनिया के सब बहिन के भाई अमर भ जेथिन त हुनका सब के कतेक प्रसन्नता हेतनि से हम आँहा स एक टा वरदान मागैत छी जे सब भाई के अमर क दियउन। यमराज कहलखिन जे बहिन ई त संभव नहि अछि ,कियाकि जे आयल अछि ओकरा जेनाई निश्चित अछि, लेकिन हम ई वरदान दैत छी जे जिनकर बहिन श्रद्धापूर्वक एहि पावनि के करथिन हुनकर भाई दीर्घायु हेथिन।
ताहि दुआरे सब बहिन बहुत श्रद्धापूर्वक एहि पाबैन के करैत छथि आ अपन भाई के दीर्घायु बनाबैत छथि। एखन के समय मे कोने समस्या के कारण यदि भाई बहिन दुर दुरो छथि तईयो ई पाबैन हुनकर स्नेह आ श्रद्धा विश्वास के मजबुत बनाबैत अछि। सुभद्रा के ओहिठाम सेहो श्रीकृष्ण नओत लेबईक लेल आओल छलथि।
भाई बहिन क पाबैन भरदुतिया अपन मिथिला के महान पाबैन अछि। सासुर मे बहिन सब भाई के ऐबाक बेसब्री स बाट तकैत रहैत छथि। आ ऐलाक बाद खुशी के ठेकाना नहि रहैत छनि। यहा अछि अपन मिथिला आ मिथिला के संस्कृति, पाबैन तिहार सब मे एक दोसर के प्रति स्नेह के प्रत्यक्ष वा परोक्ष रूप स जोड़बाक माध्यम।
भरदुतिया के सब भाई बहिन के बहुत बहुत शुभकामना।
जय मिथिला
जय मैथिल
जय माँ जानकी