“देश के एकता आ अखंडताक प्रति समर्पित मैथिल”

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— उग्रनाथ झा।               

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मिथिला के योगदान ।
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में संपूर्ण भारतीय गणराज्य स सहयोग प्राप्त भेल । चाहे क्षेत्रीय एकजूटता हो वा संप्रदायिक एकता । सब एकमत सऽ स्वाधिनताके अंगीकृत करबाक उद्देश्य सऽ पुरजोड़ कोशिश केलाह तपश्चात स्वाधिनता’क स्वच्छंद श्वासक प्राप्ति भेल । एहि प्राप्तिके लेल देश’क कतेक अमर बलिदानी केँ आपन सर्वोच्च बलिदान देमय पड़ल । कतेक मातृशक्तिके कोखि सुन्न भेल तऽ कतेकों के सिथ उजरि गेल , लेकिन स्वाधिनता’क सिनेही एहन लाख झंझावत के सहन करैत पराधिनता के सिक्करि सऽ अंतत: फारकति पाबिए ले’लक । एहन जे करुण आ मार्मिक परिदृश्य देशमे हो तऽ सदा सऽ माता ,मातृभूमि आ कर्तव्य परायणता लेल समर्पित मैथिल शोणित सर्द रहि जाए से तऽ संभव नहि । जेकर अनेक उदाहरण इतिहासक पृष्ठ में नुकाएल छैक । भारत’क एहि संग्राम में मिथिलावासी सभ वर्ग सम्प्रदाय के समेकित सहयोग रहल अछि ।चाहे स्वदेशी आंदोलन हो , नून’क कानून के विरोध हो , बंग-भंग आन्दोलन हो अथवा चंपारण सत्याग्रह सभठाम मैथिल चेतना तन , मन , धन सऽ समग्र रूपे समर्पित रहल छैक ।
प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन जे विलायती सत्ताके लड़खड़ा देने छल ओहिमे जे बिहार सं अग्रणी बाबू कुंवर सिंह छलाह हुनकर गुरु श्रीमान शंकर दत्त जी मिथिला सं आबैत छलाह हुनकर मूल ग्राम मधुबनी जिला अंतर्गत मंगरौनी छलन्हि ।हिनकर संग्राम सं भयभीत विलायती सिपाही हिनकर गिरफ्तारी लेल मधुबनी तक पहुंचल छल ।ई पसरल आगि एहन धूधूका उठौने छल जे तत्कालीन प्रशासक वर्गके मिथिलाके विभिन्न क्षेत्रमे सहचेती रखबा लेल आदेश देमय पड़लै ।फलस्वरूप भागलपूर , मुजफ्फरपूर दरभंगा सभ में अलर्ट घोषित कएल गेल ।
तहिना जहन बंगाल विभाजन भेल त एकर विरोध में मुजफ्फरपूर में आजादीक मस्ताना सभ के बमकांड निआर भेलहि जकर प्रवल सहयोग मिथिला सं भेटल । एहि के प्रतिफल जहन भारत के वीर सपूत खुदीराम बोस , प्रफूल्ल चंद्र जी के फांसी घोषित भेल त जगह जगह विरोध प्रदर्शन आ सामूहिक बंदी घोषित भेल जे आजादीके मतवाला लेल संजीवनी साबित भेल । संग्रामक धार के तिव्र केलक ।
मिथिला के जन सैलाब के आक्रोश आ समर्पण के प्रतिफल छल बिहार प्रांतीय कांग्रेस समिती के बैसार लहेरिया सराय में भेल ।तत्कालीन धूरंधरप माँ भारती सेवक के द्वारा दरभंगा आ मधुबनी पहुंचिए योजना निर्माण भेल । नून’क कानून विरोध में बहुत मैथिल आगु एलाह । श्री सत्यनारायण बाबू के मधुबनी के किशोरी लाल समेत, प्रबोध नारायण झा , नंदन दास सभ मिलकय महादेव टिबरेवाल के गोदाम में नून’क कानून विरोध केलाह। मिथिला में दूनू विचार धारा प्रवाहित छल ।एक दिश गांधीवादी छल त दोसर उग्र आंदोलन कारि।जेकर उदाहरण मिथिला के विभिन्न जिला में तोड़ फोड़ , जाम , आ बंदी सं प्राप्त होईछ । स्थिती के भयावहता एहि सं आँकल जा सकैछ जे स्थितीमे नियंत्रण हेतु विशेष दस्ता सभ दरभंगा पठाओल गेल । कतेको मैथिल सपूतके जहल देल गेल । मुदा स्वाधिनता आ स्वाभिमान के वशीभुत धरतीक सपूत के रोकि पोनाए अत्यन्त दुष्कर छल । फलस्वरूप श्री सुरज नारायण सिंह आ हुनकर सहसंघर्षी सभ जहल के घेरावा के फानि भागि गेलाह । मुदा बहुतों जहलक दुस्सह यातना के भोगलाह । विलायती हुकुमत सऽ लोहा लेबा में बहुतों ज्ञात अज्ञात मैथिल छथि मुदा किछु दृष्टिगत जे छथि ओ प्रजापति मिश्र , वैद्यनाथ मिश्र , लक्ष्मीनारायण झा , रमेश चन्द्र झा इत्यादी जे आपन रचनात्मकता आ सृजनात्मक उपक्रम सं छात्र नौजवान के बीच राष्ट्रिय भावना के जगेबाक आ विभिन्न व्यवस्था के तहत मतभिन्नता के पाटी जनर्न सैलाब के संगठित कऽ क्रांतिक चिनगी धूधूआबति रहला । मैथिलीके साहित्यकार लोकनि आपन गद्य पद्य रचना सऽ जनमानस चेतना के उद्वेलित करैत रहला। समेकित प्रयासे सऽ आंतत: स्वाधिनताक प्राप्ति भेल ।
ई देश के राष्ट्रिय एकता ,अखंडता के प्रति समर्पित मैथिल हृदय के उदारता के परिणाम जे हम आपन भाषा- लिपि के त्याग तक करबा सं परहेज नहि केलहुँ । जनमानस जागृत चेतना एकीकृत रहय , ताहि समय मिथिला के कार्यालयी लिपि में कैथी आ आम जन मानस के व्यवहारिक लिपि मिथिलाक्षर / तिरहुता छल , मुदा देश के एक भाषा , एक लिपि के प्रासंगिकता देखैत मैथिल देवनागरि आ हिन्दी के स्वीकार केलक आ आपन लिपी के त्याग जेकर परिणाम आई भोगि रहल छि जे भाषा मरणासन्न आ लिपी विलूप्त अछि ।मैथिल’क पहिचान विलुप्तप्राय भेल जा रहल छैक।
एहन उत्साह , उमंग , राष्ट्रीयता सं ओतप्रोत मिथिला आ मैथिल हुनकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मे योगदान अविस्मरणीय रहत ।
सादर ।