जातिक बन्हनकेँ तोड़ैत कृष्ण भक्त”

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— उग्रनाथ झा।       

श्री कृष्ण – सनातन धर्मक पथ प्रदर्शक
उपलब्ध स्रोत के आधार पर निजगुती सऽ कहि सकैत छि जे ब्रह्मांड के सभ सँ पुराण धर्म जौ कोनो छै त ओ अछि सनातन धर्म । एहि धर्म के अनुयायी हिन्दू कहल जाए छथि । हिन्दू 33 कोटि आराध्य के उपासक छथि ।जाहि देवी देवता के संग पंचतत्व क्षिति जल पावक गगन समीरके पूजक छथि ।जहाँ तक देखल जाए त लता पता वृक्ष संग पशु पूजन के विधान रहल अछि । एहन जे विशाल आस्था के सागर ताहि में आस्था के कोनो जाति वर्ग समुदाय सं बान्हि रखनाय संभव नहि । ताहि सभ जाति ,उपजाती , धर्म समुदाय के छुट जे जाहि देवी देवता के आराध्य मान उपासना में प्रधानता करैथ । उदाहरण स्वरूप कमला पूजा , शल्हेश पूजा , चित्रगुप्त पूजा , ईत्यादी । सनातन धर्मालम्बीके आस्था में तऽ एतेक तक देखल गेल जे इसलामिक तजिया जहन गाम में गली मुहल्ला में आबै छल तऽ हिन्दू परिवार अन्न -वस्त्र , धूप-अगरबत्ती ,रुपया इतयादि विनयावत भऽ चढ़बै छल । एहन परिदृश्य में समान धर्म माननिहार पर कोनो पाबंदी कोना उचित ।जहां तक भगवान श्री कृष्ण के बात अछि त हुनकर उपासना में भारतीय संप्रदाय के कहै विदेशी लोकनि से हो उपासनारत छथि । जेना इस्कान संस्था जे श्री कृष्ण उपासना लेल देश विदेश सभतरि प्रसार करैत छथि । कतेक विलायती जनमानस सनातन रत छथि । श्री कृष्ण धरा पर अवतरण दिवसहि सँ जातिय बंधनके स्थानापन्न कर्म प्रधानता , प्रेम , भाव के उच्चतर स्थान स्थापित करैत रहलाह । स्वयं यदुवंशीय क्षत्रीय कुल(सैन्य लड़क्का) में जन्म ल पालन हेतु यादव कुल के चयनित केलाह ।यादव बीच रहितो आपन क्षत्रीय कुल के मर्यादा यानि जन कल्याण हेतु विघ्न बाधा सं लड़ैत रहला ।उदाहरण स्वरूप चाहे कालियां नाग स मुक्ति हो वा गोवर्धन पहाड़ उठा व्रज के रक्षा । सभठम कर्म योग के पाठ उद्भूत करैत रहलाह ।जेकर फलाफल मानवीय आचरण में समरसता के आटावेश देखबा में आबैत छैक । श्री कृष्ण के उपासक में जऽ मीरा तुलसी भेटता तऽ ओत्तहि समकक्ष रखखान सेहो । ओतवहि नहि कर्म योग स जातीय चेन्हासी के तोरलथि ओतहि सामर्थ्यता के सेहो विखंडन केलाह । जेना दूर्योधन के व्यंजन त्यागि विदूर घर साग ग्रहण । श्री कृष्ण के जीवन लीला मानव जीवन वास्तविक चित्रण छैक । सनातन धर्म के महानता जे सभ जाति उपजाति वर्ण के कर्म आधारित समाज में श्रेषठता प्रदान करैत छैक जेना संत रविदास , पू़ँडरि भगत जे अपन कर्म बल पर आई समाज में पूजनीय स्थान रखैत छथि । सनातन धर्म के चाहे कतबो कियो आलोचना करौथू । तथाकथित नास्तिक’तावादी जातीय बंधन के जहर जतेक घोरबा के कोशिश करोथु मुदा सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ छल , अछि आ रहत । जेकर धीर वीर गंभीर नायक श्री राम आ श्री कृष्ण जे मानव जीवन के पथ प्रदर्शक छथि ओ छलाह आ रहता ।
जय श्री कृष्ण ।🙏🏼