“मनुष्यक विकासक अवधारणा ही बाढ़िक समस्याक मूल कारण अछि”

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–आभा झा       

मिथिलामें हर वर्ष बाढ़िक कारण भारी तबाही होइत छैक,जाहि सऽ लाखों लोकक संग कतेको गाम एकर चपेटमें अबैत अछि।एहि ठामक लोक सालों- साल सऽ बाढ़िक कहर झेल रहल छथि।मिथिलाक अधिकांश क्षेत्र एहि प्राकृतिक आपदा सऽ परेशान अछि।मिथिलाक अधिकांश नदी बागमती, गंडक, कमला बलानमें हर वर्ष भारी वर्षाकेँ कारण बाढ़ि आबि जाइत छैक। अधिकांश नदी हिमालय सऽ निकलैत छैक और नेपाल सऽ बहैत उत्तर बिहार आ अपन मिथिला पहुँचैत छैक। एहि नदीमें बाढ़िक प्रकोप सं ओहि इलाकाकेँ लाखों लोक बाढ़िकेँ कारण बेघर भऽ जाइत छथि।कतेको लोकक घर एहि बाढ़िमें दहा जाइत छैन्ह। कतेको बरख सं ई समस्या जस के तस छैक। राज्यमें 3800 किलोमीटर सऽ बेसी लंबाईमें तटबंधक निर्माण कराओल गेल मुदा एहि सं बाढ़िक समस्या खत्म नहिं भेल। पिछला 43 बरख सं मिथिलाक बड्ड पैघ आबादीक लेल ई कहर बनल अछि।एहिमें सब सं पैघ योगदान नेपाल स’ आबै वाला पइनक छैक। एहि बाढ़िक कारण जानेमाल टा नहिं बल्कि खेतीकेँ नुकसान बड्ड होइत छैक।बाढ़ि सं ग्रस्त क्षेत्रमें कतेको तरहक बीमारी जेना- हैजा, आंत्रशोथ,हेपेटाइटिस आदि जल दूषित बीमारी फैल जाइत छैक। नेपालमें जखन भारी वर्षा होइत छैक तखन एहि नदी सभक जलस्तर में वृद्धि भ’ जाइत छैक। नेपाल में पइनक स्तर जखनो बढ़ैत छैक ओ अपन बांधक दरवाजा खोलि दैत छैक, जकर कारण नेपाल सं सटल अपन मिथिलामें बाढ़ि आबि जाइत छैक। बाढ़ि सं बचावक लेल तटबंध बनाओल गेल मुदा ई तटबंध अक्सर टूटि जाइत छैक। मनुष्यक विकासक अवधारना ही बाढ़िक समस्याक मूल कारण अछि।विकास कार्यक तहत नदीक रस्ता रोकल गेल,बांध बनाओल गेल,सड़क बनाओल गेल और पुल पुलिया बनाओल गेल जकर कारण नदीक प्रवाहमें रूकावट आयल और यैह कारण छैक कि बाढ़ि सं तबाही बढ़ि गेल। खाली सरकारक दिस सं रिलीफ बांटि देला सं किछ नै होइ वाला छैक।बाढ़ि आबि गेल या कोनो दुर्घटना भ’ गेल तखन नेता सब खाली मुआवजा आ पाइ बांटि दैत छथि।एहि सब सं किछ नै होइ वाला छैक। खाली स्थानीय लोक सं गप्प करि क’ बाढ़िक समस्याक हल या परेशानी कम होइ वाला नै छैक। विशेष तौर पर बाढ़ि प्रभावित इलाकामें रहि रहल किसान और स्थानीय लोक सं समस्याक हलकेँ निवारण पूछनाइ जरूरी छैक और हुनका संग मिलि क’ बाढ़िक समस्याक निदान संभव छैक। मिथिलामें एहि बाढ़िक कारण भूखमरीकेँ स्थिति उत्पन्न भ’ जाइत छैक।मिथिलाक लोक ताहि दुवारे अपन रोजी-रोटीक तलाशमें मजबूरीमें पलायन करैत छथि।जे खेती पर निर्भर छथि हुनका एहि बाढ़िक कारण अन्न-अनाजक उपजा नै होइत छैन्ह। अगर कोनो इलाकामें बाढ़ि आबि जाइ त’ सरकार और दोसर स्रोत सं मदद पहुँचाओल जाइत छैक, मुदा ई जरूरतमंद तक नहिं पहुँचि पबैत छैक। नदीक पइन रोकै लेल पाइ त’ भेटैत छैक, मुदा पदाधिकारी ओकर सही उपयोग नै करय छथिन। ओहि पाइकेँ अपने खा जाइत छथि।एहेन स्थिति में कोना सुधार हैत अपन मिथिलाक।बाढ़ि सिर्फ एक समस्या नै छैक,बल्कि ई भूखमरी जेहेन घोर समस्याक एक वजह सेहो छैक। बाढ़ि महज एक प्राकृतिक आपदा नहिं छैक,बल्कि ई एक राजनीतिक सवाल छैक। जाबे तक एहि सवालकेँ मुख्यधारा और राजनीतिक केंद्रमें नै आनल जायत ताबे तक बाढ़ि प्रबंधनक जन पक्षीय नीति नहिं बनि सकत।ताहि दुवारे ई बेहद जरूरी भ’ गेल छैक कि बाढ़ि नियंत्रण एवं प्रबंधनक बारेमें एक समग्र नजरिया अपनाओल जाइ, जाहिमें सरकार, वैज्ञानिक और तकनीकी लोकक संग-संग आम जनकेँ सोच सेहो महत्वपूर्ण हो।

आभा झा
गाजियाबाद