“पितरकेँ प्रसन्न रहलासँ देवता सेहो प्रसन्न रहैत छथिन्ह”

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— रिंकू झा   

पितरपक्ष यानी ( पितर के स्मरण) अर्थात पितर के नाम पर श्रद्धा रूपी केल गेल तर्पण , दान पुण्य तथा ब्राह्मण भोजन आदि जेकरा हम अहा श्राद्ध पक्ष सेहो kahai छी।
समस्त भारत में हिन्दू समाज ई पितर पक्ष के एकटा विशेष पर्व के रूप में मनाबेत छैथ। ई भादब महीना के शुक्ल पक्ष स सुरु होई छै आर आसिन मास के कृष्ण पक्ष अर्थात अमावस्या तक चलाई छै, पंद्रह दिन तक पितृ पक्ष के तर्पण विधि विधान स केल जाय छै। जाहि में बहुत नियम निष्ठा होई छै जेना पंद्रह दिन तक प्याज , लहसुन, मांसाहारी खाना वर्जित रहई छै, नित स्नान क भीजल शरीर में हाथ में कुश आर कारी तिल लॉ क सफेद फूल स पितर के दक्षिण दिशा में मुंह क तर्पण केल जाय छै, पितर के नाम आर गोत्र मंत्र के साथ पढ़ी क। अहि पंद्रह दिन में जिनका सब के अपना पितर के पुण्य तिथि बूझल रहई छैन ओ सब ओहि तिथि क हुंका नाम स कर्म करा के ब्राह्मण भोजन करवई छैथ, आर जिनका नई बुझल रहई छेन ओ सब अंतिम दिन यानी सर्व पितृ अमावस्या या महालया कहियो ओहि दिन ब्राह्मण भोजन आर कर्म करै छैथ। पितर पक्ष में कोनो नव वस्तु नई किनल जाय छै, ने कोनो शुभ कार्य केल जाय छै। तथ्य के अनुसार पहिले दिन के तर्पण ऋषि अगस्त्मुनि के देल जाय छै, दोसर दिन स पितर के तर्पण होई छै। कहल जाय छै जे पितृ पक्ष में जे पुत्र के हाथक कुश के नोक स जे जल खसेत छै ओ सीधा पितर के प्राप्त होई छैन। मान्यता के अनुसार सूर्य जखन कन्या राशि में प्रवेश करै छथीन त ओहि समय में यमराज समस्त पितृ के धरती पर एबी अपन सगा संबंधी के देखई के लेल भेज दई छथींन। पितर आशा लय अबे छैथ की हमरा बंश में पैन देब बला aichh ते हेतु सब गोटे के अपना पितृ के नाम पर श्रद्धा रूपी तर्पण करवाके चाही।हमरा अहा में एंन्हुओ कोनो भी काज करे स पहिले देब पितर के आवाहन केल जाय छै।
कहावत छै की अगर कोनो आदमी अपन पितर के प्रसन्न नै क पाबैत छैथ त ओकरा देवतो क्षमा नई करै छथींन आर ओहि आदमी के पितृ दोष के भागी बने पराए छै कारण प्रत्येक व्यक्ति के ऊपर तीन टा ऋण होई छै १ पितृ ऋण २ देब ऋण ३ ऋषि ऋण जाहि में सब से पैघ पितृ ऋण होई छै आर अहि स बढ़िया कोनो समय विशेष नई होई छे अपना पितर के प्रति श्रद्धा वयक्त कर के।ओना त तर्पण कतो भी करू मुदा कुछ विशेष जगह पर केला स निक मान ल जाय छै जेना गंगा, प्रयाग, हरिद्वार, बनारस गया।
श्री राम जी सेहओ अपन पिता दशरथ जी के आर पक्षी राज जटायु के तर्पण गया में kene छथींन।
आब के युवा पीढ़ी सब एतेक त नै मनै छैथ कारण अहि बयसत जिंदगी में संभबो नई भ पबै छै, मुदा हमर अहा के काज अछी जे हुंका सबके प्रेरित करिओ देवता पितर के प्रति श्रद्धा करै के लेल ।
पितृ कर्म केला स निक होई छे आर पितृ दोष स मुक्ति भेटई छै।
एक टा दीप प्रज्ज्वलित जरूर करि दक्षिण दिशा में पितृ के नाम स अपन घर आंगन में पितर पक्ष में । रिंकू झा