“मिथिलाक वीर सेनानी”

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— अरुण कुमार मिश्र।                 

स्वतंत्रता संग्राम मे मिथिलाक भूमिका।

१८५७ ई० के प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन ब्रिटिश साम्राज्य के जड़ि सँ हिला देने छल। एहि आन्दोलन सँ मिथिला समेत सम्पूर्ण भारतक लोक के ई विश्वास भ’ देल रहन्हि जे ब्रिटिश राजक सुर्य अस्ताचल दिस अग्रसर भ’ गेल अछि। बाबू कुंअर सिंह के गुरु मधुबनी स्थित मंगरौनी गामक शंकर दत्त छला जिनका गिरफ्तार करवाक लेल ब्रिटिश फौज मधुबनी सेेहो आयल छल।

बंग-विभाजनक आक्रोश मे १९०८ ई० मे खुदीराम बोस आ हुनक मित्र प्रफुल्लचंद्र चाकी द्वारा मुजफ्फरपुर बम कांडक रूप मे भेल जे सम्पूर्ण तिरहुत के संग संग सम्पूूर्ण भारतक जनमानस के झकझोरि क’ राखि देलक। ११ अगस्त १९०८ के खुदीराम बोस के फांसी द’ देल गेलैक। हुुनक फांसी के विरोध मे तीन दिन धरि विद्यालय आ कार्यालय बंद भेेल रहैक ।

१९१९ ई० के जलियावाला कांड सँ पुनः एक बेेर भारतीय जनमानसक संग मिथिलाक लोक के झकझोरि देलक, १९ अप्रैल के तेसर पहर ई खबरि पटना पहुंचल जाहि सँ सम्पूर्ण मिथिलाक लोक उत्तेजित भेला। बिहार प्रांतीय कांग्रेस समितिक बैसार १७ आ १८ अगस्त, १९१९ के लहेरियासराय मे भेलैक जाहिमे लगभग एक हजार लोक रहैथ ओहि मे सच्चिदानंद सिंह, राजेन्द्र प्रसाद , कृष्ण प्रकाश सिन्हा सनक दिग्गज नेेता आ स्वतंत्रता सेनानी सेहो छला। १९२० ई० मे नार्थ बुक जिला स्कूल दरभंगा आ वाटसन स्कूल मधुबनी मे सेहो आन्दोलनक प्रभाव देखल गेल ।

१९३० ई० भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलक निर्णायक वर्ष मानल जाइत अछि। गांधी जीक दांडी यात्रा भारतीय जनमानस के एक सुत्र मे बान्हय मे सफल भेल। ‘नमक’ कानून भंग करवाक लेल दरभंगा जिला ( मधुबनी सहित ) श्री सत्य नारायण सिंहक नेतृत्व मे स्वयंसेवक सभ १७ अप्रील केे नमक कानून भंग करवाक लेल पिपरा विदा भेला। पिपरामे नित नमक बनाओल जाय लागल। मधुबनीक किशोरी लाल जे नमकक थोक व्यापारी छला , से दीप ( झंझारपुर ) के प्रबोध ना० झा आ श्री नंदन दास ( दीप ) की मदद सँ झंझारपुर स्टेशन के लगीच महादेव टिव्रेवाल के गोदाम मेनमक कानून के भंग केलन्हि आ आन्दोलनकारिक प्रेरणा स्रोत बनला।

१९३९ ई० मे द्वितीय विश्वयुद्धक बिगुल बजल आ लोकक मोन मे अंग्रेजी सत्ता के अवसानक आशा जागल। युद्ध प्रारम्भ होयब सँ राष्ट्रवादक धारा बदलि गेल। युद्ध नीतिक विरुद्ध मिथिला मे भारी रोष पसरि रहल छल। १९४० मे २६ जनवरी के धूम धाम से स्वतंत्रता दिवस मनाओल गेल।

दरभंगा जिला (मधुबनी सहित ) जतय ब्रजकिशोर प्रसाद , धरनीधर बाबू , हरिनाथ मिश्र ( कोइलख ) जानकी नंदन सिंह ( मधेपुर ) इत्यादि गांधीवादी सत्याग्रहक पक्ष मे छला मुदा अन्य बहुत रास क्रांतिकारी हिंसात्मक आन्दोलन के पक्ष छलैथ आ ओहि अनुरूप कारवाई सेहो करैथ। ११ अगस्त १९४२ के सचिवालय गोलीकांडक उपरान्त आन्दोलन हिंसात्मक भ’ गेलैक, जाहि मे मिथिला भूमिका आ सहभागिता उल्लेखनीय अछि।

१४ अगस्त १९४२ के मधुबनी आ पंडौल मे तार काटल गेलैक आ रेलक पटरी उखारि देल गेलैक। मधेपुर थाना पर आन्दोलनकारिक भीड़ आक्रमण क’ क्षति पहुंचेलक। रहिका रोड पर पुल तोड़ल गेलैक। रमौली आ अन्यान्य स्थान पर पुल तोड़ल गेल। १५ अगस्त १९४२ के मधुबनीक वकील कचहरी नहि गेेला। संध्याकाल समय थानाक साझा एकत्रित भीड़ पर पुलिस गोली चला देलक।

बेनीपट्टी रजिस्ट्री ऑफिस पर आन्दोलनकारिक भीड़ आक्रमण क’ झंडा फहरा देलक। डाकघर आ थाना पर आन्दोलनकारिक भीड़ झंडोत्तोलन केलन्हि। झंझारपुर थाने अन्तर्गत सड़क क्षतिग्रह क’ देल गेलैक। १४ सँ २० अगस्त १९४२ क मध्य उत्तेजित भीड़ कई थाने पर आक्रमण क’ देलक। मधेपुर , झंझारपुर , फुलपरास , मधवापुर , बेनीपट्टी , खजौली ,हरलाखी , लदनियां आ लौकही थाना पर आन्दोलनकारिक किछु दिन कब्जा रहलैक। स्थितिक गंभीरता के देखैैत दरभंगा मेडिकल कॉलेज आ मिथिला कॉलेज के छात्र पर धारा १४४ क अंतर्गत दू सप्ताहक सड़क पर चलवाक प्रतिबन्ध लगलैैक। स्कूल आ कोलेजक छात्रावासक पुलिस द्वारा तलासी लेेल गेलैैक। २० अगस्त के बिरोध दबेेवाक लेल अंग्रेज सैनिक दस्ताक दरभंगा आगमन भेलैक जकर संचालन सैलिसबरी क’ रहल छलाह। २१ अगस्त के दू गोट अतिरिक्त अंग्रेज सैनिक दस्ता दरभंगा आओल। जिला मजिस्ट्रेट श्री आर०एन० लिन्स ओहि दस्ताक संग मधुबनी पहुंचल। २२ अगस्त के श्री ए० जे० सेलिसबरी , जे क्रांतिक कट्टर बिरोधी छल, औपचारिक रूप स’ जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त क’ देेल गेला। सेलिसबरी अपन अधिकतर समय बेेरहमी आ प्रति हिंसात्मक ढ़ंग सँ आन्दोलनक दमनमे मधुबनी मे बितोलन्हि।

मधुबनी जिलाक नरपतिनगर गामक सुपुत्र सूर्य नारायण सिंह अपनी अहम् भूमिका निभोलन्हि। १९४२ ई० क क्रान्तिक प्रारम्भ हेेवाक समय वा ओहि समयक देश के विभिन्न जेल मे बंद किछु देश भक्त जेल सँ निकलवाक लेल आ संकट काल मे आजादीक लड़ाई मे हाथ बंटेवाक लेल अनधर्य भ’ रहल छलैथ। ओहि उद्देश्यों सँ प्रेरित भ’ हजारीबाग जेल सँ ९ नवम्बर १९४२ दीयावातीक राति जय प्रकाश नारायण , रामानंद मिश्र , योगेन्द्र शुक्ल , गुलाब चन्द्र गुप्त एवं शालिग्राम सिंहक संग सूरज नारायण सिंह जेलक दीवार फांदि फरार भ’ गेलैथ। फरार भ’ ओ सब नेपालक तराई मे चलि गेला जतय सँ आन्दोलन के कार्यक्रमक नव दिशा देेल गेलैक।

जेल अधिकारी द्वारा गम्भीर प्रताड़ना देेल जेवाक बादो स्वतंत्रता सेनानीक संग उत्साहवर्द्धक वातावरण रहैैते छलैक। अत्यन्त शारीरिक कष्टक बादो राष्ट्रीय जागरण आ राष्ट्र्मुक्तिक ललकक अनुभव करैत पुनः दुना शक्तिक अनुभव करैत स्वतंत्रता सेनानी भारत माताक जयकारा आ बन्दे मातरम नारा सँ जेल परिसर के गुंजायमान रखैैत छलैथ। अत: मिथिलाक स्वतंत्रता संग्राममे महत्वपूर्ण योगदान छलैक। समस्त स्वतंत्रता सेनानी के कोटि कोटि नमन। अस्तु।