“हस्तकलामे सनातनी पारंगत रहलीह अछि मिथिलाक महिला”

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— पीताम्बरी देवी।     

कला
हमर मिथिला में मैथिलानी दादी नानी काकी पिसी सब घर में हस्त कला में पारंगत रहैत छलिह।जेना एरिपन, कोबर घर में चित्रकारी ,देहरि पर चित्रकारी, मारबा पर एरपन आर चित्र कारी।सीकीकेमौनी ,पथिया,बिरहरा ,पौती ,आदि अनेको सामान सब बनेनाइ ।तहीना जनौ के बिन्यास रहै छल ।एतेक पातर सुत से जनौ बनै छल जे एक जोड़ जनौ इलाइची के घोईया में अटि जाई छल ।ई सभटा मिथिलानी हमर सब के पीसी मौसी सब बनबैत छलिह।आर घर आंगन में काज परोजन में ब्यबहार में अबै छल।ई लगभग सब घर में लुरिगरि बाबी सब रहै छलि।कोनो काज करतेवता होईत छल ते घर आंगन के देहरी धुरखुर सब लिखल जाईत छल ।एकरा लेल रंग अपनै से बनौल जाईत छल ।जेंना करिखा से करी रंग बनै छल ,सीम के पात से हरियर रंग बनैत छल सीन्दूर से लाल रंग बनौल जाईत छल चून से उजर रंग बनैत छल।आरो अनेकों फूल पात से प्राकृतिक रंग सब बनैत छल जेकर ज्ञान हमर बाबी मौसी सब के छलनि। आर देहरी धूरखुर पर लिखिया करैत छलिह ।बरका बरका माछ, हाथी, कदम्ब गाछ पर कृष्ण भगवान, नागनथैया ,चीर हरण ,सीता राम के विवाह के दृश्य सबटा सब अपन अपन माटिक लेवल ढ़ौरल टाट पर लिखने लहै छलि। एना भेल जे 1934मे बहुत पैघ भूकम्प भेल आर सौसे मिथिला तबाह भ गेल ।ओहि समय में बिदेश से सहायता करै लेल रिलिफ बाटय लेल बिदेशी सब एला ओहि मे फ्रांस , जर्मनी , इजरायल ,रूस सब ठाम से सहायता कर्ता सब एला।ओ सब मिथिला से घर घर के फोटो सब खिंच के लय गेलाह ।ओहि मे जे मिथिला के चित्र कला देखलनि ते ओ सभ ओहि फोटो के बहुत पसन्द केलनि।आर ओहि मे जर्मनी बला बेसि आगु एलाह आर ओ मिथिला के पेंटिंग के मांग केलनि ।ओहि मे तहिया जे परंगत रहथि ओ पेंटिंग बना के देलखिन आर जर्मनी में पेंटिंग बिकाय लागल।एकर मुख्य श्रेय विलियम आर्चर के जाई छनि ओ 49मे अपन ओ एकटा मिथिला पर लेख लिखलन्हि ओहि मे मिथिला पेंटिंग के बहुत निक से बर्णन केलनि ।ई पांच तरहक बनैत अछि ।,भरनि ,कचिया, कोहबर,गोवर आदि नाम परल , ।सबसे पहिले सीता देवी के 69ई में बिहार रत्न संग सम्मानित कएल गेलि ।ओकर बाद ते मिथिला पेंटिंग के बहुत गोटा के सम्मान प्राप्त भेलनि अछि जेना जगदम्बा देवी,महासुन्दरी देवी बउआ देवी ,सीता देवी, सब पुरस्कृत भेलि आर अखनहु बहुत पुरस्कृत भ रहल छथि।हमर मिथिला में कोनो मागलिक कार्य होईत अछि ते मिथिला पेंटिंग बनितेटा अछि आर ओहि कार्य के शोभा बढ़ि जाईत अछि । मिथिला पेंटिंग एकटा घर आंगन से बहरेल चित्र कला अछि जे आब बिश्वपरसिध्द भ गेले आर मिथिला के कला कार सब महिला पूरूष सब सम्मानित भय रहल छथि।आर देश से विदेश तक एहि पेंटिंग के नाम फैल गेल अछि।एकर संग संग सिकी के कला कारी से हो बढ़ी रहले लेकिन ओकर अखनि तक बिदेश से कोनो ओतेक मांग नै होईत अछि। अपने देश भरि में अछि। मिथिला पेंटिंग हमरा सब लेल एकटा पहचान बना देलक जे सार्वजनिक स्थान पर नाम कय रहले आर देश से बिदेश तक अपन पहचान बना लेलक।ई भित चित्र (देवाल)पर ओ जमीन पर एरपन ओ कागज पर बनाओल जाईत अछि।
पीताम्वरी देवी